उनका निश्चित जन्मवर्ष और जन्मस्थान प्रयुक्त विश्वसनीय स्रोतों में सुरक्षित नहीं है। वह प्रारम्भिक अब्बासी काल में इमाम मूसा अल-काज़िम के घराने से थीं।
अलिय्या बिन्त मूसा काज़िम
वंश शोध नोट — और देखें
इमाम मूसा अल-काज़िम अलैहिस्सलाम की संतान की संख्या और नामों के बारे में वंशावली स्रोतों में मतभेद है; अल-इरशाद की विशिष्ट सूची के अनुसार इन ३७ नामों को संभावित स्तर पर रखा गया है।
PER-000147
अहल अल-बैत
संभावित
दफ़न स्थान अज्ञात
इमामी स्रोत-आधारित सूची
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अलिय्या बिन्त इमाम मूसा अल-काज़िम अलैहिस्सलाम का नाम इमाम मूसा इब्न जाफ़र की संतानों की प्राचीन इमामी सूचियों में सुरक्षित है। शैख़ मुफ़ीद और तबरसी दोनों उन्हें उनकी पुत्रियों में रखते हैं, यद्यपि वंशावली स्रोत संतानों की कुल संख्या और कुछ नामों में भिन्न हैं। उनकी स्वतंत्र विश्वसनीय जीवनी, माता का नाम, विवाह, संतान, निश्चित तिथियाँ या दफ़्न स्थान सुरक्षित नहीं है। इसलिए उनकी पहचान को संभावित स्तर पर और पुष्ट वंशावली सूचना तक सीमित रखा गया है।
उनकी मृत्यु का निश्चित वर्ष, स्थान और परिस्थितियाँ अज्ञात हैं; कोई स्वतंत्र विश्वसनीय मृत्यु-विवरण नहीं मिला।
उनका दफ़्न स्थान अज्ञात है। कोई सत्यापित क़ब्र, मज़ार या विश्वसनीय प्राचीन क़ब्रिस्तान-संबंध नहीं मिला।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
अलिय्या के बारे में मुख्य ऐतिहासिक प्रमाण इमाम मूसा अल-काज़िम अलैहिस्सलाम की संतान-सूची में उनका नाम है। शैख़ मुफ़ीद की किताब अल-इरशाद में सैंतीस संतानों की सूची के भीतर अलिय्या को पुत्रियों में रखा गया है। तबरसी ने भी लगभग समान सूची सुरक्षित की और उनका नाम शामिल किया। ये दोनों सूचनाएँ उन्हें इमाम मूसा इब्न जाफ़र की पुत्री और अहले बैत की मूसवी शाखा की महिला के रूप में पहचानती हैं।
स्रोत इमाम मूसा अल-काज़िम के पुत्रों और पुत्रियों की कुल संख्या में भिन्न हैं और कभी नामों की वर्तनी, दोहराव तथा क्रम में भी अंतर मिलता है। इसलिए संरक्षित अभिलेख का संभावित विश्वास-स्तर उचित है। पूरा वंश अलिय्या बिन्त मूसा इब्न जाफ़र लिखना आवश्यक है, क्योंकि अलवी वंशावली साहित्य में अलिय्या नाम की अन्य महिलाएँ भी हैं और केवल समान नाम के कारण उन्हें एक व्यक्ति नहीं माना जा सकता।
प्रयुक्त प्राचीन सूचियाँ अलिय्या की माता, पति या संतानों का नाम नहीं बतातीं और उनकी शिक्षा, हदीस रिवायत, यात्रा, सार्वजनिक गतिविधि या किसी विशिष्ट ऐतिहासिक घटना का स्वतंत्र विवरण नहीं देतीं। एक बाद का जीवनी स्रोत भी स्पष्ट करता है कि उनके जीवन का अलग इतिहास उपलब्ध नहीं है। इस मौन को बनाए रखना चाहिए और प्रसिद्ध बहनों या परिवार के अन्य सदस्यों की सूचनाएँ उनसे नहीं जोड़नी चाहिए।
उनके जन्म और मृत्यु के निश्चित वर्ष अज्ञात हैं। उन्हें केवल सामान्य रूप से प्रारम्भिक अब्बासी काल में इमाम मूसा अल-काज़िम के घराने में रखा जा सकता है, पर कोई सटीक कालक्रम नहीं दिया जा सकता। किसी विश्वसनीय पुराने स्रोत से मृत्यु-स्थान, जनाज़ा या दफ़्न सिद्ध नहीं होता और बाद की स्थानीय मान्यता के आधार पर मज़ार या मानचित्र स्थान नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसलिए उनका दफ़्न स्थान अज्ञात है।
