प्रारंभिक सुन्नी स्रोत सिला इब्न अशयम रहिमहुल्लाह के बारे में बताते हैं कि यात्रा में उन्हें बहुत तेज़ भूख लगी और उन्होंने अल्लाह से भोजन माँगा। इसके बाद रिवायतों में है कि उन्हें अप्रत्याशित रूप से ताज़ी खजूरें मिलीं और उन्होंने पेट भरकर खाया। एक रिवायत यह भी जोड़ती है कि उस समय उस क्षेत्र में ताज़ी खजूर मौजूद नहीं थीं। एक दूसरी रिवायत में बाद में एक साधु और उन खजूरों से उगे बताए गए खजूर के पेड़ों का प्रसंग आता है।
प्रारंभिक सुन्नी स्रोत सिला इब्न अशयम रहिमहुल्लाह से जुड़ी एक घटना सुरक्षित करते हैं जो यात्रा के दौरान तीव्र भूख की अवस्था में हुई। वह घर से दूर थे और उन्हें भोजन की वास्तविक आवश्यकता थी। उसी हालत में उन्होंने अल्लाह की ओर रुख किया और रोज़ी माँगी। कहानी की शुरुआत इसी सरल दृश्य से होती है: कठिन भूख, आवश्यकता और फिर अपने रब से भोजन की विनती।
इसके बाद रिवायतें एक अप्रत्याशित रोज़ी का वर्णन करती हैं। सिला रहिमहुल्लाह को एक लिपटा हुआ बंडल या पात्र मिला जिसमें ताज़ी खजूरें थीं। उन्होंने उन खजूरों में से खाया और पेट भर गया। इब्न अल-मुबारक द्वारा सुरक्षित रिवायत में एक अतिरिक्त बात है कि उस समय उस क्षेत्र में ताज़ी खजूर उपलब्ध नहीं थीं। इस प्रकार घटना का मुख्य दृश्य साफ़ रहता है: भूख, दुआ और फिर अचानक ताज़ी खजूर मिलना।
प्रारंभिक सामग्री में खजूरों की लपेट या पैकेट के बारे में भी एक विवरण मिलता है। कहा गया है कि वह सिला रहिमहुल्लाह के परिवार के पास बनी रही और बाद के एक रावी ने उसे उनकी पत्नी के पास देखा। यह बात मूल घटना को नहीं बदलती, लेकिन उस घटना से जुड़ी एक वस्तु के परिवार में सुरक्षित रहने का उल्लेख कहानी की रिवायती याद में बना रहता है।
एक दूसरी रिवायत में इसके बाद एक साधु का प्रसंग आता है। उसमें कहा गया है कि सिला रहिमहुल्लाह ने कुछ खजूरें उस साधु को दीं और बाद में लौटने पर ऐसे खजूर के पेड़ देखे गए जिनके बारे में कहा गया कि वे उन्हीं खजूरों से उगे थे। यह अतिरिक्त भाग उसी विशेष रिवायत से जुड़ा है और उसे हर बयान में मूल घटना का आवश्यक हिस्सा नहीं बनाया जाता।
इस घटना का मूल वर्णन इब्न अल-मुबारक की किताब अल-ज़ुह्द और अहमद इब्न हनबल की किताब अल-ज़ुह्द में सुरक्षित है, जबकि बाद के ग्रंथों में भी इससे संबंधित सामग्री आती है। कहानी का याद रहने वाला केंद्र बहुत सीधा है: सिला इब्न अशयम रहिमहुल्लाह यात्रा में तीव्र भूख से गुज़रे, उन्होंने अल्लाह से भोजन माँगा, उन्हें अप्रत्याशित रूप से ताज़ी खजूरें मिलीं और उन्होंने पेट भरकर खाया; एक प्रारंभिक रिवायत उस समय ताज़ी खजूरों के उपलब्ध न होने का भी उल्लेख करती है।
