ज़हबी ने अबू मुहम्मद इब्न अल-अख़दर से शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह के बारे में एक प्रत्यक्ष वर्णन सुरक्षित किया है। इब्न अल-अख़दर कहते हैं कि वह सर्दियों के बीच और कड़ी ठंड में शैख़ के पास जाया करते थे। वह उन्हें केवल एक कमीज़ और टोपी में देखते, जबकि आसपास लोग उन्हें पंखा कर रहे होते और उनके शरीर से ऐसा पसीना निकलता जैसे बहुत तेज़ गर्मी हो। यही मुख्य दृश्य ज़हबी की तारीख़ अल-इस्लाम में भी सुरक्षित है।
ज़हबी ने शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह की जीवनी में सर्दियों का एक बहुत साफ़ और याद रह जाने वाला दृश्य सुरक्षित किया है। इस अवलोकन के रावी अबू मुहम्मद इब्न अल-अख़दर हैं, जो बग़दाद के हदीस विद्वान और शैख़ के समय के व्यक्ति थे। वह अपने बयान में कहते हैं कि वह अब्दुल क़ादिर के पास जाया करते थे और फिर समय को सर्दियों के बीच तथा उसकी कड़ी ठंड के रूप में बताते हैं।
दृश्य की असाधारणता मौसम और शैख़ की हालत के बीच स्पष्ट विरोध में सामने आती है। कड़ी ठंड के बावजूद शैख़ अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह ने केवल एक कमीज़ पहन रखी थी और सिर पर टोपी थी। फिर भी उनके आसपास मौजूद लोग उन्हें पंखे से हवा कर रहे थे, जबकि ऐसा काम सामान्यतः गर्मी के मौसम में देखा जाता है।
इसके बाद इब्न अल-अख़दर वह बात बताते हैं जो इस दृश्य को पूरा करती है। शैख़ के शरीर से पसीना उसी तरह निकल रहा था जैसे बहुत तेज़ गर्मी में निकलता है। इस तरह कुछ सरल बातें मिलकर पूरी तस्वीर बना देती हैं: सर्दियों की कड़ी ठंड, हल्का पहनावा, साफ़ दिखाई देने वाला पसीना और पास बैठे लोगों का उन्हें लगातार पंखा करना।
यह खबर इब्न अल-अख़दर की अपनी देखी हुई अवस्था के रूप में نقل हुई है। ज़हबी ने इस गवाह की जीवनी भी सुरक्षित की है और उनकी पहचान अब्द अल-अज़ीज़ इब्न महमूद इब्न अल-मुबारक इब्न अल-अख़दर अल-बग़दादी के रूप में की जाती है। उनका जीवन शैख़ अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह के समय से मिलता था, इसलिए यह दृश्य एक नाम वाले समकालीन व्यक्ति की याद के रूप में किताबों में सुरक्षित रहा।
यही मूल अवलोकन ज़हबी की तारीख़ अल-इस्लाम में भी मिलता है। बाद की कुछ किताबों ने भी सर्दियों के इस दृश्य को दोहराया, लेकिन कहानी का केंद्र वही रहता है: इब्न अल-अख़दर कड़ी ठंड में शैख़ के पास आते हैं और उन्हें हल्के कपड़ों में तेज़ पसीने के साथ देखते हैं, जबकि आसपास के लोग उन्हें पंखा कर रहे होते हैं।
इस रूप में हिकायत छोटी, साफ़ और बहुत चित्रात्मक रहती है। इसे समझने के लिए लंबी बातचीत या अतिरिक्त घटनाओं की आवश्यकता नहीं है। इसका पूरा प्रभाव इसी एक विरोध में है: बाहर सर्दी अपने चरम पर है, लेकिन गवाह के सामने शैख़ अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह ऐसे पसीना बहा रहे हैं जैसे बहुत तेज़ गर्मी में बैठे हों।
दृश्य की असाधारणता मौसम और शैख़ की हालत के बीच स्पष्ट विरोध में सामने आती है। कड़ी ठंड के बावजूद शैख़ अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह ने केवल एक कमीज़ पहन रखी थी और सिर पर टोपी थी। फिर भी उनके आसपास मौजूद लोग उन्हें पंखे से हवा कर रहे थे, जबकि ऐसा काम सामान्यतः गर्मी के मौसम में देखा जाता है।
