उनका जन्म मक्का में हुआ, लेकिन निश्चित वर्ष सुरक्षित नहीं है। एक रिवायत अब्दुल्लाह को पैग़म्बरी आरम्भ होने के बाद जन्मा बताती है, जबकि दूसरी प्राचीन सूची तैय्यिब और ताहिर को अलग गिनती है और अलग कालक्रम प्रस्तुत करती है।
अब्दुल्लाह तैय्यिब ताहिर बिन मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ
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अल्लाह के रसूल ﷺ की संतान की इस सूची में कुछ विवरणों पर पारंपरिक मतभेद मौजूद है; सुन्नी और इमामी स्रोतों का तुलनात्मक दायरा सुरक्षित रखा गया है और प्रविष्टि को गैर-निश्चित स्तर पर रखा गया है।
PER-000029
परिवार का सदस्य
संभावित
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अब्दुल्लाह, पैग़म्बर मुहम्मद और ख़दीजा बिन्त ख़ुवैलिद के पुत्र, पैग़म्बरी परिवार के एक बालक थे जिनका मक्का में कम आयु में निधन हो गया। एक मज़बूत वंशावली और जीवनी परंपरा अब्दुल्लाह को ही तैय्यिब और ताहिर की उपाधियों से पहचानती है, जबकि इब्न इस्हाक़ की वह रिवायत जिसे इब्न हिशाम ने सुरक्षित किया, इन नामों की गणना अलग ढंग से करती है; इसलिए इस परिचय में पहचान को संभावित और सावधानीपूर्ण माना गया है, सर्वसम्मत नहीं।
उनका मक्का में बाल्यावस्था में निधन हुआ। मृत्यु की निश्चित तारीख़ और आयु किसी सर्वमान्य प्राचीन रिवायत से स्थापित नहीं है।
उनका निश्चित दफ़्न-स्थान विश्वसनीय प्राचीन प्रमाण से स्थापित नहीं है। किसी बाद की आरोपित क़ब्र या सामान्य क़ब्रिस्तान परंपरा को स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण के बिना उनका पक्का दफ़्न-स्थान नहीं माना जा सकता।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
अब्दुल्लाह पैग़म्बर मुहम्मद और ख़दीजा बिन्त ख़ुवैलिद के पुत्र थे। प्राचीन और बाद की वंशावली तथा सीरत की पुस्तकें इस बात पर सहमत हैं कि पैग़म्बर का एक पुत्र अब्दुल्लाह नाम से था और वह बाल्यावस्था में चल बसा। जीवन बहुत छोटा होने के कारण सुरक्षित जानकारी मुख्यतः उनके नामों, माता-पिता, कालक्रम और मृत्यु तक सीमित है, किसी वयस्क सार्वजनिक जीवन तक नहीं।
मुख्य मतभेद उनके नामों की गिनती पर है। इब्न सअद अब्दुल्लाह को ही तैय्यिब और ताहिर बताते हैं और इन उपाधियों को इस रिवायत से जोड़ते हैं कि उनका जन्म पैग़म्बरी मिशन आरम्भ होने के बाद हुआ। मसऊदी और इब्न हजर भी मूलतः यही पहचान सुरक्षित रखते हैं, और इब्न हजर लिखते हैं कि ताहिर का व्यक्तिगत नाम अब्दुल्लाह था तथा उन्हें तैय्यिब भी कहा जाता था।
इसके विपरीत इब्न इस्हाक़ की वह रिवायत जिसे इब्न हिशाम ने सुरक्षित किया, तैय्यिब और ताहिर को ऐसी सूची में रखती है जो दो अलग पुत्रों के रूप में पढ़ी जाती है और उसी गणना में अब्दुल्लाह का नाम स्पष्ट नहीं करती। इसलिए बाद के इतिहासकारों ने कई रूप बताए: अब्दुल्लाह, तैय्यिब और ताहिर एक बालक के तीन नाम थे; तैय्यिब और ताहिर अलग बालक थे; या अब्दुल्लाह उन दोनों के अतिरिक्त एक और पुत्र थे।
