अबू अल-सनाबिल अब्दुर्रहमान इब्न अब्दुल्लाह इब्न आमिर इब्न कुरैज़

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अबू अल-सनाबिल अब्दुर्रहमान अल-असग़र इब्न अब्दुल्लाह इब्न आमिर इब्न कुरैज़ बनी अब्द शम्स के वंशावली व्यक्ति और ख़दीजा बिन्त अली अलैहस्सलाम के बाद के पति थे। इब्न सअद स्पष्ट रूप से अब्दुर्रहमान अल-असग़र को अबू अल-सनाबिल बताते हैं और इब्न हज़्म की टिप्पणी नसब क़ुरैश से यही पाठ देती है। इब्न अबी दुनिया ख़दीजा के बाद के पति को अबू अल-सनाबिल अब्दुर्रहमान इब्न अब्दुल्लाह इब्न आमिर लिखते हैं, जिससे भाई की पहचान हल होती है। «अल-मुहब्बर» में अकेला छोटा पाठ अब्दुल्लाह इब्न आमिर है; उसे पाठांतर रखा गया, पर अधिक स्पष्ट स्रोतों पर प्राथमिकता नहीं दी गई। पिता की निस्बत सुरक्षित है और माता एक अनाम दासी-माता थीं, कैसा बिन्त अल-हारिस नहीं।
जन्म

उनके जन्म की निश्चित तारीख़ और स्थान विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोतों में सुरक्षित नहीं हैं।

निधन

उनकी मृत्यु की तारीख़, आयु, स्थान और परिस्थितियाँ विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण से स्थापित नहीं हैं।

दफ़न या संबद्ध स्थान

उनका निश्चित दफ़्न-स्थान अज्ञात है। किसी क़ब्र, मक़ाम या नक़्शे के बिंदु को विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण के बिना उनसे नहीं जोड़ा जा सकता।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

अबू अल-सनाबिल क़ुरैश की बनी अब्द शम्स शाखा से थे। उनके पिता अब्दुल्लाह इब्न आमिर इब्न कुरैज़ थे, जिन्हें वंशावली स्रोत बसरह के शासक और ख़ुरासान की विजयों से जुड़े व्यक्ति के रूप में याद करते हैं। इब्न हज़्म की सूची अब्दुल्लाह इब्न आमिर के पुत्रों में अब्दुर्रहमान नाम वाले व्यक्तियों को लिखती और एक अब्दुर्रहमान इब्न अब्दुल्लाह का विवाह ख़दीजा बिन्त अली से दर्ज करती है।

सबसे मजबूत स्वतंत्र पहचान इब्न सअद की «तबक़ात» में है। सूची स्पष्ट कहती है कि अब्दुर्रहमान अल-असग़र अबू अल-सनाबिल थे और उन्हें अब्दुस्सलाम के साथ एक अनाम दासी-माता की संतान रखती है। यही सूची एक दूसरे अब्दुर्रहमान, अबू अल-नद्र, को दूसरी दासी-माता से अलग दर्ज करती है। इससे दूसरे चरण की यह धारणा सुधरती है कि कैसा बिन्त अल-हारिस इस व्यक्ति की माता थीं; कैसा अब्दुल्लाह इब्न आमिर की पत्नी थीं, लेकिन विस्तृत संतान सूची अबू अल-सनाबिल असग़र को उनसे नहीं जोड़ती।

इब्न हज़्म का मुख्य पाठ पहले लिखे अब्दुर्रहमान को अबू अल-सनाबिल कहता है, लेकिन उसी पृष्ठ की आलोचनात्मक टिप्पणी नसब क़ुरैश से बताती है कि अब्दुर्रहमान अल-असग़र अबू अल-सनाबिल थे। चूँकि इब्न सअद भी स्वतंत्र रूप से यही पहचान देते हैं, संयुक्त प्रमाण कुनियत को अब्दुर्रहमान अल-असग़र के पक्ष में हल करते हैं। सुरक्षित प्रशासनिक नाम अभी भी सही है क्योंकि उसमें कुनियत, व्यक्तिगत नाम, पिता और दादा हैं, भले असग़र न जोड़ा गया हो।

