उनकी जन्म तिथि, माता-पिता और सही जन्मस्थान ज्ञात नहीं हैं। स्रोत उन्हें नूबिया या पश्चिमी और उत्तरी अफ़्रीकी पृष्ठभूमि से जोड़ते हैं, लेकिन कोई एक भौगोलिक संबंध निश्चित नहीं है।
नजमा ख़ातून
वंश शोध नोट — और देखें
नाम के कई पारंपरिक रूप मिलते हैं; सभी को एक ही व्यक्ति के वैकल्पिक नामों के रूप में रखा गया है।
PER-000018
परिवार का सदस्य
संभावित
दफ़न स्थान अज्ञात
विभिन्न स्रोत-परंपराओं से समर्थित
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सम्मानित नजमा ख़ातून इमाम मूसा अल-काज़िम के परिवार से जुड़ी थीं और इमाम अली अल-रिज़ा की माता थीं। प्रारंभिक और बाद के स्रोत उनके लिए तुकतम, सकन या सुकैना नूबिय्या, अरवा, समानह, उम्मुल बनीन, अल-ताहिरा, अल-ख़ैज़ुरान और अल-शक़रा जैसे अनेक नाम और उपाधियाँ देते हैं। उनके मूल नाम, भौगोलिक पृष्ठभूमि और आरंभिक जीवन पर रिपोर्टें एक जैसी नहीं हैं, लेकिन अली अल-रिज़ा की माता के रूप में उनकी मूल पहचान जीवनी परंपरा में मज़बूत है।
विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोत उनकी मृत्यु का वर्ष, आयु या परिस्थितियाँ सुरक्षित नहीं रखते, इसलिए कोई निश्चित तिथि नहीं दी गई।
उनका प्रमाणित दफ़न स्थान अज्ञात है। किसी विशेष क़ब्र या मंसूब स्थान को स्थापित दफ़नगाह नहीं माना जा सकता और इस फ़ाइल में कोई मज़ार या स्थान संबंध नहीं है।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
सम्मानित नजमा ख़ातून दूसरी हिजरी सदी के मदीना में अहल अल-बैत के पारिवारिक इतिहास से संबंधित हैं। उनके जन्म, माता-पिता या बचपन का कोई स्वतंत्र भरोसेमंद विवरण सुरक्षित नहीं है। अल-ज़हबी ने अली अल-रिज़ा की माता को नूबिया की सुकैना कहा, जबकि इमामी स्रोत नजमा, तुकतम, सकन, अरवा, समानह और अल-ख़ैज़ुरान सहित अनेक रूप देते हैं। इन भेदों को अलग-अलग महिलाओं का निश्चित प्रमाण मानने के बजाय एक ही व्यक्तित्व के नामों और उपाधियों की विविधता के रूप में सावधानी से समझना उचित है।
शैख़ अल-सदूक़ की उयून अख़बार अल-रिज़ा उन्हें उम्म वलद और तुकतम कहती है। एक रिपोर्ट में इमाम मूसा अल-काज़िम की माता हमीदा द्वारा उन्हें खरीदकर अपने पुत्र के लिए चुनने का वर्णन है, जबकि दूसरी रिपोर्ट मूसा अल-काज़िम द्वारा पश्चिमी क्षेत्रों से आए व्यापारी से उन्हें प्राप्त करने की बात कहती है। ये विवरण इमामी जीवनी परंपरा का भाग हैं और हर बारीकी को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित इतिहास नहीं कहा जा सकता। साझा बात यह है कि वे मूसा अल-काज़िम के घर में आईं और अली अल-रिज़ा की माता बनीं।
उयून अख़बार अल-रिज़ा उन्हें बुद्धि, धार्मिकता और हमीदा के सम्मान में विशिष्ट महिला के रूप में प्रस्तुत करती है। वही पुस्तक एक स्वप्न और शुभसूचना की रिपोर्ट भी देती है जिसमें भविष्य के पुत्र की श्रेष्ठता बताई गई; इसे इमामी धार्मिक रिपोर्ट के रूप में ही प्रस्तुत करना चाहिए, स्वतंत्र प्रमाणित घटना के रूप में नहीं। इसी परंपरा में उनकी कुनियत उम्मुल बनीन और जन्म के बाद अल-ताहिरा की उपाधि मिलती है।
