क्लासिकी सुन्नी स्रोत एक रिवायत सुरक्षित रखते हैं कि अबू उमामा अल-बाहिली रज़ियल्लाहु अन्हु के पास केवल तीन दीनार थे और उन्होंने तीनों दे दिए, तीन माँगने वालों में से हर एक को एक दीनार। घर की एक रावी के अनुसार इसके बाद परिवार के खाने के लिए कुछ नहीं बचा। उसी दिन बाद में उनके तकिए या बिस्तर के नीचे तीन सौ दीनार मिले और उनके आश्चर्यचकित होने का उल्लेख है। अबू नुऐम सबसे स्पष्ट जाँची गई घरेलू सनद देते हैं, लालकाई इसे अबू उमामा की करामात में रखते हैं और ज़हबी इसे उल्लेखनीय करामत कहते हैं, लेकिन सीधी गवाह एक अनाम सेविका है।
घर की रावी फिर इस दान के व्यावहारिक परिणाम का वर्णन करती है। जब अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु तीनों दीनार दे चुके तो परिवार के खाने के लिए कोई पैसा नहीं बचा। इस तरह रिवायत पहले इस काम को वास्तविक त्याग के रूप में पेश करती है। उन्होंने अतिरिक्त संपत्ति नहीं बाँटी, बल्कि वही दे दिया जो उस समय उनके पास था, जबकि घर की अपनी ज़रूरत भी बनी हुई थी।
उसी दिन बाद में रिवायत परिवार की स्थिति में एक असाधारण बदलाव दर्ज करती है। अबू उमामा के तकिए या बिस्तर के नीचे तीन सौ दीनार मिले। जब सोना उन्हें दिखाया गया तो रिवायत के अनुसार वे चौंक गए और कहा कि वे नहीं जानते यह क्या है। घटनाक्रम सीधा है: तीन दीनार तीन लोगों को दिए गए, घर खाने के पैसे से खाली हो गया, और फिर अचानक उससे बहुत बड़ी रकम घर में मिल गई।
अबू नुऐम सबसे स्पष्ट जाँची गई सनद वलीद बिन मुस्लिम से, उनसे अब्दुर्रहमान बिन यज़ीद बिन जाबिर से और उनसे अबू उमामा की एक सेविका से बयान करते हैं। लालकाई भी यह घटना लिखते हैं और इसे अबू उमामा की करामात वाले हिस्से में रखते हैं। बाद में ज़हबी इसे एक उल्लेखनीय करामत बताते हैं। इससे रिवायत के प्रति सकारात्मक क्लासिकी स्वीकार्यता दिखाई देती है।
फिर भी मुख्य स्रोत की सीमा स्पष्ट है। घर की सीधी गवाह एक ऐसी सेविका है जिसका नाम सनद में नहीं दिया गया, और पहले शोध चरण में इसी विशेष सनद के लिए साफ सहीह दर्जा नहीं मिला। इसलिए बाद के क्लासिकी विद्वानों की सकारात्मक स्वीकार्यता इस कहानी की मौजूदगी और महत्त्व को सहारा देती है, लेकिन इसे सहीह मरफ़ूअ नबवी हदीस नहीं बना देती और सनद की सीमा समाप्त नहीं करती।
सबसे सावधान निष्कर्ष यह है कि क्लासिकी सुन्नी स्रोत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु के अपने अंतिम तीन दीनार दान करने और बाद में घर में तीन सौ दीनार मिलने की रिवायत सुरक्षित रखते हैं। इसे असाधारण रोज़ी से जुड़ी एक सहाबी करामत के रूप में मध्यम भरोसे के साथ पेश करना उचित है, और अनाम गवाह तथा सनद की सीमाएँ स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए।
निष्कर्ष
क्लासिकी सुन्नी स्रोत बताते हैं कि अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपने अंतिम तीन दीनार दान किए और बाद में उनके तकिए या बिस्तर के नीचे तीन सौ दीनार मिले। सकारात्मक क्लासिकी स्वीकार्यता के बावजूद अनाम गवाह के कारण इसे मध्यम भरोसे और स्पष्ट सावधानी के साथ शामिल करना उचित है।