अबू नुऐम ने इब्राहीम इब्न अदहम रहिमहुल्लाह से जुड़ी एक सफ़र की रिवायत सुरक्षित की है, जिसमें वे एक व्यक्ति और उसके छोटे बेटे के साथ कड़ी ठंड की रात मक्का की ओर जा रहे थे। रास्ते में पिता ने कहा कि उनका मन आग पर भुने जंगली गधे के मांस का है, जबकि इब्राहीम ने उनकी बात सुनकर चुप्पी रखी। मुसाफ़िर अरबों के एक पड़ाव पर रुके तो शिकारी से बचा हुआ एक घायल जानवर, जिसे रिवायत में वअल कहा गया है, वहाँ पहुँचा; उसे ज़बह किया गया और उसके मांस का एक हिस्सा मुसाफ़िरों को भेजा गया। इब्राहीम ने फिर पिता से कहा कि मांस काटकर उसी तरह आग पर भून लें जैसे उन्होंने चाहा था। मूल रिवायत इच्छा वाले जानवर और बाद में आए जानवर के लिए अलग शब्द इस्तेमाल करती है, इसलिए यहाँ भी दोनों को एक नहीं बनाया गया है।
सफ़र के दौरान लड़के के पिता ने इब्राहीम से उस रात की अपनी एक इच्छा का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका मन आग पर भुना हुआ जंगली गधे का मांस खाने का है। इब्राहीम इब्न अदहम रहिमहुल्लाह ने उनकी बात सुनी, मगर कोई उत्तर नहीं दिया। वे आगे चलते रहे और अरबों के एक पड़ाव तक पहुँचे, जहाँ ठंड की कठिनाई देखकर इब्राहीम ने सुबह तक रुकने का सुझाव दिया।
इसके बाद हिकायत का अप्रत्याशित हिस्सा सामने आता है। रिवायत कहती है कि एक बड़ा जानवर, जिसे वअल कहा गया है, शिकारी से बचकर घायल अवस्था में उस पड़ाव के लोगों तक आ पहुँचा। वहाँ के लोगों ने उसे ज़बह किया, उसका मांस काटा और उसका अच्छा-खासा हिस्सा मुसाफ़िरों के पास भेज दिया। इस तरह ठंडी रात में एक साधारण पड़ाव अचानक ताज़े जंगली मांस के पहुँचने का स्थान बन गया।
जब मांस उनके पास आया तो इब्राहीम इब्न अदहम रहिमहुल्लाह ने लड़के के पिता से पूछा कि क्या उनके पास छुरी है। फिर उनसे कहा कि मांस काटें और उसे आग पर वैसे ही भून लें जैसे उन्होंने पहले इच्छा की थी। घटना का क्रम इसी तरह साफ बनता है: पिता की इच्छा, इब्राहीम की चुप्पी, पड़ाव पर रुकना, घायल जानवर का आना, मांस भेजा जाना और फिर उसे आग पर भूनने की बात।
अबू नुऐम इस घटना को इब्राहीम इब्न अदहम रहिमहुल्लाह से जुड़ी करामत और अप्रत्याशित रोज़ी के प्रसंग में रखते हैं। फिर भी रिवायत के अपने शब्दों का एक अंतर सुरक्षित रहता है: पिता ने जंगली गधे के मांस की इच्छा की थी, जबकि बाद में आने वाले जानवर को वअल कहा गया है। मूल पाठ दोनों नामों को एक ही जानवर के लिए नहीं बताता, इसलिए इस सार्वजनिक कहानी में भी यह अंतर कायम रखा गया है।
हिकायत उस ठंडी रात में मुसाफ़िरों तक मांस पहुँचने और इब्राहीम द्वारा पिता से उसे आग पर भूनने को कहने पर पूरी होती है। यह इब्राहीम इब्न अदहम रहिमहुल्लाह के सफ़र से जुड़ी अप्रत्याशित रोज़ी की यादगार रिवायत है, जिसे अबू नुऐम ने सुरक्षित किया है और जिसमें मूल खबर से बाहर कोई बोली हुई दुआ, नया दृश्य या अतिरिक्त विवरण नहीं जोड़ा गया है।
निष्कर्ष
रिवायत इब्राहीम इब्न अदहम रहिमहुल्लाह के सफ़र में अप्रत्याशित रोज़ी का यह दृश्य सुरक्षित करती है: घायल वअल पड़ाव तक पहुँचा, उसका मांस मुसाफ़िरों को मिला और पिता से कहा गया कि उसे अपनी इच्छा के अनुसार आग पर भून लें।