उनका जन्म-वर्ष और जन्मस्थान सुरक्षित नहीं है। उनकी माता को केवल अनाम उम्म वलद बताया गया है।
ख़दीजा बिन्त अली ज़ैनुल आबिदीन
वंश शोध नोट — और देखें
इस मूल सूची में माता का व्यक्तिगत नाम दर्ज नहीं है; अज्ञात माता के लिए कोई काल्पनिक व्यक्ति नहीं बनाया गया है।
PER-000098
अहल अल-बैत
संभावित
विवादित स्थान
इमामी स्रोत-आधारित सूची
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ख़दीजा बिन्त इमाम अली ज़ैनुल आबिदीन सलामुल्लाह अलैहा अहल अल-बैत की सीमित विवरण वाली महिला हैं जिनका नाम प्रारम्भिक इमामी संतान-सूचियों और वंशावली स्रोतों में सुरक्षित है। उनकी माता अनाम उम्म वलद थीं। मज़बूत वंश-साक्ष्य उन्हें मुहम्मद इब्न उमर इब्न अली इब्न अबी तालिब की पत्नी तथा उमर, अब्दुल्लाह, उबैदुल्लाह और उम्म कुलसूम की माता बताते हैं। उनके जन्म, मृत्यु और वास्तविक ऐतिहासिक दफ़न-स्थान की निश्चित जानकारी सुरक्षित नहीं है। क़ुम के दक्षिण में ख़दीजा ख़ातून के नाम से प्रसिद्ध इलख़ानी काल का मक़बरा उनकी सिद्ध क़ब्र नहीं है; उपलब्ध स्थापत्य और वंशावली शोध इसे अधिक सम्भावना के साथ इमाम जाफ़र अल-सादिक़ के वंशज अली अल-उरैदी के परिवार की किसी बाद की सैयदा से जुड़ी स्थानीय ज़ियारती निस्बत मानता है।
उनकी मृत्यु की तिथि, स्थान और परिस्थितियाँ विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोतों में सुरक्षित नहीं हैं।
उनका ऐतिहासिक रूप से निश्चित दफ़न-स्थान अज्ञात है। क़ुम के दक्षिण में ३४.४६९१५०३७९६८२५२४, ५०.६५४१४५२९२६१७२२ पर स्थित ख़दीजा ख़ातून मक़बरा इलख़ानी काल की इमारत में एक सम्मानित लेकिन विवादित स्थानीय निस्बत है; इसे ख़दीजा बिन्त इमाम ज़ैनुल आबिदीन की प्रमाणित क़ब्र नहीं कहा जा सकता।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
इमाम अली ज़ैनुल आबिदीन अलैहिस्सलाम की पुत्री के रूप में ख़दीजा की मूल पहचान शैख़ मुफ़ीद से संबद्ध संतान-सूची में सुरक्षित है। सूची उन्हें ज़ैनुल आबिदीन के सबसे छोटे पुत्र अली के साथ अनाम उम्म वलद से जन्मी संतान में रखती है। उनकी माता का निजी नाम सुरक्षित नहीं है, इसलिए माता को किसी प्रसिद्ध महिला से जोड़ना या अलग काल्पनिक व्यक्ति बनाना उचित नहीं।
नसब कुरैश मुहम्मद इब्न उमर इब्न अली इब्न अबी तालिब की संतान में उमर, अब्दुल्लाह, उबैदुल्लाह और उम्म कुलसूम का नाम देता और उन सबकी माता ख़दीजा बिन्त अली इब्न अल-हुसैन बताता है। तहज़ीब अल-कमाल में अब्दुल्लाह इब्न मुहम्मद इब्न उमर की जीवनी भी ख़दीजा को उनकी माता और इमाम मुहम्मद अल-बाक़िर को उनका मामा बताती है। ये विवरण उनके मुहम्मद इब्न उमर से विवाह को मजबूत बनाते हैं, यद्यपि संक्षिप्त जीवनी-सूचियाँ सभी संतानों के नाम समान रूप से सुरक्षित नहीं रखतीं।
किसी मजबूत प्रारंभिक स्रोत में ख़दीजा की स्वतंत्र विद्वत्, राजनीतिक या सार्वजनिक गतिविधि सिद्ध नहीं होती। उनकी ऐतिहासिक उपस्थिति मुख्यतः पिता के परिवार, विवाह और संतानों से संबंधित वंश तथा रावी विवरणों में सुरक्षित है। उनके पुत्र अब्दुल्लाह इब्न मुहम्मद इब्न उमर मदीना के रावी थे और उनकी जीवनी मान्य रिजाल ग्रंथों में मिलती है, लेकिन पुत्र की विद्वत्ता को ख़दीजा की स्वतंत्र शिक्षा या रिवायत का प्रमाण नहीं बनाना चाहिए।