उनके जन्म का काल भी इसी मतभेद से जुड़ा है। इब्न सअद की रिवायत अब्दुल्लाह का जन्म पैग़म्बरी आरम्भ होने के बाद रखती है, जबकि इब्न इस्हाक़ का पाठ कहता है कि तैय्यिब और ताहिर नाम वाले पुत्र इस्लाम-पूर्व काल में चल बसे। इसलिए निश्चित वर्ष, पैग़म्बरी से पहले या बाद की पक्की स्थिति और उपाधियों का कारण सर्वमान्य इतिहास के रूप में नहीं कहा जा सकता।
मुख्य रिवायतें इस बात पर सहमत हैं कि बालक मक्का में कम आयु में चल बसा और उसके लिए कोई वयस्क सामाजिक, विद्वत या राजनीतिक जीवन दर्ज नहीं है। इसलिए बाद की निश्चित आयु, घटनाएँ या भूमिकाएँ किसी विश्वसनीय प्राचीन स्रोत के बिना स्वीकार नहीं की गईं। जिम्मेदार जीवनी को जीवन की संक्षिप्तता और नामों के स्रोतगत मतभेद को समझाना चाहिए, न कि लेख को लंबा करने के लिए घटनाएँ गढ़नी चाहिए।
विश्वसनीय प्राचीन प्रमाण उनकी क़ब्र का निश्चित स्थान नहीं बताते। किसी बाद की स्थानीय मान्यता या मक्का के सामान्य क़ब्रिस्तान की परंपरा को पक्का दफ़्न-स्थान नहीं बनाया जाना चाहिए। उनकी ऐतिहासिक स्मृति मुहम्मद और ख़दीजा के पारिवारिक इतिहास, मक्की काल में बच्चों को खोने के मानवीय अनुभव और छोटी वंशावली सूचियों में नामों के संचार की स्रोत-समीक्षा से जुड़ी है।
मुख्य मतभेद उनके नामों की गिनती पर है। इब्न सअद अब्दुल्लाह को ही तैय्यिब और ताहिर बताते हैं और इन उपाधियों को इस रिवायत से जोड़ते हैं कि उनका जन्म पैग़म्बरी मिशन आरम्भ होने के बाद हुआ। मसऊदी और इब्न हजर भी मूलतः यही पहचान सुरक्षित रखते हैं, और इब्न हजर लिखते हैं कि ताहिर का व्यक्तिगत नाम अब्दुल्लाह था तथा उन्हें तैय्यिब भी कहा जाता था।
इसके विपरीत इब्न इस्हाक़ की वह रिवायत जिसे इब्न हिशाम ने सुरक्षित किया, तैय्यिब और ताहिर को ऐसी सूची में रखती है जो दो अलग पुत्रों के रूप में पढ़ी जाती है और उसी गणना में अब्दुल्लाह का नाम स्पष्ट नहीं करती। इसलिए बाद के इतिहासकारों ने कई रूप बताए: अब्दुल्लाह, तैय्यिब और ताहिर एक बालक के तीन नाम थे; तैय्यिब और ताहिर अलग बालक थे; या अब्दुल्लाह उन दोनों के अतिरिक्त एक और पुत्र थे।
उनके जन्म का काल भी इसी मतभेद से जुड़ा है। इब्न सअद की रिवायत अब्दुल्लाह का जन्म पैग़म्बरी आरम्भ होने के बाद रखती है, जबकि इब्न इस्हाक़ का पाठ कहता है कि तैय्यिब और ताहिर नाम वाले पुत्र इस्लाम-पूर्व काल में चल बसे। इसलिए निश्चित वर्ष, पैग़म्बरी से पहले या बाद की पक्की स्थिति और उपाधियों का कारण सर्वमान्य इतिहास के रूप में नहीं कहा जा सकता।
मुख्य रिवायतें इस बात पर सहमत हैं कि बालक मक्का में कम आयु में चल बसा और उसके लिए कोई वयस्क सामाजिक, विद्वत या राजनीतिक जीवन दर्ज नहीं है। इसलिए बाद की निश्चित आयु, घटनाएँ या भूमिकाएँ किसी विश्वसनीय प्राचीन स्रोत के बिना स्वीकार नहीं की गईं। जिम्मेदार जीवनी को जीवन की संक्षिप्तता और नामों के स्रोतगत मतभेद को समझाना चाहिए, न कि लेख को लंबा करने के लिए घटनाएँ गढ़नी चाहिए।
विश्वसनीय प्राचीन प्रमाण उनकी क़ब्र का निश्चित स्थान नहीं बताते। किसी बाद की स्थानीय मान्यता या मक्का के सामान्य क़ब्रिस्तान की परंपरा को पक्का दफ़्न-स्थान नहीं बनाया जाना चाहिए। उनकी ऐतिहासिक स्मृति मुहम्मद और ख़दीजा के पारिवारिक इतिहास, मक्की काल में बच्चों को खोने के मानवीय अनुभव और छोटी वंशावली सूचियों में नामों के संचार की स्रोत-समीक्षा से जुड़ी है।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
