कड़ी सर्दी में शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी के शरीर से तेज़ पसीना आने का प्रत्यक्ष वर्णन

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बग़दाद के हदीस विद्वान अबू मुहम्मद इब्न अल-अख़दर बताते हैं कि वह सर्दियों के बीच और कड़ी ठंड में शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी के पास जाया करते थे। वह शैख़ को केवल एक कमीज़ और टोपी में देखते, जबकि आसपास लोग उन्हें पंखा कर रहे होते और उनके शरीर से ऐसा पसीना निकलता जैसे बहुत तेज़ गर्मी हो। इब्न अल-अख़दर स्वयं एक पहचाने हुए, विश्वसनीय और समकालीन रावी थे।

अल-ज़हबी शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी की जीवनी में सर्दी का एक बहुत स्पष्ट और चौंकाने वाला दृश्य सुरक्षित रखते हैं। इस अवलोकन के रावी अबू मुहम्मद इब्न अल-अख़दर हैं। उनके शब्द महत्वपूर्ण हैं: वह कहते हैं कि वह शैख़ के पास “जाया करते थे”, और फिर समय को सर्दियों के बीच तथा उसकी कड़ी ठंड बताते हैं। यह भाषा किसी अनाम एकबारगी कथा की तुलना में परिचित या दोहराए गए शीतकालीन अनुभव का रंग देती है, हालाँकि स्रोत अवसरों की संख्या नहीं बताता।

इब्न अल-अख़दर के अनुसार उस कठोर ठंड में अब्दुल क़ादिर ने केवल एक कमीज़ पहन रखी थी और सिर पर टोपी थी। फिर भी उनके आसपास ऐसे लोग थे जो पंखे से उन्हें हवा कर रहे थे। अगला वाक्य दृश्य की असामान्य बात बताता है: उनके शरीर से पसीना उसी तरह निकल रहा था जैसे बहुत तेज़ गर्मी में निकलता है। एक ओर कड़ी सर्दी और दूसरी ओर हल्का पहनावा, पसीना और पंखा—यही विरोध इस रिवायत को यादगार बनाता है।

रावी की पहचान भी खबर को महत्वपूर्ण बनाती है। अबू मुहम्मद इब्न अल-अख़दर की पहचान अब्द अल-अज़ीज़ बिन महमूद बिन अल-मुबारक इब्न अल-अख़दर अल-बग़दादी के रूप में होती है। उनका जन्म 524 हिजरी और निधन 611 हिजरी में हुआ। अल-ज़हबी उन्हें विश्वसनीय, समझदार और धार्मिक रावी बताते हैं और दूसरे हदीस विद्वानों से भी उनकी अमानत, सटीकता और मजबूत श्रवण-परंपरा की प्रशंसा نقل करते हैं। शैख़ अब्दुल क़ादिर का निधन 561 हिजरी में हुआ, इसलिए इब्न अल-अख़दर उनके वयस्क समकालीन थे।

यही मुख्य अवलोकन अल-ज़हबी की तारीख़ अल-इस्लाम में भी सुरक्षित है। इसलिए यह केवल कोई बाद की अनाम लोककथा नहीं है; इसमें एक पहचाना हुआ गवाह है, इब्न अल-नज्जार के माध्यम से उसका बयान आता है और प्रमुख शास्त्रीय जीवनी ग्रंथ उसे सुरक्षित रखते हैं। बाद के मनाक़िब संग्रहों ने भी इसी सर्दी वाले दृश्य को दोहराया।

मूल शास्त्रीय रिपोर्ट यह नहीं बताती कि इतनी ठंड में इतना पसीना क्यों आ रहा था, और वह किसी विशेष कारण का नाम नहीं देती। इसलिए कारण अपनी ओर से जोड़ना आवश्यक नहीं है। स्रोत का वास्तविक दृश्य ही पर्याप्त रूप से उल्लेखनीय है: सर्दियों का मध्य, कड़ी ठंड, एक कमीज़ और टोपी, शरीर से तेज़ गर्मी जैसा पसीना और आसपास लोगों का पंखा करना।

सार्वजनिक कहानी में मुख्य ध्यान इसी दृश्य और उसके ज्ञात समकालीन गवाह पर रहना चाहिए। अल-ज़हबी की कुछ बढ़ा-चढ़ाकर मंसूब करामतों पर सामान्य सावधानी अपनी जगह रह सकती है, लेकिन उसे पूरी कहानी पर हावी करने की आवश्यकता नहीं। इस रूप में यह एक विश्वसनीय समकालीन रावी द्वारा वर्णित और शास्त्रीय रूप से सुरक्षित असामान्य शारीरिक अवस्था की खबर बनती है।

निष्कर्ष

विश्वसनीय समकालीन रावी अबू मुहम्मद इब्न अल-अख़दर बताते हैं कि वह कड़ी सर्दियों में शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी को एक कमीज़ और टोपी में देखते, जबकि उनके शरीर से तेज़ गर्मी जैसा पसीना निकलता और आसपास लोग उन्हें पंखा करते थे।

स्रोत

Siyar al-A‘lam al-Nubala 20:449: Ibn al-Najjar says he heard Abu Muhammad ibn al-Akhdar describe Abd al-Qadir sweating heavily in severe winter cold while wearing one shirt.
Tarikh al-Islam, vol. 39, independently preserves Abu Muhammad ibn al-Akhdar’s winter observation of Abd al-Qadir wearing one shirt and sweating as in severe heat.
Al-Dhahabi states in the same biography that many karamat attributed to Abd al-Qadir are not sound and some attributed claims are impossible.