विवाह प्रमाण भी इसी पहचान से मेल खाते हैं। इब्न अबी दुनिया लिखते हैं कि ख़दीजा बिन्त अली अलैहस्सलाम पहले अब्दुर्रहमान इब्न अक़ील की पत्नी थीं और बाद में अबू अल-सनाबिल अब्दुर्रहमान इब्न अब्दुल्लाह इब्न आमिर इब्न कुरैज़ से उनका विवाह हुआ। इब्न हज़्म भी अब्दुर्रहमान इब्न अब्दुल्लाह का ख़दीजा बिन्त अली से विवाह लिखते हैं। «अल-मुहब्बर» छोटा पाठ अबू अल-सनाबिल अब्दुल्लाह इब्न आमिर देता है। यह अकेला पाठांतर सुरक्षित है, लेकिन अधिक स्पष्ट पुत्र-स्तर पहचान को नहीं पलटता।

उनकी स्वतंत्र विद्वत, राजनीतिक, सैनिक या हदीस संबंधी जीवनी सुरक्षित नहीं है। उन्हें सहाबी अबू अल-सनाबिल इब्न बअकक़ से अलग रखना भी आवश्यक है, क्योंकि वह पैग़म्बरी काल का दूसरा व्यक्ति था। वर्तमान व्यक्ति का जन्म, संतान, मृत्यु, आयु और क़ब्र विश्वसनीय रूप से ज्ञात नहीं हैं; इसलिए कोई असिद्ध घटना, दफ़्न-स्थान, ज़ियारतगाह या नक़्शे का बिंदु नहीं जोड़ा गया।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

उनका ऐतिहासिक महत्त्व बनी अब्द शम्स और इमाम अली के परिवार के बीच वैवाहिक संबंध में है। ख़दीजा बिन्त अली से विवाह ने उन्हें अहले बैत के व्यापक पारिवारिक अभिलेख से जोड़ा।

यह परिचय संयुक्त वंशावली नियंत्रण से पहचान हल करने का मजबूत उदाहरण है। दोहराया व्यक्तिगत नाम और पितृनाम पर्याप्त नहीं थे; असग़र का वर्णन, अबू अल-सनाबिल की कुनियत, मातृ समूह और विवाह समाचार को इब्न सअद, इब्न हज़्म, नसब क़ुरैश और इब्न अबी दुनिया में साथ जाँचना पड़ा।

स्वतंत्र तीसरे चरण ने सही भाई को अब्दुर्रहमान अल-असग़र के रूप में हल किया और ख़दीजा बिन्त अली के सुरक्षित जीवनसाथी संबंध की पुष्टि की। पिता को अलग स्रोत-समीक्षा में दिया जा सकता है, लेकिन कैसा को माता बनाने वाला पिछला प्रस्ताव लागू नहीं होना चाहिए क्योंकि विस्तृत शास्त्रीय सूची माता को अनाम दासी-माता बताती है।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

Al-Tabaqat al-Kubra | Muhammad ibn Sa'd | Dar al-Kutub al-Ilmiyya edition, displayed p. 33 | https://ablibrary.net/book_content/17803/33 | explicitly identifies Abd al-Rahman al-Asghar as Abu al-Sanabil and states that he and Abd al-Salam were sons of an unnamed umm walad
Jamharat Ansab al-Arab | Ibn Hazm | Vol. 1, p. 75 | https://lib.eshia.ir/40506/1/75 | records an Abd al-Rahman ibn Abd Allah ibn Amir married to Khadija bint Ali and preserves the critical note from Nasab Quraysh identifying Abd al-Rahman al-Asghar as Abu al-Sanabil
Maqtal Amir al-Mu'minin Ali | Ibn Abi al-Dunya | Report 137, p. 107 | https://islamport.com/l/don/2242/138.htm | explicitly names Khadija bint Ali's later husband as Abu al-Sanabil Abd al-Rahman ibn Abd Allah ibn Amir ibn Kurayz
Al-Muhabbar | Muhammad ibn Habib al-Baghdadi | p. 57 | https://shamela.ws/book/12205/57 | preserves the isolated shorter wording Abu al-Sanabil Abd Allah ibn Amir ibn Kurayz; retained as a conflicting textual variant
Sunan al-Nasa'i | Ahmad ibn Shu'ayb al-Nasa'i | Hadith 3519 | https://sunnah.com/nasai:3519 | identifies the distinct Companion Abu al-Sanabil ibn Ba'kak and prevents homonym confusion

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