इसके बाद रिवायतें एक अप्रत्याशित रोज़ी का वर्णन करती हैं। सिला रहिमहुल्लाह को एक लिपटा हुआ बंडल या पात्र मिला जिसमें ताज़ी खजूरें थीं। उन्होंने उन खजूरों में से खाया और पेट भर गया। इब्न अल-मुबारक द्वारा सुरक्षित रिवायत में एक अतिरिक्त बात है कि उस समय उस क्षेत्र में ताज़ी खजूर उपलब्ध नहीं थीं। इस प्रकार घटना का मुख्य दृश्य साफ़ रहता है: भूख, दुआ और फिर अचानक ताज़ी खजूर मिलना।
प्रारंभिक सामग्री में खजूरों की लपेट या पैकेट के बारे में भी एक विवरण मिलता है। कहा गया है कि वह सिला रहिमहुल्लाह के परिवार के पास बनी रही और बाद के एक रावी ने उसे उनकी पत्नी के पास देखा। यह बात मूल घटना को नहीं बदलती, लेकिन उस घटना से जुड़ी एक वस्तु के परिवार में सुरक्षित रहने का उल्लेख कहानी की रिवायती याद में बना रहता है।
एक दूसरी रिवायत में इसके बाद एक साधु का प्रसंग आता है। उसमें कहा गया है कि सिला रहिमहुल्लाह ने कुछ खजूरें उस साधु को दीं और बाद में लौटने पर ऐसे खजूर के पेड़ देखे गए जिनके बारे में कहा गया कि वे उन्हीं खजूरों से उगे थे। यह अतिरिक्त भाग उसी विशेष रिवायत से जुड़ा है और उसे हर बयान में मूल घटना का आवश्यक हिस्सा नहीं बनाया जाता।
इस घटना का मूल वर्णन इब्न अल-मुबारक की किताब अल-ज़ुह्द और अहमद इब्न हनबल की किताब अल-ज़ुह्द में सुरक्षित है, जबकि बाद के ग्रंथों में भी इससे संबंधित सामग्री आती है। कहानी का याद रहने वाला केंद्र बहुत सीधा है: सिला इब्न अशयम रहिमहुल्लाह यात्रा में तीव्र भूख से गुज़रे, उन्होंने अल्लाह से भोजन माँगा, उन्हें अप्रत्याशित रूप से ताज़ी खजूरें मिलीं और उन्होंने पेट भरकर खाया; एक प्रारंभिक रिवायत उस समय ताज़ी खजूरों के उपलब्ध न होने का भी उल्लेख करती है।
निष्कर्ष
कहानी उस अप्रत्याशित रोज़ी पर समाप्त होती है जिसमें सिला इब्न अशयम रहिमहुल्लाह ने तीव्र भूख में अल्लाह से भोजन माँगा और उन्हें ताज़ी खजूरें मिलीं।
स्रोत
Ahmad ibn Hanbal, al-Zuhd, Akhbar Sila ibn Ashyam, report 1159
Ahmad ibn Hanbal, al-Zuhd, same report
Ibn al-Mubarak, al-Zuhd wa al-Raqa'iq, report 865
Ahmad ibn Hanbal, al-Zuhd, report 1159
Ibn al-Mubarak, al-Zuhd wa al-Raqa'iq, report 865: fresh dates when none were in the land
Ahmad ibn Hanbal, al-Zuhd, report 1159
Ibn al-Mubarak, al-Zuhd wa al-Raqa'iq, report 865; follow-up from Awfa ibn Dalham
Ahmad ibn Hanbal, al-Zuhd, report 1159: monk and later palm trees
Ibn Abi al-Dunya, Mujabu al-Da'wa, report 42/56 depending numbering
al-Lalaka'i, Sharh Usul I'tiqad Ahl al-Sunna, report 189
Abu al-Salil Durayb ibn Nuqayr narrator entry: trustworthy and explicitly narrated from Sila ibn Ashyam
CAND-0168 Task 1 evidence synthesis