इब्न अबी दुनिया ने अकाल के समय हबीब अल-अजमी रहिमहुल्लाह के बारे में एक रिवायत सुरक्षित की है। उन्होंने भोजन लिया जबकि उसकी कीमत अभी विक्रेताओं को देनी बाकी थी और फिर वह भोजन गरीबों में बाँट दिया। इसके बाद खाली थैलियाँ सीं, उन्हें अपने बिस्तर के नीचे रखा और अल्लाह से दुआ की। जब विक्रेता अपना हक़ लेने आए तो रिवायत के अनुसार थैलियाँ दिरहमों से भरी मिलीं, रकम तौली गई और उनके पूरे अधिकार के अनुसार भुगतान कर दिया गया।
इब्न अबी दुनिया ने हबीब अल-अजमी रहिमहुल्लाह के बारे में अकाल के समय की एक यादगार रिवायत सुरक्षित की है। लोग भोजन की कमी और कठिनाई में थे। रिवायत के अनुसार हबीब ने विक्रेताओं से भोजन लिया जबकि उसकी कीमत अभी चुकानी बाकी थी, और फिर वह भोजन गरीबों तथा ज़रूरतमंदों में बाँट दिया।
इस तरह कहानी ऐसी उदारता से शुरू होती है जो विक्रेताओं को उनका पैसा मिलने से पहले की गई थी। भोजन बाँटने के बाद थैलियाँ खाली रह गईं। बयान में आता है कि हबीब रहिमहुल्लाह ने उन खाली थैलियों को सी दिया, उन्हें अपने बिस्तर के नीचे रखा और फिर अल्लाह से दुआ की। स्रोत उस दुआ के ठीक शब्द सुरक्षित नहीं रखता।
कुछ समय बाद विक्रेता हबीब रहिमहुल्लाह के पास अपना बकाया पैसा लेने आए। यहीं रिवायत फिर उन्हीं थैलियों की ओर लौटती है जिन्हें बिस्तर के नीचे रखा गया था। जब उन्हें देखा गया तो बयान के अनुसार वे दिरहमों से भरी हुई मिलीं।
रकम को केवल अनुमान से नहीं दिया गया बल्कि उसे तौला गया। रिवायत कहती है कि दिरहमों की मात्रा विक्रेताओं के पूरे हक़ के बराबर थी। इस तरह कहानी की शुरुआत में जो भोजन उधार लिया गया था, उसकी पूरी कीमत चुका दी गई और उनका अधिकार अदा हो गया।
यह घटना बाद की कई पुरानी किताबों में भी सुरक्षित रही। अबू नुऐम ने हिल्यत अल-अवलिया में इसी मूल घटना को लिखा, लालकाई ने इसे हबीब की करामात से जुड़े वर्णनों में रखा और इब्न असाकिर ने भी हबीब अल-अजमी की ऐतिहासिक जीवनी में इस कहानी को दर्ज किया। मुख्य क्रम वही रहता है: अकाल, गरीबों के लिए भोजन, दुआ, हक़दारों का आना और उनके भुगतान के लिए पर्याप्त दिरहम मिलना।
सार्वजनिक कहानी में इस घटना को इसी सरल क्रम के क़रीब रखना उचित है। पैसा कैसे प्रकट हुआ, इसके लिए कोई नई प्रक्रिया गढ़ने की आवश्यकता नहीं है, और ऐसी निश्चित दुआ भी नहीं जोड़ी जा सकती जिसके शब्द स्रोत ने सुरक्षित नहीं रखे। कहानी का यादगार बिंदु यही है कि भोजन बाँटने और दुआ के बाद थैलियों में इतने दिरहम मिले कि विक्रेताओं का पूरा हक़ अदा हो गया।
इस तरह कहानी ऐसी उदारता से शुरू होती है जो विक्रेताओं को उनका पैसा मिलने से पहले की गई थी। भोजन बाँटने के बाद थैलियाँ खाली रह गईं। बयान में आता है कि हबीब रहिमहुल्लाह ने उन खाली थैलियों को सी दिया, उन्हें अपने बिस्तर के नीचे रखा और फिर अल्लाह से दुआ की। स्रोत उस दुआ के ठीक शब्द सुरक्षित नहीं रखता।
कुछ समय बाद विक्रेता हबीब रहिमहुल्लाह के पास अपना बकाया पैसा लेने आए। यहीं रिवायत फिर उन्हीं थैलियों की ओर लौटती है जिन्हें बिस्तर के नीचे रखा गया था। जब उन्हें देखा गया तो बयान के अनुसार वे दिरहमों से भरी हुई मिलीं।
रकम को केवल अनुमान से नहीं दिया गया बल्कि उसे तौला गया। रिवायत कहती है कि दिरहमों की मात्रा विक्रेताओं के पूरे हक़ के बराबर थी। इस तरह कहानी की शुरुआत में जो भोजन उधार लिया गया था, उसकी पूरी कीमत चुका दी गई और उनका अधिकार अदा हो गया।
यह घटना बाद की कई पुरानी किताबों में भी सुरक्षित रही। अबू नुऐम ने हिल्यत अल-अवलिया में इसी मूल घटना को लिखा, लालकाई ने इसे हबीब की करामात से जुड़े वर्णनों में रखा और इब्न असाकिर ने भी हबीब अल-अजमी की ऐतिहासिक जीवनी में इस कहानी को दर्ज किया। मुख्य क्रम वही रहता है: अकाल, गरीबों के लिए भोजन, दुआ, हक़दारों का आना और उनके भुगतान के लिए पर्याप्त दिरहम मिलना।
सार्वजनिक कहानी में इस घटना को इसी सरल क्रम के क़रीब रखना उचित है। पैसा कैसे प्रकट हुआ, इसके लिए कोई नई प्रक्रिया गढ़ने की आवश्यकता नहीं है, और ऐसी निश्चित दुआ भी नहीं जोड़ी जा सकती जिसके शब्द स्रोत ने सुरक्षित नहीं रखे। कहानी का यादगार बिंदु यही है कि भोजन बाँटने और दुआ के बाद थैलियों में इतने दिरहम मिले कि विक्रेताओं का पूरा हक़ अदा हो गया।
निष्कर्ष
कहानी दिरहमों को तौलकर विक्रेताओं का पूरा हक़ अदा करने पर समाप्त होती है, जबकि हबीब अल-अजमी रहिमहुल्लाह पहले ही भोजन गरीबों में बाँट चुके थे।
स्रोत
Ibn Abi al-Dunya, Mujabu al-Da'wa, report 99
Ibn Abi al-Dunya, Mujabu al-Da'wa, report 99
Ibn Abi al-Dunya, Mujabu al-Da'wa, report 99
Ibn Abi al-Dunya, Mujabu al-Da'wa, report 99
Ibn Abi al-Dunya, Mujabu al-Da'wa, report 99
Abu Nu'aym, Hilyat al-Awliya, Habib al-Farisi section: famine food and sacks filled with money
Abu Nu'aym, Hilyat al-Awliya, same passage
al-Lalaka'i, Sharh Usul I'tiqad Ahl al-Sunna, report 197
Ibn Asakir, Tarikh Dimashq, Habib al-Ajami entry; preserves both Ibn Abi al-Dunya and Hilya material
al-Sari ibn Yahya al-Shaybani: multiple critics call him trustworthy; Ahmad says thiqa thiqa
Damra ibn Rabi'a: classical critics broadly regard him as trustworthy/truthful with minor caution
CAND-0174 Task 1 evidence synthesis