इसके बाद इब्न अल-अख़दर वह बात बताते हैं जो इस दृश्य को पूरा करती है। शैख़ के शरीर से पसीना उसी तरह निकल रहा था जैसे बहुत तेज़ गर्मी में निकलता है। इस तरह कुछ सरल बातें मिलकर पूरी तस्वीर बना देती हैं: सर्दियों की कड़ी ठंड, हल्का पहनावा, साफ़ दिखाई देने वाला पसीना और पास बैठे लोगों का उन्हें लगातार पंखा करना।
यह खबर इब्न अल-अख़दर की अपनी देखी हुई अवस्था के रूप में نقل हुई है। ज़हबी ने इस गवाह की जीवनी भी सुरक्षित की है और उनकी पहचान अब्द अल-अज़ीज़ इब्न महमूद इब्न अल-मुबारक इब्न अल-अख़दर अल-बग़दादी के रूप में की जाती है। उनका जीवन शैख़ अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह के समय से मिलता था, इसलिए यह दृश्य एक नाम वाले समकालीन व्यक्ति की याद के रूप में किताबों में सुरक्षित रहा।
यही मूल अवलोकन ज़हबी की तारीख़ अल-इस्लाम में भी मिलता है। बाद की कुछ किताबों ने भी सर्दियों के इस दृश्य को दोहराया, लेकिन कहानी का केंद्र वही रहता है: इब्न अल-अख़दर कड़ी ठंड में शैख़ के पास आते हैं और उन्हें हल्के कपड़ों में तेज़ पसीने के साथ देखते हैं, जबकि आसपास के लोग उन्हें पंखा कर रहे होते हैं।
इस रूप में हिकायत छोटी, साफ़ और बहुत चित्रात्मक रहती है। इसे समझने के लिए लंबी बातचीत या अतिरिक्त घटनाओं की आवश्यकता नहीं है। इसका पूरा प्रभाव इसी एक विरोध में है: बाहर सर्दी अपने चरम पर है, लेकिन गवाह के सामने शैख़ अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह ऐसे पसीना बहा रहे हैं जैसे बहुत तेज़ गर्मी में बैठे हों।
निष्कर्ष
रिवायत एक साफ़ दृश्य पर समाप्त होती है: कड़ी सर्दी में शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह एक कमीज़ और टोपी में थे, उनके शरीर से बहुत पसीना निकल रहा था और आसपास के लोग उन्हें पंखा कर रहे थे।
स्रोत
Siyar al-A'lam al-Nubala 20:449: Ibn al-Najjar heard Abu Muhammad ibn al-Akhdar say, in habitual wording, that he used to visit Abd al-Qadir in the middle of winter and severe cold; Abd al-Qadir had one shirt and a cap, people fanned him, and sweat came from his body as in intense heat.
Tarikh al-Islam, vol. 39, independently preserves Abu Muhammad ibn al-Akhdar’s winter observation of Abd al-Qadir wearing one shirt and sweating as in severe heat.
Al-Dhahabi states in the same biography that many karamat attributed to Abd al-Qadir are not sound and some attributed claims are impossible.
Siyar al-A'lam al-Nubala, biography of Ibn al-Akhdar, vol. 22 p.32: Abu Muhammad Abd al-Aziz ibn Mahmud ibn al-Mubarak al-Janabidhi al-Baghdadi is described by al-Dhahabi as trustworthy, understanding, good, religious and chaste; Ibn Nuqta is quoted describing him as trustworthy, precise, dependable, widely heard and sound in his originals.