तल्हा बिन हसन मुजतबा

PER-000075 अहल अल-बैत संभावित दफ़न स्थान अज्ञात इमामी स्रोत-आधारित सूची
⚙️ प्रिंट, साझा और अन्य विकल्प
📱 व्हाट्सऐप 📧 ईमेल सहेजे गए पृष्ठ

क्यू आर संकेत

पृष्ठ का क्यू आर
पृष्ठ का क्यू आर
तल्हा इब्न इमाम हसन अल-मुजतबा, उम्मे इसहाक़ बिन्त तल्हा इब्न उबैदुल्लाह के पुत्र थे। प्रारम्भिक वंशावली और इमामी स्रोत उन्हें स्पष्ट रूप से इमाम हसन की संतान में गिनते हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र जीवनी बहुत सीमित है। नसब कुरैश संकेत करता है कि उनका वंश आगे नहीं चला और इब्न असाकिर भी स्पष्ट करते हैं कि उनकी कोई संतान नहीं थी। बाद की साहित्यिक परम्परा उन्हें तल्हा अल-ख़ैर कहती है, पर जन्म, मृत्यु, विवाह, सार्वजनिक भूमिका और दफ़न-स्थान की विश्वसनीय जानकारी सुरक्षित नहीं है।
जन्म

जन्म की निश्चित तिथि और स्थान विश्वसनीय स्रोतों में सुरक्षित नहीं हैं; उनका जन्म इमाम हसन अल-मुजतबा के जीवनकाल में हुआ।

निधन

प्रारम्भिक वंशावली स्रोत बताते हैं कि उनकी कोई संतान नहीं थी या उनकी वंश-शाखा समाप्त हो गई; मृत्यु की तिथि, आयु और परिस्थितियाँ अज्ञात हैं।

दफ़न या संबद्ध स्थान

दफ़न-स्थान अज्ञात है; उनसे सम्बद्ध कोई क़ब्र विश्वसनीय प्रारम्भिक ऐतिहासिक प्रमाण से स्थापित नहीं है।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

तल्हा इमाम हसन अल-मुजतबा के पुत्र और इस प्रकार पैग़म्बर मुहम्मद के परनाती थे। उनकी माता उम्मे इसहाक़ बिन्त तल्हा इब्न उबैदुल्लाह अल-तैमिय्या थीं। शैख़ मुफ़ीद की अल-इरशाद और मुसअब अल-जुबैरी की नसब कुरैश दोनों उन्हें इमाम हसन की संतान में गिनती हैं।

अल-इरशाद उनके सगे मातृ भाई-बहन हुसैन अल-असरम और फ़ातिमा बिन्त हसन का भी उल्लेख करती है। यह पारिवारिक स्थान उन्हें उनके नाना तल्हा इब्न उबैदुल्लाह और बाद के अनेक समान नाम वाले व्यक्तियों से अलग पहचानने के लिए आवश्यक है। केवल नाम की समानता के कारण किसी दूसरे तल्हा की घटनाएँ, कुनियत या जीवनी उन पर लागू नहीं की जा सकती।

नसब कुरैश उनके नाम के बाद दरजा शब्द का प्रयोग करती है, जबकि इब्न असाकिर द्वारा सुरक्षित विवरण स्पष्ट कहता है कि उनकी कोई संतान नहीं थी। वंशावली प्रयोग में दरजा कभी कम आयु में मृत्यु और कभी वंश-शाखा समाप्त होने का संकेत देता है, लेकिन इससे निश्चित आयु या मृत्यु-वर्ष सिद्ध नहीं होता।

बाद की भाषायी और साहित्यिक परम्परा उन्हें उदारता के लिए प्रसिद्ध तल्हा नामक व्यक्तियों में गिनती और तल्हा अल-ख़ैर की उपाधि देती है। यह उपाधि अच्छाई और उदारता की बाद की स्मृति का संकेत है, लेकिन कोई विस्तृत घटना या मजबूत प्रारम्भिक शृंखला सुरक्षित नहीं है, इसलिए इसे सम्बद्ध साहित्यिक उपाधि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

विश्वसनीय स्रोत उनकी पत्नी, संतान, स्वतंत्र हदीस-संग्रह, राजनीतिक पद, कर्बला में भागीदारी, मृत्यु-वर्ष या दफ़न-स्थान सिद्ध नहीं करते। इसलिए उत्तरदायी जीवनी उनके प्रमाणित वंश, माता-पिता, सगे भाई-बहन, संतान न होने और बाद की उपाधि तक सीमित रखी गई है और अप्रमाणित विवरण नहीं जोड़े गए।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

तल्हा इब्न इमाम हसन का ऐतिहासिक महत्व मुख्यतः अहल अल-बैत की वंशावली को सही रूप में सुरक्षित रखने में है। उनका परिचय उम्मे इसहाक़ के माध्यम से इमाम हसन के घराने और बनू तैम के सम्बन्ध को दर्ज करता है तथा हुसैन अल-असरम और फ़ातिमा बिन्त हसन के साथ उनके सगे भाई-बहन के रिश्ते को सुरक्षित रखता है।

उनका संक्षिप्त विवरण सीमित प्रमाण वाले व्यक्तियों पर शोध की पद्धति भी दिखाता है: समान नाम वाले लोगों को अलग रखा जाए, वंशावली शब्द का अत्यधिक अर्थ न निकाला जाए, और विवाह, संतान, घटनाएँ या क़ब्र केवल विश्वसनीय प्रमाण पर जोड़ी जाएँ। यही अनुशासन संक्षिप्त लेकिन भरोसेमंद सार्वजनिक परिचय सम्भव बनाता है।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

Nasab Quraysh | Musab ibn Abd Allah al-Zubayri | p. 50, section on the children of Hasan ibn Ali | https://shamela.ws/book/2922/48 | Talha among Imam Hasan's children, mother Umm Ishaq bint Talha, and genealogical notice that his line ended
Kitab al-Irshad | Shaykh al-Mufid | Vol. 2, p. 20, chapter on the children of Imam Hasan | https://books.rafed.net/view/429/page/20 | Talha as a son of Imam Hasan and Umm Ishaq, with full siblings Husayn al-Athram and Fatima
Tarikh Madinat Dimashq | Ibn Asakir | Vol. 70, p. 17 | https://lib.eshia.ir/22014/70/17 | Umm Ishaq bore Talha to Hasan ibn Ali and Talha left no descendants
Sharh al-Mufassal | Ibn Yaish | Vol. 1, p. 145, discussion of famous men named Talha | https://shamela.ws/book/13301/140 | Later literary attribution of the epithet Talha al-Khayr

💬 आगंतुक टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं; पहली टिप्पणी आप करें।

टिप्पणी प्रशासनिक स्वीकृति के बाद प्रकाशित होगी।