क्लासिकी सुन्नी स्रोतों में एक असर सुरक्षित है कि हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ियल्लाहु अन्हु एक मोमिन से मिलने गए जो मृत्यु के निकट था और उन्होंने मृत्यु-दूत से उसके साथ नरमी की विनती की। फिर एक उत्तर सुनाई देने की रिवायत है जिसका अर्थ था, “मैं हर मोमिन के साथ नरमी करता हूँ।” इस असर के पुराने तरीक़े मौजूद हैं और बूसीरी ने एक सनद के रावियों को विश्वसनीय कहा। बराअ इब्न आज़िब की सहीह नबवी हदीस मोमिन की रूह के आसानी से निकलने के अर्थ के लिए मज़बूत और सीधे संबंधित पृष्ठभूमि देती है।
रिवायत के अनुसार हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु ने मृत्यु-दूत को संबोधित करके विनती की कि वह उस मरते हुए मोमिन के साथ नरमी करे। इसी जगह रिवायत एक असाधारण बात बयान करती है: घर या कमरे की ओर से एक उत्तर सुनाई देने की ख़बर है जिसका अर्थ था, “मैं हर मोमिन के साथ नरमी करता हूँ।” एक दूसरी क्लासिकी शक्ल में उत्तर घर के एक किनारे से आने का उल्लेख है। स्थान के ये शब्द हर तरीक़े के साथ अलग रहने चाहिए, लेकिन मूल क्रम एक ही है: सलमान विनती करते हैं और फिर एक अनदेखे उत्तर के सुनाई देने की रिवायत आती है।
यह असर पुराने क्लासिकी स्रोतों में सुरक्षित है। इब्न अबी उमर इसे मरवान फ़ज़ारी से, फिर मुहम्मद बिन क़ैस असदी से, फिर सल्म बिन अतिय्या फ़ुक़ैमी से बयान करते हैं। अबू नुऐम वकीअ, मुहम्मद बिन क़ैस और सल्म बिन अतिय्या के रास्ते से क़रीबी रिवायत लाते हैं। बाद में बूसीरी ने इब्न अबी उमर की सनद के रावियों के बारे में सकारात्मक फ़ैसला दिया और उन्हें विश्वसनीय कहा। लालकाई ने भी हज़रत सलमान की करामात के अध्याय में संबंधित रिवायत रखी, जिससे बाद के क्लासिकी साहित्य में इस असाधारण घटना की पहचान स्पष्ट होती है।
इस अर्थ के लिए अधिक मज़बूत और सीधे संबंधित नबवी पृष्ठभूमि बराअ इब्न आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु की सहीह हदीस में मिलती है। मुस्नद अहमद में मृत्यु-दूत मोमिन से अर्थ के अनुसार कहते हैं, “ऐ पाक रूह, अल्लाह की मग़फ़िरत और रज़ामंदी की ओर निकल,” और रूह के निकलने को मशक से पानी की बूँद बहने जैसी आसानी से बताया गया है। अब्दुल्लाह इब्न मसऊद की तबरीनी में एक हसन रिवायत भी मोमिन की रूह के पसीने जैसी नमी के साथ निकलने का अर्थ देती है, जबकि जामिअ तिर्मिज़ी में पेशानी के पसीने के साथ मोमिन की मौत की विश्वसनीय रिवायत है।
इसलिए प्रमाणों के आधार पर उचित निष्कर्ष यह है कि आरंभिक और क्लासिकी सुन्नी स्रोत सलमान का ऐसा असर सुरक्षित रखते हैं जिसमें वह एक मरते हुए मोमिन के लिए मृत्यु-दूत से नरमी की विनती करते हैं और फिर एक अनदेखे उत्तर की रिवायत आती है। दूसरी ओर सहीह नबवी हदीसें स्वतंत्र रूप से मोमिन की रूह के लिए रहमत और आसानी के सामान्य अर्थ को सिद्ध करती हैं। यह मज़बूत पृष्ठभूमि सलमान के असर के अर्थ को स्पष्ट करती है, लेकिन उसी विशेष अनदेखे उत्तर की अलग सनद नहीं बनती।
निष्कर्ष
क्लासिकी स्रोत सलमान फ़ारसी रज़ियल्लाहु अन्हु का यह असर सुरक्षित रखते हैं कि उन्होंने एक मरते हुए मोमिन के लिए नरमी की विनती की और उसके बाद एक अनदेखे उत्तर की रिवायत आई। सहीह नबवी प्रमाण स्वतंत्र रूप से मोमिन की रूह के लिए रहमत और आसानी के सामान्य अर्थ को सिद्ध करते हैं। इसलिए सलमान का असर मध्यम विश्वास के साथ सहाबी की रिवायत की गई करामत के रूप में रखा जा सकता है और सहीह हदीसों को उसके संबंधित मज़बूत संदर्भ के रूप में पेश किया जा सकता है।