अस्मा बिन्त उमैस

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अस्मा बिन्त उमैस रज़ियल्लाहु अन्हा प्रारंभिक मुस्लिम सहाबिया, हबशा की प्रवासी, हदीस की रावी और अहले बैत के निकट पारिवारिक दायरे की प्रतिष्ठित महिला थीं। उन्होंने जाफ़र इब्न अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ हबशा की ओर हिजरत की, फिर अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु और उसके बाद इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम से विवाह किया। उनका जीवन हिजरत, धैर्य, पारिवारिक सेवा और नबवी रिवायतों की रक्षा के कारण महत्वपूर्ण है।
जन्म

उनकी सही जन्म-तारीख़ सुरक्षित नहीं है; इस्लाम के आरंभिक मक्की काल में वे एक वयस्क महिला के रूप में जानी जाती थीं।

निधन

उनकी मृत्यु की निश्चित तारीख़ अज्ञात है; लगभग ४० हिजरी या उसके बाद के मत मिलते हैं, इसलिए किसी एक वर्ष को निश्चित नहीं कहा जा सकता।

दफ़न या संबद्ध स्थान

दमिश्क के बाबुस्सगीर कब्रिस्तान में अस्मा बिन्त उमैस रज़ियल्लाहु अन्हा से संबद्ध एक प्रसिद्ध मज़ार मौजूद है। इस मज़ार के स्थान-निर्देशांक और गूगल मानचित्र का लिंक इसी पृष्ठ पर उपलब्ध है। वर्तमान मज़ार के अस्तित्व में कोई संदेह नहीं; ऐतिहासिक सावधानी केवल इस बात में है कि इसे उनकी निश्चित और स्वतंत्र रूप से प्रमाणित दफ़्न-स्थली न कहा जाए।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

अस्मा बिन्त उमैस रज़ियल्लाहु अन्हा ख़सअम क़बीले से थीं और उन महिलाओं में गिनी जाती हैं जिन्होंने इस्लाम के आरंभिक काल में ईमान स्वीकार किया। जीवनी ग्रंथ उनके पिता का नाम उमैस इब्न मअद और माता का नाम हिन्द बिन्त औफ़ बताते हैं। माता की ओर से वह आरंभिक मुस्लिम महिलाओं के एक उल्लेखनीय पारिवारिक जाल से जुड़ी थीं, जिसमें उम्मुल मोमिनीन मैमूना बिन्त हारिस रज़ियल्लाहु अन्हा भी थीं, जबकि उनका अपना जीवन जाफ़र इब्न अबी तालिब, अबू बक्र सिद्दीक़ और इमाम अली इब्न अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हुम के घरानों से निकट रूप से जुड़ा।

उन्होंने जाफ़र इब्न अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ हबशा की ओर हिजरत की। इस विवाह से अब्दुल्लाह, मुहम्मद और औन पैदा हुए। जब वे प्रवासियों के साथ लौटीं, तो सहीह मुस्लिम की रिवायत में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने नाव वालों के लिए दो हिजरतों की फ़ज़ीलत बताई: एक हबशा की ओर और दूसरी मदीना की ओर।

वे ख़ैबर के समय के निकट ७ हिजरी में मदीना पहुँचीं। जाफ़र रज़ियल्लाहु अन्हु ८ हिजरी में मुअता में शहीद हुए। इसके बाद अस्मा ने अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु से विवाह किया और १० हिजरी की हज यात्रा में मुहम्मद इब्न अबी बक्र पैदा हुए। सहीह मुस्लिम में प्रसव के बाद स्नान, एहराम और हज पूरा करने से संबंधित उनका प्रश्न सुरक्षित है।

अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की १३ हिजरी में मृत्यु के बाद अस्मा ने इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम से विवाह किया। उनके पुत्र मुहम्मद इब्न अबी बक्र का पालन भी इमाम अली के घर में हुआ। पुराने और मान्य जीवन-चरित जाफ़र इब्न अबी तालिब, अबू बक्र और अली रज़ियल्लाहु अन्हुम से उनके तीन प्रसिद्ध विवाह सुरक्षित करते हैं, जिससे वह पहली मुस्लिम पीढ़ी के इन प्रमुख घरानों के बीच एक महत्वपूर्ण पारिवारिक कड़ी बनीं।

अस्मा रज़ियल्लाहु अन्हा ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम से रिवायतें बयान कीं। उनसे संबंधित रिवायतों में हबशा के प्रवासियों का स्थान, इबादत के नियम, बीमारी और संकट के समय की दुआ तथा पैगंबर के पारिवारिक दायरे की घटनाएँ शामिल हैं। उनकी रिवायतें दिखाती हैं कि प्रारंभिक मुस्लिम महिलाओं ने नबवी ज्ञान और सामुदायिक स्मृति की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई।

उनकी मृत्यु की निश्चित तारीख़ प्रमाणित नहीं है। कुछ बाद के स्रोत इसे लगभग ४० हिजरी बताते हैं, जबकि अन्य रिवायतों से संकेत मिलता है कि वे इमाम अली अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद भी जीवित थीं। दमिश्क के बाबुस्सगीर कब्रिस्तान में उनसे संबद्ध एक कब्र दिखाई जाती है, पर ऐतिहासिक सावधानी के साथ इसे निश्चित कब्र के बजाय संबद्ध स्थान कहना चाहिए।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

अस्मा बिन्त उमैस रज़ियल्लाहु अन्हा का ऐतिहासिक महत्व दो हिजरतों की उनकी गवाही, नाव वालों के नबवी सम्मान और मुस्लिम समुदाय के आरंभिक अंतरराष्ट्रीय चरण में उनकी उपस्थिति से जुड़ा है। उनकी रिवायत हबशा के प्रवासियों के बलिदान को समझने का प्रमुख पाठ है।

वे जाफ़र, अबू बक्र और इमाम अली के परिवारों के बीच एक उल्लेखनीय पारिवारिक कड़ी भी थीं। हदीस की रिवायत, पारिवारिक उत्तरदायित्व और अहले बैत से निकटता ने उन्हें महिला सहाबियों और महिला रावियों के इतिहास में स्थायी स्थान दिया।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

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Sahih Muslim | Muslim ibn al-Hajjaj | Hadiths 2502-2503 | https://sunnah.com/muslim/44/241 | Asma's Abyssinian migration and the merit of two migrations
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Al-Isti'ab fi Ma'rifat al-Ashab | Ibn Abd al-Barr | Women's biographies, Bab al-Alif; pagination varies by edition | https://www.islamweb.net/ar/library/content/1080/3270/ | Three marriages and children; rejection of a confused alternative marriage attribution
Al-Muwatta | Malik ibn Anas | Book 16, Hadith 2 | https://sunnah.com/malik/16/2 | Asma washing Abu Bakr after his death
Bab al-Saghir Cemetery attribution | Contemporary heritage documentation | Modern attributed grave; not historical burial proof | https://islamicheritage.co.za/bab-as-saghir-cemetery/ | Existence of a present-day attribution and the need for caution

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