कुशैरी ने इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह के बारे में एक रिवायत सुरक्षित की है, जब वे मुहम्मद बिन मुबारक सूरी के साथ बैतुल-मकदिस की ओर सफ़र कर रहे थे। दोपहर में अनार के एक पेड़ के नीचे आराम करते समय पेड़ की जड़ की ओर से एक आवाज़ सुनाई दी, जो इब्राहीम को उसका फल खाने के लिए बुला रही थी। बुलावा दोहराए जाने के बाद इब्राहीम ने दो अनार लिए, और वापसी के रास्ते में वही पेड़ पहले से ऊँचा तथा उसका फल मीठा बताया गया। रिवायत में यह भी आता है कि बाद में वह पेड़ साल में दो बार फल देता था और रुम्मान अल-आबिदीन के नाम से जाना गया।
कुशैरी ने अर-रिसाला अल-कुशैरिय्या में इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह से जुड़ी यह करामती हिकायत सुरक्षित की है। मुहम्मद बिन मुबारक सूरी बयान करते हैं कि वे इब्राहीम के साथ बैतुल-मकदिस की ओर सफ़र कर रहे थे। दोपहर के करीब दोनों ने रास्ते में अनार के एक पेड़ के नीचे आराम के लिए ठहराव किया। शुरू में यह सफ़र का एक साधारण विराम था, लेकिन इसी जगह से रिवायत का असाधारण हिस्सा शुरू होता है।
रिवायत के अनुसार पेड़ की जड़ की ओर से अचानक एक आवाज़ सुनाई दी। उसने इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह को उनकी कुनियत से पुकारा और पेड़ का फल खाने की दावत दी। यह दावत तीन बार दोहराई गई, लेकिन इब्राहीम ने तुरंत कुछ नहीं लिया। फिर उसी आवाज़ ने मुहम्मद बिन मुबारक को संबोधित किया और उनसे कहा कि वे सिफ़ारिश करें, ताकि इब्राहीम पेड़ से कुछ फल ले लें। इस तरह घटना आवाज़, बार-बार दिए गए बुलावे और फिर साथी से की गई गुज़ारिश के साथ आगे बढ़ती है।
इसके बाद इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह ने दो अनार लिए। एक उन्होंने स्वयं खाया और दूसरा मुहम्मद बिन मुबारक को दिया। मुहम्मद कहते हैं कि उन्हें मिला अनार खट्टा था। इसके बाद दोनों बैतुल-मकदिस की ओर अपना सफ़र जारी रखते हैं। पहली बार पेड़ के पास हुई घटना यहाँ समाप्त होती दिखाई देती है, लेकिन वापसी के रास्ते में वही स्थान फिर कहानी का केंद्र बन जाता है।
वापसी में वे उसी रास्ते से गुज़रे और दोबारा अनार के उस पेड़ के पास पहुँचे। रिवायत कहती है कि अब उसकी हालत बदली हुई थी। जो पेड़ पहले छोटा बताया गया था, वह अब ऊँचा था, और उसके अनार मीठे थे। इस प्रकार घटना की मुख्य कड़ी पूरी होती है: पेड़ की जड़ से आवाज़ आना, इब्राहीम को फल खाने की दावत मिलना, दो अनार लेना, और फिर लौटते समय उसी पेड़ को बदली हुई हालत और मीठे फल के साथ देखना।
कुशैरी की इसी रिवायत में आगे कहा गया है कि वह पेड़ बाद में साल में दो बार फल देने लगा और रुम्मान अल-आबिदीन के नाम से जाना गया। सार्वजनिक कहानी में ये सारी बातें उसी एक हिकायत के हिस्से के रूप में रखी गई हैं। इस तरह किस्सा उस पेड़ के ज़िक्र पर समाप्त होता है, जिसका नाम इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह के इस सफ़र, उससे सुनी गई आवाज़ और वापसी पर देखे गए बदलाव के साथ जुड़ गया।
रिवायत के अनुसार पेड़ की जड़ की ओर से अचानक एक आवाज़ सुनाई दी। उसने इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह को उनकी कुनियत से पुकारा और पेड़ का फल खाने की दावत दी। यह दावत तीन बार दोहराई गई, लेकिन इब्राहीम ने तुरंत कुछ नहीं लिया। फिर उसी आवाज़ ने मुहम्मद बिन मुबारक को संबोधित किया और उनसे कहा कि वे सिफ़ारिश करें, ताकि इब्राहीम पेड़ से कुछ फल ले लें। इस तरह घटना आवाज़, बार-बार दिए गए बुलावे और फिर साथी से की गई गुज़ारिश के साथ आगे बढ़ती है।
इसके बाद इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह ने दो अनार लिए। एक उन्होंने स्वयं खाया और दूसरा मुहम्मद बिन मुबारक को दिया। मुहम्मद कहते हैं कि उन्हें मिला अनार खट्टा था। इसके बाद दोनों बैतुल-मकदिस की ओर अपना सफ़र जारी रखते हैं। पहली बार पेड़ के पास हुई घटना यहाँ समाप्त होती दिखाई देती है, लेकिन वापसी के रास्ते में वही स्थान फिर कहानी का केंद्र बन जाता है।
वापसी में वे उसी रास्ते से गुज़रे और दोबारा अनार के उस पेड़ के पास पहुँचे। रिवायत कहती है कि अब उसकी हालत बदली हुई थी। जो पेड़ पहले छोटा बताया गया था, वह अब ऊँचा था, और उसके अनार मीठे थे। इस प्रकार घटना की मुख्य कड़ी पूरी होती है: पेड़ की जड़ से आवाज़ आना, इब्राहीम को फल खाने की दावत मिलना, दो अनार लेना, और फिर लौटते समय उसी पेड़ को बदली हुई हालत और मीठे फल के साथ देखना।
कुशैरी की इसी रिवायत में आगे कहा गया है कि वह पेड़ बाद में साल में दो बार फल देने लगा और रुम्मान अल-आबिदीन के नाम से जाना गया। सार्वजनिक कहानी में ये सारी बातें उसी एक हिकायत के हिस्से के रूप में रखी गई हैं। इस तरह किस्सा उस पेड़ के ज़िक्र पर समाप्त होता है, जिसका नाम इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह के इस सफ़र, उससे सुनी गई आवाज़ और वापसी पर देखे गए बदलाव के साथ जुड़ गया।
निष्कर्ष
रिवायत में अनार के पेड़ से आने वाली आवाज़, इब्राहीम बिन अदहम रहिमहुल्लाह का उससे फल लेना, वापसी पर पेड़ और फल में बदलाव, और अंत में उसका रुम्मान अल-आबिदीन के नाम से जाना जाना बयान हुआ है।
स्रोत
al-Qushayri, al-Risala al-Qushayriyya, Bab Karamat al-Awliya
al-Qushayri, same report: voice from the base of the pomegranate
al-Qushayri, same report: invitation repeated and Muhammad addressed
al-Qushayri, same report: two pomegranates and sour fruit
al-Qushayri, same report: changed tree and sweet fruit on return
al-Qushayri, same report: twice-yearly fruit and Rumman al-Abidin name
al-Mizzi, Tahdhib al-Kamal, entry Muhammad ibn al-Mubarak al-Suri
al-Mizzi, Tahdhib al-Kamal: Ibn Hibban dates Muhammad al-Suri's birth 153 AH
al-Mizzi, Tahdhib al-Kamal, entry Ibrahim ibn Adham: death reports 161, 162 or 163 AH
CAND-0181 Task 1 evidence synthesis