उबैदुल्लाह बिन अली

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उबैदुल्लाह इब्न अली इमाम अली इब्न अबी तालिब और लैला बिन्त मसऊद अल-तमीमिय्या के पुत्र थे। वंशावली स्रोत उनकी मातृ-संबद्धता बनू दारिम से बताते हैं और उनके किसी जीवित वंश का उल्लेख नहीं करते। शैख़ मुफ़ीद ने उन्हें ६१ हिजरी के कर्बला शहीदों में गिना, किन्तु मुसअब अल-जुबैरी, इब्न हज़्म और अबू अल-फ़रज अल-इस्फ़हानी सहित कई प्राचीन वंशावली और जीवनी स्रोत उन्हें कर्बला के शहीद अबू बक्र से अलग रखते और ६७ हिजरी में अल-मज़ार में उनकी मृत्यु बताते हैं; उपलब्ध प्रमाणों में अल-मज़ार वाली रिवायत अधिक मजबूत है।
जन्म

उनका निश्चित जन्म-वर्ष सुरक्षित नहीं है; वे अली इब्न अबी तालिब और लैला बिन्त मसऊद के पुत्र थे तथा प्रथम हिजरी शताब्दी में जीवित रहे।

निधन

शैख़ मुफ़ीद ने उन्हें ६१ हिजरी के कर्बला शहीदों में गिना, लेकिन प्राचीन वंशावली और जीवनी प्रमाणों का अधिक मजबूत संगम उनकी मृत्यु ६७ हिजरी में अल-मज़ार में मुख़्तार की सेना के रात्रि आक्रमण में बताता है।

दफ़न या संबद्ध स्थान

बाद की स्थानीय परम्परा अल-मज़ार की एक क़ब्र को उबैदुल्लाह इब्न अली से जोड़ती है। अल-मज़ार में उनकी मृत्यु का ऐतिहासिक आधार मजबूत है, लेकिन वर्तमान निश्चित क़ब्र की स्वतंत्र प्राचीन अभिलेखीय या पुरातात्विक पुष्टि नहीं है; कर्बला में उनकी अलग क़ब्र भी प्रमाणित नहीं।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

उबैदुल्लाह इमाम अली इब्न अबी तालिब के हाशिमी परिवार से थे। उनकी माता लैला बिन्त मसऊद तमीम की नहशल और दारिम शाखाओं से थीं; वंशावलीकार उनका क्रम मसऊद इब्न ख़ालिद इब्न मालिक इब्न रिबई इब्न सलमा इब्न जुन्दल इब्न नहशल इब्न दारिम तक बताते हैं। मुसअब अल-जुबैरी और इब्न हज़्म दोनों उन्हें लैला का पुत्र बताते हैं और किसी जीवित वंश का उल्लेख नहीं करते।

स्रोत उनके जन्म का निश्चित वर्ष, बचपन की स्वतंत्र कथा या अलग विद्वत् परम्परा सुरक्षित नहीं रखते। उनका ऐतिहासिक परिचय परिवार-सूचियों और इमाम हुसैन की शहादत के बाद के राजनीतिक संघर्षों से उभरता है। इस सीमित सामग्री में विशेष सावधानी आवश्यक है, क्योंकि कुछ बाद की कर्बला सूचियों में उबैदुल्लाह का नाम उनके भाई मुहम्मद अल-असग़र, जिनकी कुनियत अबू बक्र थी, और अब्दुल्लाह नामक दूसरे भाई से मिल गया है।

शैख़ मुफ़ीद अल-इरशाद में मुहम्मद अल-असग़र प्रसिद्ध अबू बक्र और उबैदुल्लाह को अली और लैला बिन्त मसऊद के दो पुत्र बताते और दोनों को तफ़्फ़ के शहीद लिखते हैं। किन्तु मुसअब अल-जुबैरी, इब्न हज़्म और अबू अल-फ़रज अल-इस्फ़हानी उबैदुल्लाह को अबू बक्र से अलग रखते और उनका जीवन मुख़्तार के युग तक बताते हैं। इन स्वतंत्र विवरणों की सहमति और जुड़ी हुई राजनीतिक कथा के कारण अल-मज़ार वाली रिवायत ऐतिहासिक रूप से अधिक मजबूत है, जबकि मुफ़ीद की कर्बला-सम्बद्धता को दर्ज किन्तु कम संभावित कथन के रूप में रखना चाहिए।

इब्न सअद के अनुसार उबैदुल्लाह हिजाज़ से कूफ़ा में मुख़्तार के पास आए और उसका समर्थन माँगा। विवरणों के शब्द अलग हैं, लेकिन वे इस पर सहमत हैं कि मुख़्तार ने उनकी माँग स्वीकार नहीं की; एक रिवायत में कुछ दिन बन्दी रखने के बाद छोड़ने का उल्लेख है। फिर उबैदुल्लाह बसरा गए और मुसअब इब्न अल-जुबैर से मिले, जिसने उनका सम्मान किया; तमीम के मातृ-सम्बन्धियों ने भी उन्हें शरण दी।