अली अल-रिज़ा का जन्म मदीना में हुआ। अनेक जीवनीकार इसे 148 हिजरी में रखते हैं, हालाँकि दूसरी तिथियाँ भी मिलती हैं। इमामी स्रोत गर्भ, जन्म और शिशु की देखभाल के बारे में नजमा से संबद्ध कथन देते हैं। एक प्रसिद्ध रिपोर्ट में वे दूसरी दूध पिलाने वाली महिला की सहायता इसलिए माँगती हैं कि बार-बार दूध पिलाने से उनकी इबादत का समय कम हो गया था, दूध की कमी के कारण नहीं। यह रिपोर्ट उनकी धार्मिक स्मृति का भाग है और स्रोत-संबद्ध रहनी चाहिए।
बाद की कुछ इमामी जीवनियाँ उन्हें फ़ातिमा अल-मासूमा की माता भी बताती हैं, लेकिन इस संबंध का विस्तृत प्रसारण अली अल-रिज़ा की मातृ-परंपरा जितना प्रारंभिक और समान नहीं है। इसलिए उनकी सबसे मज़बूत ऐतिहासिक पहचान अली अल-रिज़ा की माता और मूसा अल-काज़िम के घर की सम्मानित महिला की है। उनकी कोई स्वतंत्र रचना, सार्वजनिक पद या बड़ा सुनिश्चित हदीस-संग्रह सुरक्षित नहीं है; उनकी स्मृति मुख्यतः पारिवारिक जीवनी और इमामी धार्मिक साहित्य में रही।
विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोत नजमा ख़ातून की मृत्यु का वर्ष, आयु, जनाज़ा या सही दफ़न स्थान निर्धारित नहीं करते। कुछ बाद की स्थानीय रचनाएँ मदीना के आसपास स्थानों से उनका संबंध बताती हैं, लेकिन किसी निश्चित क़ब्र या मज़ार को प्रमाणित करने के लिए यह पर्याप्त नहीं है। उनका इतिहास प्रारंभिक इस्लामी परिवारों में गैर-अरबी या अनिश्चित क्षेत्रीय पृष्ठभूमि वाली महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करता है।
शैख़ अल-सदूक़ की उयून अख़बार अल-रिज़ा उन्हें उम्म वलद और तुकतम कहती है। एक रिपोर्ट में इमाम मूसा अल-काज़िम की माता हमीदा द्वारा उन्हें खरीदकर अपने पुत्र के लिए चुनने का वर्णन है, जबकि दूसरी रिपोर्ट मूसा अल-काज़िम द्वारा पश्चिमी क्षेत्रों से आए व्यापारी से उन्हें प्राप्त करने की बात कहती है। ये विवरण इमामी जीवनी परंपरा का भाग हैं और हर बारीकी को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित इतिहास नहीं कहा जा सकता। साझा बात यह है कि वे मूसा अल-काज़िम के घर में आईं और अली अल-रिज़ा की माता बनीं।
उयून अख़बार अल-रिज़ा उन्हें बुद्धि, धार्मिकता और हमीदा के सम्मान में विशिष्ट महिला के रूप में प्रस्तुत करती है। वही पुस्तक एक स्वप्न और शुभसूचना की रिपोर्ट भी देती है जिसमें भविष्य के पुत्र की श्रेष्ठता बताई गई; इसे इमामी धार्मिक रिपोर्ट के रूप में ही प्रस्तुत करना चाहिए, स्वतंत्र प्रमाणित घटना के रूप में नहीं। इसी परंपरा में उनकी कुनियत उम्मुल बनीन और जन्म के बाद अल-ताहिरा की उपाधि मिलती है।
अली अल-रिज़ा का जन्म मदीना में हुआ। अनेक जीवनीकार इसे 148 हिजरी में रखते हैं, हालाँकि दूसरी तिथियाँ भी मिलती हैं। इमामी स्रोत गर्भ, जन्म और शिशु की देखभाल के बारे में नजमा से संबद्ध कथन देते हैं। एक प्रसिद्ध रिपोर्ट में वे दूसरी दूध पिलाने वाली महिला की सहायता इसलिए माँगती हैं कि बार-बार दूध पिलाने से उनकी इबादत का समय कम हो गया था, दूध की कमी के कारण नहीं। यह रिपोर्ट उनकी धार्मिक स्मृति का भाग है और स्रोत-संबद्ध रहनी चाहिए।
बाद की कुछ इमामी जीवनियाँ उन्हें फ़ातिमा अल-मासूमा की माता भी बताती हैं, लेकिन इस संबंध का विस्तृत प्रसारण अली अल-रिज़ा की मातृ-परंपरा जितना प्रारंभिक और समान नहीं है। इसलिए उनकी सबसे मज़बूत ऐतिहासिक पहचान अली अल-रिज़ा की माता और मूसा अल-काज़िम के घर की सम्मानित महिला की है। उनकी कोई स्वतंत्र रचना, सार्वजनिक पद या बड़ा सुनिश्चित हदीस-संग्रह सुरक्षित नहीं है; उनकी स्मृति मुख्यतः पारिवारिक जीवनी और इमामी धार्मिक साहित्य में रही।
विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोत नजमा ख़ातून की मृत्यु का वर्ष, आयु, जनाज़ा या सही दफ़न स्थान निर्धारित नहीं करते। कुछ बाद की स्थानीय रचनाएँ मदीना के आसपास स्थानों से उनका संबंध बताती हैं, लेकिन किसी निश्चित क़ब्र या मज़ार को प्रमाणित करने के लिए यह पर्याप्त नहीं है। उनका इतिहास प्रारंभिक इस्लामी परिवारों में गैर-अरबी या अनिश्चित क्षेत्रीय पृष्ठभूमि वाली महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करता है।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
नजमा ख़ातून का पहला ऐतिहासिक महत्व अली अल-रिज़ा की माता होना है। अल-ज़हबी की सुन्नी जीवनी और इमामी स्रोत दोनों इस मूल संबंध को सुरक्षित रखते हैं, यद्यपि नाम और मूल पर भेद है।
उनके अनेक नाम प्रारंभिक इस्लामी समाज में उम्म वलद महिलाओं की पहचान, नाम परिवर्तन और भौगोलिक उपाधियों की जटिलता दिखाते हैं। उत्तरदायी शोध किसी एक बाद की मंसूबियत को निश्चित जातीयता या वंश नहीं बनाता।
इमामी स्मृति में वे बुद्धि, इबादत और अहल अल-बैत के घर में निष्ठा का उदाहरण हैं। उनकी ऐतिहासिक महत्ता तब बेहतर सुरक्षित रहती है जब धार्मिक रिपोर्टें स्पष्ट स्रोत के साथ और मृत्यु तथा दफ़न की अनिश्चितता ईमानदारी से लिखी जाए।
उनके अनेक नाम प्रारंभिक इस्लामी समाज में उम्म वलद महिलाओं की पहचान, नाम परिवर्तन और भौगोलिक उपाधियों की जटिलता दिखाते हैं। उत्तरदायी शोध किसी एक बाद की मंसूबियत को निश्चित जातीयता या वंश नहीं बनाता।
इमामी स्मृति में वे बुद्धि, इबादत और अहल अल-बैत के घर में निष्ठा का उदाहरण हैं। उनकी ऐतिहासिक महत्ता तब बेहतर सुरक्षित रहती है जब धार्मिक रिपोर्टें स्पष्ट स्रोत के साथ और मृत्यु तथा दफ़न की अनिश्चितता ईमानदारी से लिखी जाए।
पारिवारिक संबंध
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
इमाम मूसा काज़िम
संभावित
🌱 संतान
स्रोत
उयून अख़बार अल-रिज़ा | शैख़ अल-सदूक़ | खंड एक, अध्याय दो, रिवायतें २-१ से २-४; संस्करणों में पृष्ठ अलग | https://al-islam.org/uyun-akhbar-ar-ridha-volume-1-shaykh-saduq/chapter-2-traditions-about-imam-al-ridhas-mother-and-her | तुकतम, उम्म वलद स्थिति, हमीदा की रिपोर्टें, अनेक नाम, धार्मिकता और जन्म संबंधी रिवायतेंसियर आलाम अल-नुबला | शम्स अल-दीन अल-ज़हबी | खंड नौ, पृष्ठ ३८७-३८८ | https://www.islamweb.net/ar/library/content/60/1568/%D8%B9%D9%84%D9%8A-%D8%A7%D9%84%D8%B1%D8%B6%D9%89 | अली अल-रिज़ा की माता को नूबिया की सुकैना कहना तथा मदीना और १४८ हिजरी का संदर्भ
अयान अल-शिया | सैयद मुहसिन अल-अमीन | खंड दो, पृष्ठ १३; संस्करणों में खंड और पृष्ठ अलग हो सकते हैं | https://lib.eshia.ir/71735/2/13 | अल-ख़ैज़ुरान, अरवा, अल-शक़रा, नजमा, सकन और तुकतम नामों का तुलनात्मक विवरण
शिया महिला हदीस रावियाएँ | नहला ग़रवी नाइनी | नजमा उम्मुल बनीन की जीवनी प्रविष्टि; पृष्ठ अलग | https://al-islam.org/shiah-women-transmitters-hadith-nahleh-gharavi-naeini/203-najmah-umm-al-banin-mother-imam-al-ridha | अनेक नाम, अल-ताहिरा उपाधि, इबादत और जन्म की मंसूब रिवायतें
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