उनकी सही जन्म तिथि और स्थान ज्ञात नहीं हैं। उनका जन्म पैग़म्बर के जीवनकाल में हुआ और प्रमाणित रिवायत में वे छोटी बच्ची हैं जिन्हें पैग़म्बर नमाज़ के दौरान उठाते थे।
उमामा बिन्त अबी अल-आस रज़ियल्लाहु अन्हा
वंश शोध नोट — और देखें
ज़ैनब बिन्त मुहम्मद के माध्यम से नबी की नवासी; फ़ातिमा के बाद अली बिन अबी तालिब की पत्नी।
PER-000335
परिवार का सदस्य
पुष्ट
दफ़न स्थान अज्ञात
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उमामा बिन्त अबी अल-आस पैग़म्बर मुहम्मद की पुत्री ज़ैनब और उनके पति अबू अल-आस इब्न अल-रबी की बेटी और पैग़म्बर की नातिन थीं। सहीह अल-बुख़ारी और इब्न सअद की तबक़ात में यह प्रसिद्ध रिवायत सुरक्षित है कि पैग़म्बर उन्हें छोटी बच्ची के रूप में नमाज़ के दौरान उठाए रखते थे। फ़ातिमा की मृत्यु के बाद उनका विवाह अली इब्न अबी तालिब से हुआ। बाद में अल-मुग़ीरा इब्न नौफ़ल से विवाह की मज़बूत शास्त्रीय रिवायत भी है, जबकि संतानों पर स्रोतों में वास्तविक मतभेद है।
उनकी सही मृत्यु का वर्ष ज्ञात नहीं है। अल-ज़हबी और अन्य शास्त्रीय जीवनीकार उनकी मृत्यु मुआविया के शासनकाल में, अल-मुग़ीरा इब्न नौफ़ल के निकाह के समय रखते हैं, पर सटीक वर्ष स्थापित नहीं।
उनका प्रमाणित दफ़न स्थान अज्ञात है। कोई भरोसेमंद प्रारंभिक स्रोत उमामा बिन्त अबी अल-आस के लिए किसी विशेष क़ब्र या मज़ार को सिद्ध नहीं करता; इस फ़ाइल में कोई मज़ार या स्थान संबंध नहीं है।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
उमामा अबू अल-आस इब्न अल-रबी और ज़ैनब बिन्त रसूल अल्लाह की बेटी थीं, इसलिए वे पैग़म्बर मुहम्मद और ख़दीजा की नातिन थीं। सहीह अल-बुख़ारी स्पष्ट रूप से उन्हें ज़ैनब और अबू अल-आस की बेटी बताती है। यह वंश उनकी जीवनी का सबसे मज़बूत और कम विवादित भाग है। उपलब्ध वंशावली स्रोत पिता और माता की पहचान बताते हैं, इसलिए दोनों संबंध उन्हीं ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।
उनका जन्म पैग़म्बर के जीवनकाल में हुआ। जब वे छोटी बच्ची थीं, पैग़म्बर नमाज़ में उन्हें कंधे पर रखते, सज्दा करते समय नीचे रखते और खड़े होते समय फिर उठा लेते। यह रिवायत सहीह अल-बुख़ारी में और इब्न सअद के कई तरीक़ों में सुरक्षित है। जन्म का सही वर्ष और स्थान ज्ञात नहीं, लेकिन यह घटना उन्हें स्पष्ट रूप से नबवी घर की बच्ची के रूप में स्थापित करती है।
इब्न सअद और इब्न हजर यह भी बताते हैं कि पैग़म्बर ने उमामा को आभूषण दिया। एक रिवायत में हब्शी नग वाले सोने के छल्ले का और दूसरी में हार का उल्लेख है। तरीक़ों की बातें पूरी तरह समान नहीं हैं, इसलिए इन्हें एक ही सटीक घटना नहीं बनाया गया; केवल पैग़म्बर द्वारा अपनी नातिन को निजी उपहार देने की अनेक रिवायतों के रूप में रखा गया है।
फ़ातिमा की मृत्यु के बाद उमामा का विवाह अली इब्न अबी तालिब से हुआ। अबू नुऐम की मारिफ़त अल-सहाबा इस विवाह को फ़ातिमा की सलाह से जोड़ती है और अन्य शास्त्रीय जीवनी ग्रंथ विवाह की मूल बात की पुष्टि करते हैं। फ़ाइल में अली का संरक्षित पति संबंध पहले ही प्रमाणित है और उसे बिल्कुल नहीं बदला गया।
अली की मृत्यु के बाद शास्त्रीय स्रोत उमामा का विवाह अल-मुग़ीरा इब्न नौफ़ल इब्न अल-हारिस इब्न अब्द अल-मुत्तलिब से बताते हैं। इब्न सअद तथा इब्न अब्द अल-बर्र की इब्न हजर द्वारा सुरक्षित सामग्री विवाह की पुष्टि करती है। मुआविया की ओर से विवाह प्रस्ताव और अली की पहले से सलाह वाली कहानी की कुछ सनदों को इब्न हजर ने कमज़ोर कहा है, इसलिए वे विवरण निश्चित नहीं माने गए। मूल विवाह स्रोत-समीक्षा से समर्थित है।