विश्वसनीय प्रारम्भिक स्रोत उनकी मृत्यु का वर्ष, स्थान या वास्तविक दफ़न-स्थल सुरक्षित नहीं रखते। क़ुम से लगभग पैंतीस किलोमीटर दक्षिण में ख़दीजा ख़ातून के नाम से प्रसिद्ध वर्तमान मक़बरा ७७० हिजरी में ग़ियास अल-दीन अमीर मुहम्मद के आदेश से बनाया गया था और उसकी गचकारी तथा अभिलेख आठवीं हिजरी शताब्दी के कारीगरों, जिनमें अली इब्न मुहम्मद अबू शुजा भी हैं, से जुड़े हैं। एक अभिलेखीय परम्परा दफ़न महिला को इमाम जाफ़र अल-सादिक़ की पुत्री बताती है, लेकिन फ़ैज़ क़ुम्मी ने नाम, “ख़ातून” उपाधि और क़ुम में सादात के आगमन के अभिलेखों के आधार पर उन्हें इमाम की सीधी पुत्री नहीं माना और अली इब्न जाफ़र अल-उरैदी के परिवार की बाद की सैयदा होने की सम्भावना बताई। इसलिए यह स्थान ख़दीजा बिन्त इमाम ज़ैनुल आबिदीन की निश्चित क़ब्र नहीं, बल्कि क़ुम की सम्मानित, बाद की और ऐतिहासिक रूप से विवादित निस्बत है।
नसब कुरैश मुहम्मद इब्न उमर इब्न अली इब्न अबी तालिब की संतान में उमर, अब्दुल्लाह, उबैदुल्लाह और उम्म कुलसूम का नाम देता और उन सबकी माता ख़दीजा बिन्त अली इब्न अल-हुसैन बताता है। तहज़ीब अल-कमाल में अब्दुल्लाह इब्न मुहम्मद इब्न उमर की जीवनी भी ख़दीजा को उनकी माता और इमाम मुहम्मद अल-बाक़िर को उनका मामा बताती है। ये विवरण उनके मुहम्मद इब्न उमर से विवाह को मजबूत बनाते हैं, यद्यपि संक्षिप्त जीवनी-सूचियाँ सभी संतानों के नाम समान रूप से सुरक्षित नहीं रखतीं।
किसी मजबूत प्रारंभिक स्रोत में ख़दीजा की स्वतंत्र विद्वत्, राजनीतिक या सार्वजनिक गतिविधि सिद्ध नहीं होती। उनकी ऐतिहासिक उपस्थिति मुख्यतः पिता के परिवार, विवाह और संतानों से संबंधित वंश तथा रावी विवरणों में सुरक्षित है। उनके पुत्र अब्दुल्लाह इब्न मुहम्मद इब्न उमर मदीना के रावी थे और उनकी जीवनी मान्य रिजाल ग्रंथों में मिलती है, लेकिन पुत्र की विद्वत्ता को ख़दीजा की स्वतंत्र शिक्षा या रिवायत का प्रमाण नहीं बनाना चाहिए।
विश्वसनीय प्रारम्भिक स्रोत उनकी मृत्यु का वर्ष, स्थान या वास्तविक दफ़न-स्थल सुरक्षित नहीं रखते। क़ुम से लगभग पैंतीस किलोमीटर दक्षिण में ख़दीजा ख़ातून के नाम से प्रसिद्ध वर्तमान मक़बरा ७७० हिजरी में ग़ियास अल-दीन अमीर मुहम्मद के आदेश से बनाया गया था और उसकी गचकारी तथा अभिलेख आठवीं हिजरी शताब्दी के कारीगरों, जिनमें अली इब्न मुहम्मद अबू शुजा भी हैं, से जुड़े हैं। एक अभिलेखीय परम्परा दफ़न महिला को इमाम जाफ़र अल-सादिक़ की पुत्री बताती है, लेकिन फ़ैज़ क़ुम्मी ने नाम, “ख़ातून” उपाधि और क़ुम में सादात के आगमन के अभिलेखों के आधार पर उन्हें इमाम की सीधी पुत्री नहीं माना और अली इब्न जाफ़र अल-उरैदी के परिवार की बाद की सैयदा होने की सम्भावना बताई। इसलिए यह स्थान ख़दीजा बिन्त इमाम ज़ैनुल आबिदीन की निश्चित क़ब्र नहीं, बल्कि क़ुम की सम्मानित, बाद की और ऐतिहासिक रूप से विवादित निस्बत है।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
