इब्राहीम अल-ख़व्वास रहिमहुल्लाह के पैरों का पत्थर में मोम की तरह धँसना

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अल-हुजवीरी रहिमहुल्लाह ने इब्राहीम अल-ख़व्वास रहिमहुल्लाह की पहाड़ी यात्रा से जुड़ी एक यादगार करामती रिवायत सुरक्षित की है। यात्रा के दौरान उनके साथी ने कुछ पंक्तियाँ पढ़ीं जिनसे इब्राहीम बहुत प्रभावित हुए। पंक्तियाँ दोबारा सुनकर वे तवाजुद की गहरी अवस्था में आए और पत्थरीली ज़मीन पर अपने पैर चलाने लगे। रिवायत के अनुसार उनके पैर पत्थर में ऐसे धँस गए जैसे वह मोम हो। इसके बाद वे बेहोश हुए और होश आने पर जन्नत में होने का उल्लेख किया।

अल-हुजवीरी रहिमहुल्लाह ने कश्फ़ुल-महजूब में इब्राहीम अल-ख़व्वास रहिमहुल्लाह की एक पहाड़ी यात्रा से जुड़ी बहुत प्रभावशाली रिवायत सुरक्षित की है। इब्राहीम अपने एक साथी के साथ रास्ते में थे। यात्रा के दौरान साथी ने कुछ पंक्तियाँ पढ़ीं और उन शब्दों ने इब्राहीम के दिल पर गहरा असर डाला। उन्होंने अपने साथी से कहा कि वे पंक्तियाँ फिर से पढ़ी जाएँ।

साथी ने वही पंक्तियाँ दोबारा पढ़ीं। उन्हें सुनते ही इब्राहीम पर तवाजुद और गहरे आध्यात्मिक असर की अवस्था छा गई। वे उस भाव में इतने डूब गए कि अपने पैरों को पत्थरीली ज़मीन पर बार-बार चलाने लगे। यहीं से रिवायत का सबसे असाधारण हिस्सा शुरू होता है।

अल-हुजवीरी के सुरक्षित विवरण के अनुसार इब्राहीम के पैर कठोर चट्टान में इस तरह धँस गए जैसे पत्थर मोम की तरह नरम हो गया हो। पहाड़ी रास्ते की सख़्त ज़मीन के बीच यह दृश्य बहुत असामान्य था। उनके साथी ने उन्हें उसी गहरी अवस्था में देखा और यही घटना बाद में इस कथा का सबसे यादगार हिस्सा बनी।

इसके कुछ समय बाद इब्राहीम बेहोश हो गए। उनका साथी उनके पास मौजूद रहा और उनके होश में लौटने का इंतज़ार करता रहा। जब इब्राहीम को होश आया तो उन्होंने उस अनुभव के बारे में बताया जिससे वे गुज़रे थे। उन्होंने कहा कि वे उस दौरान जन्नत के एक बाग़ में थे, जबकि उनके साथी को उस आंतरिक अनुभव का पता नहीं था।

इस तरह पूरी रिवायत एक साफ़ क्रम में आगे बढ़ती है: पहाड़ी यात्रा, रास्ते में पढ़ी गई पंक्तियाँ, उनका गहरा असर, तवाजुद की अवस्था, पत्थर में पैरों का मोम की तरह धँसना, बेहोशी और फिर होश आने के बाद जन्नत का उल्लेख। यही क्रम इस घटना को इब्राहीम अल-ख़व्वास रहिमहुल्लाह से जुड़ी प्रसिद्ध करामती रिवायतों में विशेष बनाता है।

कश्फ़ुल-महजूब में इस कहानी का सबसे प्रभावशाली दृश्य वही है जिसमें कठोर चट्टान उनके पैरों के नीचे नरम होकर मोम जैसी बताई गई है। इसके बाद बेहोशी और फिर होश में आने पर उनके शब्द इस रिवायत को एक पूर्ण और यादगार आध्यात्मिक घटना का रूप देते हैं।

निष्कर्ष

इब्राहीम अल-ख़व्वास रहिमहुल्लाह की यह कथा एक स्पष्ट और यादगार करामती रिवायत है: पहाड़ी यात्रा में पंक्तियों का प्रभाव, गहरा तवाजुद, पैरों का पत्थर में मोम की तरह धँसना और होश आने के बाद एक असाधारण आध्यात्मिक अनुभव का उल्लेख।

स्रोत

al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, Bab Maratibihim fi al-Sama, section 2
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, same passage
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, same passage
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, same passage
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, same passage
Nicholson translation of al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, audition chapter
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, report opening 'a certain man says'
al-Qushayri, al-Risala al-Qushayriyya, biography of Ibrahim al-Khawwas
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