संतानों का प्रश्न वास्तविक रूप से विवादित है। इब्न सअद कहते हैं कि उमामा से अली की कोई संतान नहीं हुई, जबकि कुछ बाद के सुन्नी जीवनचरित संतान का उल्लेख करते हैं। एक इमामी रिवायत, जिसे बाद के संकलन में अल-काफ़ी से उद्धृत किया गया है, मुहम्मद अल-अवसत इब्न अली को उनका पुत्र बताती है। अल-मुग़ीरा से यह्या की पैदाइश पर भी मतभेद है। इसलिए कोई संतान संबंध निश्चित रूप से स्थापित नहीं किया गया।
उनकी सही मृत्यु तिथि स्थापित नहीं है। अल-ज़हबी उनकी मृत्यु मुआविया के शासनकाल में रखते हैं और कई शास्त्रीय जीवनीकार कहते हैं कि वे अल-मुग़ीरा के निकाह में थीं जब उनका निधन हुआ। कोई भरोसेमंद प्रारंभिक स्रोत जनाज़े या दफ़न की निश्चित जगह नहीं देता। इसलिए केवल व्यापक समय-सीमा रखी गई, दफ़न अज्ञात माना गया और कोई निश्चित मज़ार या स्थान दर्ज नहीं किया गया।
उनका जन्म पैग़म्बर के जीवनकाल में हुआ। जब वे छोटी बच्ची थीं, पैग़म्बर नमाज़ में उन्हें कंधे पर रखते, सज्दा करते समय नीचे रखते और खड़े होते समय फिर उठा लेते। यह रिवायत सहीह अल-बुख़ारी में और इब्न सअद के कई तरीक़ों में सुरक्षित है। जन्म का सही वर्ष और स्थान ज्ञात नहीं, लेकिन यह घटना उन्हें स्पष्ट रूप से नबवी घर की बच्ची के रूप में स्थापित करती है।
इब्न सअद और इब्न हजर यह भी बताते हैं कि पैग़म्बर ने उमामा को आभूषण दिया। एक रिवायत में हब्शी नग वाले सोने के छल्ले का और दूसरी में हार का उल्लेख है। तरीक़ों की बातें पूरी तरह समान नहीं हैं, इसलिए इन्हें एक ही सटीक घटना नहीं बनाया गया; केवल पैग़म्बर द्वारा अपनी नातिन को निजी उपहार देने की अनेक रिवायतों के रूप में रखा गया है।
फ़ातिमा की मृत्यु के बाद उमामा का विवाह अली इब्न अबी तालिब से हुआ। अबू नुऐम की मारिफ़त अल-सहाबा इस विवाह को फ़ातिमा की सलाह से जोड़ती है और अन्य शास्त्रीय जीवनी ग्रंथ विवाह की मूल बात की पुष्टि करते हैं। फ़ाइल में अली का संरक्षित पति संबंध पहले ही प्रमाणित है और उसे बिल्कुल नहीं बदला गया।
अली की मृत्यु के बाद शास्त्रीय स्रोत उमामा का विवाह अल-मुग़ीरा इब्न नौफ़ल इब्न अल-हारिस इब्न अब्द अल-मुत्तलिब से बताते हैं। इब्न सअद तथा इब्न अब्द अल-बर्र की इब्न हजर द्वारा सुरक्षित सामग्री विवाह की पुष्टि करती है। मुआविया की ओर से विवाह प्रस्ताव और अली की पहले से सलाह वाली कहानी की कुछ सनदों को इब्न हजर ने कमज़ोर कहा है, इसलिए वे विवरण निश्चित नहीं माने गए। मूल विवाह स्रोत-समीक्षा से समर्थित है।
संतानों का प्रश्न वास्तविक रूप से विवादित है। इब्न सअद कहते हैं कि उमामा से अली की कोई संतान नहीं हुई, जबकि कुछ बाद के सुन्नी जीवनचरित संतान का उल्लेख करते हैं। एक इमामी रिवायत, जिसे बाद के संकलन में अल-काफ़ी से उद्धृत किया गया है, मुहम्मद अल-अवसत इब्न अली को उनका पुत्र बताती है। अल-मुग़ीरा से यह्या की पैदाइश पर भी मतभेद है। इसलिए कोई संतान संबंध निश्चित रूप से स्थापित नहीं किया गया।
उनकी सही मृत्यु तिथि स्थापित नहीं है। अल-ज़हबी उनकी मृत्यु मुआविया के शासनकाल में रखते हैं और कई शास्त्रीय जीवनीकार कहते हैं कि वे अल-मुग़ीरा के निकाह में थीं जब उनका निधन हुआ। कोई भरोसेमंद प्रारंभिक स्रोत जनाज़े या दफ़न की निश्चित जगह नहीं देता। इसलिए केवल व्यापक समय-सीमा रखी गई, दफ़न अज्ञात माना गया और कोई निश्चित मज़ार या स्थान दर्ज नहीं किया गया।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
