जाफ़र बिन हुसैन

PER-000085 अहल अल-बैत संभावित दफ़न स्थान अज्ञात इमामी स्रोत-आधारित सूची
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जाफ़र इब्न हुसैन इमाम हुसैन इब्न अली अलैहिस्सलाम के कम-वर्णित पुत्र थे। इमामी जीवनी और वंशावली परंपरा उन्हें इमाम हुसैन की अलग संतान के रूप में दर्ज करती है, उनकी माता को क़ुदाआ क़बीले की एक अज्ञात महिला बताती है और कहती है कि वे अपने पिता के जीवनकाल में चल बसे तथा उनकी कोई जीवित वंश-रेखा नहीं रही। जन्म, आयु, गतिविधियों और दफ़न के विश्वसनीय विस्तृत विवरण सुरक्षित नहीं हैं।
जन्म

जन्म की तारीख़ और स्थान अज्ञात हैं। उपलब्ध इमामी स्रोत उन्हें इमाम हुसैन का पुत्र बताते हैं, लेकिन जन्म का वर्ष या स्थान नहीं देते।

निधन

वे इमाम हुसैन के जीवनकाल में, अर्थात ६१ हिजरी या ६८० ईस्वी से पहले चल बसे। सही तारीख़, स्थान, आयु और मृत्यु का कारण उद्धृत स्रोतों में नहीं है।

दफ़न या संबद्ध स्थान

दफ़न अज्ञात है। जाफ़र इब्न हुसैन के लिए कोई क़ब्र, मज़ार या मक़ाम ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है; मज़ार और स्थान-निर्देशांक के खाने जानबूझकर खाली रखे गए हैं।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

जाफ़र इब्न हुसैन इमाम हुसैन इब्न अली के पुत्र और इमाम अली तथा हज़रत फ़ातिमा अल-ज़हरा अलैहिमस्सलाम के पौत्र थे। उनकी पहचान मुख्यतः इमाम हुसैन की संतानों की इमामी सूचियों से होती है। उन्हें जाफ़र इब्न अली या जाफ़र इब्न अक़ील, जो कर्बला विवरणों के अलग व्यक्ति हैं, से नहीं मिलाना चाहिए।

शैख़ अल-मुफ़ीद की किताब अल-इरशाद जाफ़र को इमाम हुसैन की छह संतानों में गिनती है। यही विवरण उनकी माता को क़ुदाआ क़बीले की महिला कहता है, लेकिन उनका व्यक्तिगत नाम सुरक्षित नहीं करता। अल-तबरसी ने इलाम अल-वरा में यही मूल जानकारी दोहराई है।

इन स्रोतों के अनुसार जाफ़र इमाम हुसैन के जीवनकाल में चल बसे और उनकी कोई जीवित संतान नहीं रही। इससे केवल इतना स्थापित होता है कि उनकी मृत्यु ६१ हिजरी, अर्थात ६८० ईस्वी से पहले हुई; सही तारीख़, स्थान, आयु और मृत्यु का कारण उद्धृत सामग्री में नहीं है।

चूंकि जाफ़र इमाम हुसैन से पहले चल बसे थे, इसलिए उन्हें कर्बला के शहीदों, कारवां के यात्रियों या आशूरा के योद्धाओं में नहीं गिना जाना चाहिए। उपलब्ध मान्य स्रोत उनके किसी भाषण, विद्वत पद, विवाह, संतान या राजनीतिक गतिविधि की भी पुष्टि नहीं करते।

उनका दफ़न स्थान अज्ञात है और समीक्षा किए गए प्रमाणों के आधार पर किसी वर्तमान क़ब्र, मज़ार या मक़ाम को उनका प्रमाणित दफ़न नहीं कहा जा सकता। उनकी संक्षिप्त जीवनी का महत्व इमाम हुसैन की संतानों की सही सूची सुरक्षित रखने और समान नाम वाले व्यक्तियों के भ्रम को रोकने में है।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

जाफ़र का रिकॉर्ड इमाम हुसैन की संतानों की वंशावली और जीवनी क्रम सुरक्षित रखता है तथा स्पष्ट करता है कि इमाम से संबद्ध हर पुत्र कर्बला में शहीद नहीं हुआ; जाफ़र अपने पिता के जीवनकाल में ही चल बसे थे।

यह प्रोफ़ाइल प्रमाण के अनुपात में जीवनी लिखने का उदाहरण है: माता का क़बीलाई संबंध और वंश न बचने की सूचना रखी गई है, जबकि जन्म-क्रम, विस्तृत सार्वजनिक जीवन और दफ़न को स्पष्ट रूप से अज्ञात रखा गया है।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

Kitab al-Irshad | al-Shaykh al-Mufid | Child-list passage; pagination varies by edition; quoted in Musnad al-Imam al-Shahid, vol. 3, p. 36 | https://lib.eshia.ir/86866/3/36 | Ja'far's identity as a son of Imam Husayn, unnamed Quda'i mother, death during his father's lifetime and no surviving progeny
I'lam al-Wara bi-A'lam al-Huda | al-Fadl ibn al-Hasan al-Tabrisi | Vol. 1, p. 479 | https://ar.lib.eshia.ir/16001/1/479 | Corroborating Imami child list, mother from Quda'a, death during Imam Husayn's lifetime and no surviving progeny
Nafas al-Mahmum | Shaykh Abbas al-Qummi | Children of Imam Husayn section; pagination varies by edition | https://al-islam.org/nafasul-mahmum-relating-heart-rending-tragedy-karbala-shaykh-abbas-qummi/children-imam-husayn-and | Later Imami compilation preserving the same limited biographical tradition and distinguishing Ja'far from Karbala martyrs

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