ख़दीजा का महत्त्व इमाम ज़ैनुल आबिदीन की कम-दर्ज पुत्री की पहचान सुरक्षित रखने और उस विवाह में है जिसने हुसैनी अलवी शाखा को उमर इब्न अली की संतानों से जोड़ा। उनकी संतानें विस्तृत अलवी परिवार की अलग शाखाओं के बीच वंशीय संबंध स्पष्ट करती हैं।
उनकी जीवनी स्रोत-अनुशासन का उदाहरण भी है। संतान-सूची की पहचान और वंशीय विवाह का प्रमाण अपेक्षाकृत मजबूत है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन, मृत्यु और क़ब्र पर मौन को बाद की स्थानीय संबद्धताओं को समान प्रमाण देकर नहीं भरा जा सकता। यह भेद सीमित विवरण वाली महिला का सम्मान भी रखता है और असिद्ध बातों को इतिहास बनने से भी रोकता है।
क़ुम के इस मक़बरे का महत्त्व दो अलग स्तरों पर है: स्वयं इमारत ७७० हिजरी की एक उल्लेखनीय इलख़ानी धरोहर और जीवित स्थानीय ज़ियारत-स्थल है, जबकि दफ़न महिला की ठीक पहचान अभी निश्चित नहीं है। दर्ज नक़्शा इसी वर्तमान संबद्ध स्थान को दिखाता है, ख़दीजा बिन्त इमाम ज़ैनुल आबिदीन के सिद्ध दफ़न-स्थान को नहीं। भविष्य के शोध में मूल अभिलेखों, वक़्फ़नामों, निर्माण-दस्तावेज़ों, मुतवल्ली परिवार के काग़ज़ात और अली अल-उरैदी परिवार की वंशावली पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उनकी जीवनी स्रोत-अनुशासन का उदाहरण भी है। संतान-सूची की पहचान और वंशीय विवाह का प्रमाण अपेक्षाकृत मजबूत है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन, मृत्यु और क़ब्र पर मौन को बाद की स्थानीय संबद्धताओं को समान प्रमाण देकर नहीं भरा जा सकता। यह भेद सीमित विवरण वाली महिला का सम्मान भी रखता है और असिद्ध बातों को इतिहास बनने से भी रोकता है।
क़ुम के इस मक़बरे का महत्त्व दो अलग स्तरों पर है: स्वयं इमारत ७७० हिजरी की एक उल्लेखनीय इलख़ानी धरोहर और जीवित स्थानीय ज़ियारत-स्थल है, जबकि दफ़न महिला की ठीक पहचान अभी निश्चित नहीं है। दर्ज नक़्शा इसी वर्तमान संबद्ध स्थान को दिखाता है, ख़दीजा बिन्त इमाम ज़ैनुल आबिदीन के सिद्ध दफ़न-स्थान को नहीं। भविष्य के शोध में मूल अभिलेखों, वक़्फ़नामों, निर्माण-दस्तावेज़ों, मुतवल्ली परिवार के काग़ज़ात और अली अल-उरैदी परिवार की वंशावली पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पारिवारिक संबंध
स्रोत
Kitab al-Irshad | Shaykh Muhammad ibn Muhammad al-Mufid | Volume 2, page 155, child list quoted with reference | https://www.islam4u.com/ar/daily-questions/%D8%A3%D9%88%D9%84%D8%A7%D8%AF-%D8%B9%D9%85%D8%B1-%D8%A8%D9%86-%D8%B2%D9%8A%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%B9%D8%A7%D8%A8%D8%AF%D9%8A%D9%86-%D8%B9%D9%84%D9%8A%D9%87-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%91%D9%8E%D9%84%D8%A7%D9%85 | Identifies Khadija among the children of Ali Zayn al-Abidin and describes her mother as an unnamed umm waladNasab Quraysh | Mus'ab ibn Abdullah al-Zubayri | Section on the descendants of Umar ibn Ali, displayed page 80 | https://shamela.ws/book/2922/76 | Marriage to Muhammad ibn Umar ibn Ali and children Umar, Abdullah, Ubayd Allah, and Umm Kulthum