उमामा का ऐतिहासिक महत्व पैग़म्बर की सीधी नातिन और नबवी घर की पहचानी हुई बच्ची होने से शुरू होता है। नमाज़ में उन्हें उठाने की मज़बूत रिवायत ने उनका नाम हदीस, फ़िक़्ह और सीरत साहित्य में स्थायी कर दिया।
अली इब्न अबी तालिब से उनका विवाह फ़ातिमा की मृत्यु के बाद ज़ैनब की वंश-रेखा और अलवी परिवार के बीच एक महत्वपूर्ण पारिवारिक संबंध बना, जिससे व्यापक अहल अल-बैत वंश अध्ययन में उनका स्थान विशेष हो जाता है।
उनकी जीवनी यह भी दिखाती है कि प्रमाणित संबंध और विवादित वंश दावों को अलग रखना क्यों आवश्यक है। अल-मुग़ीरा से विवाह मज़बूती से वर्णित है, पर बच्चों की रिवायतें सुन्नी और इमामी स्रोतों में टकराती हैं; इसलिए विश्वास की अलग-अलग श्रेणियाँ बनाए रखना अधिक सही है।
अली इब्न अबी तालिब से उनका विवाह फ़ातिमा की मृत्यु के बाद ज़ैनब की वंश-रेखा और अलवी परिवार के बीच एक महत्वपूर्ण पारिवारिक संबंध बना, जिससे व्यापक अहल अल-बैत वंश अध्ययन में उनका स्थान विशेष हो जाता है।
उनकी जीवनी यह भी दिखाती है कि प्रमाणित संबंध और विवादित वंश दावों को अलग रखना क्यों आवश्यक है। अल-मुग़ीरा से विवाह मज़बूती से वर्णित है, पर बच्चों की रिवायतें सुन्नी और इमामी स्रोतों में टकराती हैं; इसलिए विश्वास की अलग-अलग श्रेणियाँ बनाए रखना अधिक सही है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
अबू अल-आस इब्न अल-रबी
पुष्ट
माता
ज़ैनब बिन्त मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ
पुष्ट
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
इमाम अली इब्न अबी तालिब
पुष्ट
स्रोत
सहीह अल-बुख़ारी | अल-बुख़ारी | हदीस ५१६, किताब अल-सलात | https://sunnah.com/bukhari:516 | उमामा का ज़ैनब और अबू अल-आस की बेटी होना तथा पैग़म्बर द्वारा नमाज़ में उठाया जानाअल-तबक़ात अल-कुबरा | इब्न सअद | खंड आठ, पृष्ठ १८५ से १८६, प्रविष्टि ४१६६ | https://ftp.shamela.ws/book/1686/2852 | माता ज़ैनब, नमाज़ की रिवायत, आभूषण की रिवायतें और मूल जीवनी
अल-तबक़ात अल-कुबरा | इब्न सअद | खंड आठ, पृष्ठ १८६ | https://ftp.shamela.ws/book/1686/2853 | अली के बाद अल-मुग़ीरा से विवाह और अली से संतान न होने की एक रिवायत
मारिफ़त अल-सहाबा | अबू नुऐम अल-इस्फ़हानी | खंड छह, पृष्ठ ३२६८ | https://shamela.ws/book/10490/10987 | माता ज़ैनब और फ़ातिमा के बाद अली से विवाह, फ़ातिमा की सलाह वाली रिवायत
अल-इसाबा फ़ी तमयीज़ अल-सहाबा | इब्न हजर अल-असक़लानी | खंड आठ, पृष्ठ २५, प्रविष्टि १०८२८ | https://shamela.ws/book/9767/3938 | आभूषण, अली और अल-मुग़ीरा से विवाह, संतानों के विरोधी दावे और कुछ विस्तृत सनदों की आलोचना
सियर आलाम अल-नुबला | अल-ज़हबी | उमामा बिन्त अबी अल-आस की प्रविष्टि | https://shamela.ws/book/22669/1253 | नमाज़ वाली पहचान, अली और अल-मुग़ीरा से विवाह तथा मुआविया के शासन में मृत्यु का व्यापक समय
अयान अल-शिया | सैयद मुहसिन अल-अमीन | खंड तीन, पृष्ठ ४७४ | https://lib.eshia.ir/71735/3/474 | बाद का इमामी संकलन: अल-मुग़ीरा से विवाह, मुहम्मद अल-अवसत की मंसूबियत और संतान विवाद
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