इब्न सअद की एक उल्लेखनीय रिवायत के अनुसार मुसअब के बाहर निकलने पर बनू सअद के कुछ लोग उबैदुल्लाह के चारों ओर इकट्ठे हुए और उनकी अनिच्छा के बावजूद राजनीतिक नेतृत्व की बैअत करने लगे। यह घटना स्थायी आन्दोलन नहीं बनी। बाद में वे मुख़्तार के विरुद्ध मुसअब की मुहिम में मुहम्मद इब्न अल-अशअथ से जुड़े अग्रिम दस्ते के साथ चले या उसमें लगाए गए।

अबू अल-फ़रज अल-इस्फ़हानी, मुसअब अल-जुबैरी, इब्न हज़्म और ज़हबी उनकी मृत्यु ६७ हिजरी में अल-मज़ार में बताते हैं। उनके अनुसार मुख़्तार के लोगों के रात्रि आक्रमण में उबैदुल्लाह मारे गए और एक रिवायत में युद्ध की अव्यवस्था में पहचाने नहीं गए। बाद में अल-मज़ार में एक क़ब्र उनसे जोड़ी गई, लेकिन ठीक भौतिक क़ब्र किसी स्वतंत्र प्रारम्भिक पुरातात्विक प्रमाण से स्थापित नहीं है।

उत्तरदायी ऐतिहासिक निष्कर्ष यह है कि मुफ़ीद की कर्बला-सम्बद्धता को सुरक्षित रखा जाए, लेकिन दोनों रिवायतों को समान शक्ति न दी जाए। अली और लैला के पुत्र के रूप में उनकी पहचान दृढ़ है, और अनेक प्राचीन वंशावली तथा जीवनी स्रोतों की संयुक्त गवाही ६७ हिजरी में अल-मज़ार में मृत्यु को अधिक संभावित बनाती है। यह भेद अबू बक्र या अब्दुल्लाह इब्न अली की जीवनी को उबैदुल्लाह पर स्थानान्तरित होने से रोकता है।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

उबैदुल्लाह इब्न अली की जीवनी कम विवरण वाले अहल अल-बैत सदस्यों के अध्ययन में वंशावली साहित्य का महत्व दिखाती है। उनकी मातृ तमीमी और दारिमी वंश-सम्बद्धता तथा जीवित वंश न रहने का विवरण कई वंशावली ग्रन्थों में एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।

उनकी मृत्यु का विवाद यह स्पष्ट उदाहरण है कि बाद की कर्बला सूचियों में नाम, कुनियत और भाई किस प्रकार मिल गए। मुफ़ीद की कर्बला-सम्बद्धता स्रोत-इतिहास का भाग है, लेकिन मुसअब अल-जुबैरी, इब्न हज़्म और अबू अल-फ़रज अल-इस्फ़हानी की सहमत सूचनाएँ अल-मज़ार वाली रिवायत को अधिक मजबूत बनाती हैं; इसलिए अबू बक्र, अब्दुल्लाह और उबैदुल्लाह इब्न अली को अलग पढ़ना चाहिए।

मुख़्तार और मुसअब इब्न अल-जुबैर के समय की रिवायतें उन्हें प्रथम हिजरी शताब्दी के राजनीतिक संकट में एक हाशिमी व्यक्ति के रूप में रखती हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में स्थायी ख़िलाफ़ती आन्दोलन सिद्ध नहीं करतीं। उनका परिचय सावधान लेखन, विरोधी प्रमाणों की ईमानदार प्रस्तुति और सम्बद्ध क़ब्र को प्रमाणित दफ़न न मानने की आवश्यकता सिखाता है।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

Nasab Quraysh | Musab ibn Abd Allah al-Zubayri | p. 44, section on the children of Ali ibn Abi Talib | https://ftp.shamela.ws/book/2922/42 | Mother Layla bint Masud, no descendants, journey to al-Mukhtar, attachment to Musab's advance force and death in the night attack
Jamharat Ansab al-Arab | Ibn Hazm al-Andalusi | p. 38, section on the children of Ali ibn Abi Talib | https://shamela.ws/book/9793/38 | Mother Layla bint Masud, no descendants, distinction from Abu Bakr and death in Musab's army against al-Mukhtar
Maqatil al-Talibiyyin | Abu al-Faraj al-Isfahani | p. 123, entry 8, Ubayd Allah ibn Ali | https://shamela.ws/book/12404/119 | Death at al-Madhar after leaving al-Mukhtar and joining Musab ibn al-Zubayr
Kitab al-Irshad | Shaykh al-Mufid | Vol. 1, p. 354, list of the children of Amir al-Muminin | https://ito.lib.eshia.ir/86018/01/354 | Contrary Imami attribution listing Ubayd Allah and Muhammad al-Asghar among the martyrs at al-Taff
Mujam Rijal al-Hadith | Sayyid Abu al-Qasim al-Khui | Vol. 12, entry on Ubayd Allah ibn Ali; pagination varies by digital edition | https://lib.eshia.ir/14036/12/88 | Later Imami critical discussion of the name/kunya confusion and the competing Karbala and al-Madhar reports

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