स्रोत इमाम मूसा अल-काज़िम के पुत्रों और पुत्रियों की कुल संख्या में भिन्न हैं और कभी नामों की वर्तनी, दोहराव तथा क्रम में भी अंतर मिलता है। इसलिए संरक्षित अभिलेख का संभावित विश्वास-स्तर उचित है। पूरा वंश अलिय्या बिन्त मूसा इब्न जाफ़र लिखना आवश्यक है, क्योंकि अलवी वंशावली साहित्य में अलिय्या नाम की अन्य महिलाएँ भी हैं और केवल समान नाम के कारण उन्हें एक व्यक्ति नहीं माना जा सकता।
प्रयुक्त प्राचीन सूचियाँ अलिय्या की माता, पति या संतानों का नाम नहीं बतातीं और उनकी शिक्षा, हदीस रिवायत, यात्रा, सार्वजनिक गतिविधि या किसी विशिष्ट ऐतिहासिक घटना का स्वतंत्र विवरण नहीं देतीं। एक बाद का जीवनी स्रोत भी स्पष्ट करता है कि उनके जीवन का अलग इतिहास उपलब्ध नहीं है। इस मौन को बनाए रखना चाहिए और प्रसिद्ध बहनों या परिवार के अन्य सदस्यों की सूचनाएँ उनसे नहीं जोड़नी चाहिए।
उनके जन्म और मृत्यु के निश्चित वर्ष अज्ञात हैं। उन्हें केवल सामान्य रूप से प्रारम्भिक अब्बासी काल में इमाम मूसा अल-काज़िम के घराने में रखा जा सकता है, पर कोई सटीक कालक्रम नहीं दिया जा सकता। किसी विश्वसनीय पुराने स्रोत से मृत्यु-स्थान, जनाज़ा या दफ़्न सिद्ध नहीं होता और बाद की स्थानीय मान्यता के आधार पर मज़ार या मानचित्र स्थान नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसलिए उनका दफ़्न स्थान अज्ञात है।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
अलिय्या का ऐतिहासिक महत्व मुख्यतः इमाम मूसा अल-काज़िम के परिवार पर दो मान्य इमामी विवरणों में उनका नाम सुरक्षित रहने में है। यह संक्षिप्त वंशावली सूचना भी मूसवी घराने की महिलाओं का अभिलेख पूरा करती है और परिवार के इतिहास को केवल उन संतानों तक सीमित होने से बचाती है जिनकी विस्तृत जीवनियाँ बची हैं।
उनका परिचय सीमित प्रमाण के जिम्मेदार उपयोग का उदाहरण भी है। समर्थित वंश लिखा जा सकता है, जबकि संतान-सूचियों के मतभेद और व्यक्तिगत, वैवाहिक, कालक्रम तथा दफ़्न संबंधी सूचना का अभाव स्पष्ट रहना चाहिए। यह तरीका समान नाम वाली महिलाओं से भ्रम रोकता और अप्रमाणित मज़ार या भक्ति-जीवनी बनाने से बचाता है।
उनका परिचय सीमित प्रमाण के जिम्मेदार उपयोग का उदाहरण भी है। समर्थित वंश लिखा जा सकता है, जबकि संतान-सूचियों के मतभेद और व्यक्तिगत, वैवाहिक, कालक्रम तथा दफ़्न संबंधी सूचना का अभाव स्पष्ट रहना चाहिए। यह तरीका समान नाम वाली महिलाओं से भ्रम रोकता और अप्रमाणित मज़ार या भक्ति-जीवनी बनाने से बचाता है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
इमाम मूसा काज़िम
संभावित
स्रोत
Kitab al-Irshad | Shaykh al-Mufid | Children of Imam Musa al-Kazim; p. 283 in the edition cited by al-Ataridi, pagination varies by edition | https://lib.eshia.ir/86869/1/177 | Lists Aliyya among the thirty-seven children of Imam Musa al-KazimI'lam al-Wara bi-A'lam al-Huda | al-Fadl ibn al-Hasan al-Tabrisi | Children of Imam Musa al-Kazim; pagination varies by edition | https://lib.eshia.ir/86869/1/177 | Independent Imami list also includes Aliyya among the daughters
Riyahin al-Shari'a | Dhabih Allah Mahallati | Vol. 4, entry on Aliyya bint Musa al-Kazim; pagination varies by digital edition | https://download.ghbook.ir/downloads.php?file=3895-f-13910202-ryahine-alshariat-j4.htm&id=1003895004&packagename=ir.ghbook.reader&platform=site | Later biographical notice states that no separate historical details about her life are available
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