अब्दुल्लाह का ऐतिहासिक महत्त्व पैग़म्बरी परिवार के पारिवारिक इतिहास में उनके स्थान से है। बाल्यावस्था में उनकी मृत्यु मक्का में मुहम्मद और ख़दीजा के व्यक्तिगत शोक का हिस्सा थी, यद्यपि स्रोतों ने इस बालक की अलग विस्तृत जीवनकथा सुरक्षित नहीं की।
यह परिचय आरम्भिक इस्लामी वंशावली और पैग़म्बरी सीरत के संचार को समझने के लिए विशेष महत्त्व रखता है। अब्दुल्लाह, तैय्यिब और ताहिर एक बालक थे या एक से अधिक, यह मतभेद दिखाता है कि छोटी पारिवारिक सूचियाँ बाद के रावियों तक अलग रूपों में पहुँच सकती थीं।
इसकी शोध-मूल्यिता इस बात में है कि एक पहचान की मज़बूत परंपरा को सुरक्षित रखा गया है और प्रतिस्पर्धी प्राचीन गणना को छिपाया नहीं गया। इससे पाठक पैग़म्बर की संतानों की संख्या को झूठी निश्चितता से बढ़ाए बिना वास्तविक स्रोतगत मतभेद को समझ सकता है।
यह परिचय आरम्भिक इस्लामी वंशावली और पैग़म्बरी सीरत के संचार को समझने के लिए विशेष महत्त्व रखता है। अब्दुल्लाह, तैय्यिब और ताहिर एक बालक थे या एक से अधिक, यह मतभेद दिखाता है कि छोटी पारिवारिक सूचियाँ बाद के रावियों तक अलग रूपों में पहुँच सकती थीं।
इसकी शोध-मूल्यिता इस बात में है कि एक पहचान की मज़बूत परंपरा को सुरक्षित रखा गया है और प्रतिस्पर्धी प्राचीन गणना को छिपाया नहीं गया। इससे पाठक पैग़म्बर की संतानों की संख्या को झूठी निश्चितता से बढ़ाए बिना वास्तविक स्रोतगत मतभेद को समझ सकता है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ
संभावित
माता
हज़रत ख़दीजा बिन्त ख़ुवैलिद
संभावित
स्रोत
Al-Tabaqat al-Kubra | Muhammad ibn Sa'd | Volume 1, page 133; online page 688 | https://ftp.shamela.ws/book/1686/688 | Identifies Abd Allah as al-Tayyib and al-Tahir, reports birth after the beginning of prophethood, and records his death in childhood.Al-Sirah al-Nabawiyya | Ibn Hisham, transmitting Ibn Ishaq | Children of Khadija section; pagination varies by edition | https://shamela.ws/book/23833 | Preserves the alternative enumeration of al-Tayyib and al-Tahir as separate sons or names and places the male children in a different chronology.
Muruj al-Dhahab wa Ma'adin al-Jawhar | Ali al-Mas'udi | Volume 2, page 229 | https://lib.eshia.ir/13552/2/229 | States that the son born after the mission was Abd Allah and that al-Tayyib and al-Tahir were names for him.
Al-Isaba fi Tamyiz al-Sahaba | Ibn Hajar al-Asqalani | Volume 3, page 445 | https://lib.eshia.ir/40173/3/445 | Records that al-Tahir's personal name was Abd Allah, that he was also called al-Tayyib, and preserves variant reports.
Usud al-Ghaba fi Ma'rifat al-Sahaba | Ibn al-Athir | Volume 5, page 436 | https://lib.eshia.ir/15333/5/436 | Surveys the conflicting enumerations of the Prophet's sons and the identification of Abd Allah with al-Tayyib and al-Tahir.
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