Tahdhib al-Kamal fi Asma al-Rijal | Jamal al-Din al-Mizzi | Volume 16, biographical entry 3546, page 94 | https://www.islamweb.net/ar/library/content/1001/3841/%D8%B9%D8%A8%D8%AF-%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%D8%A8%D9%86-%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF-%D8%A8%D9%86-%D8%B9%D9%85%D8%B1-%D8%A8%D9%86-%D8%B9%D9%84%D9%8A-%D8%A8%D9%86-%D8%A3%D8%A8%D9%8A-%D8%B7%D8%A7%D9%84%D8%A8 | Identifies Khadija as the mother of Abdullah ibn Muhammad ibn Umar and Muhammad al-Baqir as his maternal uncle
al-Tabaqat al-Kubra | Muhammad ibn Sa'd | Volume 5, page 444 in the cited edition | https://www.taraajem.com/persons/129923/%D8%B9%D8%A8%D8%AF-%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%D8%A8%D9%86-%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF-%D8%A8%D9%86-%D8%B9%D9%85%D8%B1-%D8%A8%D9%86-%D8%B9%D9%84%D9%8A-%D8%A8%D9%86-%D8%A3%D8%A8%D9%8A-%D8%B7%D8%A7%D9%84%D8%A8 | Corroborates that Abdullah ibn Muhammad ibn Umar was the son of Khadija bint Ali ibn al-Husayn
Nuzhat al-Anam fi Mahasin al-Sham | Abu al-Baqa al-Badri al-Dimashqi | Volume 1, page 375 | https://lib.eshia.ir/13182/1/375 | Later Bab al-Saghir grave attribution and caution that many grave identities were no longer known
Mu'jam al-Buldan | Yaqut al-Hamawi | Entry on Damascus, volume 2, page 468 in the cited digital edition | https://shamela.ws/book/23735/998 | Records the later Damascus attribution without establishing an early verified burial
ख़दीजा ख़ातून मक़बरा | विकीशिया | संबद्ध पहचान और निर्माण इतिहास | https://fa.wikishia.net/view/%D8%A8%D9%82%D8%B9%D9%87_%D8%AE%D8%AF%DB%8C%D8%AC%D9%87%E2%80%8C%D8%AE%D8%A7%D8%AA%D9%88%D9%86 | ७७० हिजरी का निर्माण, ग़ियास अल-दीन अमीर मुहम्मद, अली इब्न मुहम्मद अबू शुजा और फ़ैज़ क़ुम्मी की बाद की वंशज वाली व्याख्या
क़ुम की सात मूल्यवान इमारतें | महदी पीर हयाती | आठवीं हिजरी शताब्दी के मक़बरे और अभिलेख | https://hawzah.net/fa/Magazine/View/6440/7051/85500/%D9%87%D9%81%D8%AA_%D8%A8%D9%86%D8%A7%DB%8C_%D8%A7%D8%B1%D8%B2%D8%B4%D9%85%D9%86%D8%AF_%D9%82%D9%85%D8%9B_%D8%A8%D8%A7%D8%B2%D9%85%D8%A7%D9%86%D8%AF%D9%87_%D8%A7%D8%B2_%D9%82%D8%B1%D9%86_%D9%87%D8%B4%D8%AA%D9%85_%D9%87%D8%AC%D8%B1%DB%8C_%D9%82%D9%85%D8%B1%DB%8C | ७७० हिजरी के अभिलेख और इलख़ानी स्थापत्य की पुष्टि
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