सहीह बुख़ारी ३४३६ और २४८२ तथा सहीह मुस्लिम २५५० अलिफ़ बनी इस्राईल के इबादतगुज़ार जुरैज की कहानी सुरक्षित रखती हैं। उनकी माँ ने उन्हें नमाज़ में पुकारा और वे इबादत में रहे। बाद में एक औरत ने उन्हें गुनाह की ओर लुभाना चाहा, पर उन्होंने इंकार कर दिया। वह एक चरवाहे से गर्भवती हुई और बच्चे को झूठा जुरैज से जोड़ दिया। लोगों ने उनकी इबादतगाह गिरा दी और उन्हें अपमानित किया। जुरैज ने वुज़ू और नमाज़ के बाद शिशु से पूछा कि उसका पिता कौन है; बच्चे ने बोलकर चरवाहे की पहचान कर दी और जुरैज बरी हो गए।
कुछ समय बाद एक औरत जुरैज के पास आई और उन्हें गुनाह की ओर लुभाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। वह फिर एक चरवाहे के पास गई और उससे गर्भवती हुई। जब बच्चा पैदा हुआ तो उसने लोगों के सामने झूठा दावा कर दिया कि यह बच्चा जुरैज का है।
आरोप फैलते ही लोग ग़ुस्से में जुरैज की इबादतगाह पर पहुँच गए। सहीह बुख़ारी बताती है कि उन्होंने इबादतगाह तोड़ दी, जुरैज को बाहर खींचा और उन्हें बुरा-भला कहा। सहीह मुस्लिम इस दृश्य को और स्पष्ट करती है कि लोग औज़ार लेकर आए, इमारत गिराने लगे और उन्हें उस औरत के आरोप का सामना कराया।
जुरैज ने घबराहट या बदला लेने के बजाय वुज़ू किया और नमाज़ पढ़ी। फिर वे शिशु के पास गए। बुख़ारी में उन्होंने सीधे पूछा: ऐ बच्चे, तुम्हारा पिता कौन है? मुस्लिम की समानांतर रिवायत में वे पहले बच्चे के सिर को छूते हैं और फिर यही प्रश्न करते हैं।
तभी वह असाधारण क्षण आया जिसने पूरा आरोप उलट दिया। शिशु बोल उठा और उसने बताया कि उसका पिता चरवाहा है। बच्चे की यह स्पष्ट गवाही औरत के दावे को झूठा साबित कर गई और जुरैज की बेगुनाही सबके सामने प्रकट हो गई। सहीह रिवायतें इस बच्चे को उन असाधारण बच्चों में गिनती हैं जिन्होंने पालने की उम्र में बोलकर गवाही दी।
जो लोग जुरैज की इबादतगाह गिरा चुके थे, बच्चे की बात सुनकर बदल गए। बुख़ारी में है कि उन्होंने इबादतगाह सोने से बनाने की पेशकश की, जबकि मुस्लिम में सोने और चाँदी दोनों का उल्लेख है। जुरैज ने यह वैभव स्वीकार नहीं किया और कहा कि इबादतगाह पहले की तरह मिट्टी से ही बनाई जाए। फिर वे अपनी इबादत की ओर लौट गए।
इस तरह यह कहानी केवल एक शिशु के बोलने की घटना नहीं है। माँ की पुकार, गुनाह की परीक्षा, जुरैज का इंकार, झूठा वंश-संबंधी आरोप, सार्वजनिक अपमान, इबादतगाह का टूटना और अंत में शिशु की चमत्कारी गवाही—ये सब एक ही सहीह क्रम में आते हैं। औरत, चरवाहे और बच्चे के निजी नाम सहीह रिवायतों में नहीं हैं, इसलिए उन्हें गढ़ना उचित नहीं।
निष्कर्ष
यह उच्च भरोसे वाली ईश्वरीय सहायता और बेगुनाही प्रकट होने की घटना है। जुरैज पर एक बच्चे का पिता होने का झूठा आरोप लगा, उनकी इबादतगाह गिरा दी गई और उन्हें अपमानित किया गया; वुज़ू और नमाज़ के बाद उन्होंने बच्चे से उसके पिता के बारे में पूछा तो शिशु ने असाधारण रूप से चरवाहे की पहचान कर दी। आरोप समाप्त हुआ और लोगों ने बहुमूल्य धातुओं से इबादतगाह बनाने की पेशकश की, लेकिन जुरैज ने साधारण मिट्टी को चुना। यह कथा झूठे आरोप की गंभीरता और अल्लाह की अनुमति से सत्य के असाधारण रूप से प्रकट होने की स्पष्ट मिसाल है।