ज़हबी ने इब्न अल-नज्जार और अब्दुल्लाह बिन अबी अल-हसन अल-जुब्बाई से संबंधित सामग्री में अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह का एक निजी बयान सुरक्षित किया है। बग़दाद की अशांति के समय उन्होंने शहर छोड़ने का इरादा किया। रिवायत के अनुसार बाब अल-हल्बा के पास उन्होंने ऐसे बोलने वाले की आवाज़ सुनी जिसे वे देख नहीं रहे थे, फिर धक्का या चोट लगने से गिरे और उन्हें लौटने का आदेश मिला, क्योंकि लोग उनसे लाभ पाएँगे।
ज़हबी ने अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह की जीवनी में इब्न अल-नज्जार और अब्दुल्लाह बिन अबी अल-हसन अल-जुब्बाई से संबंधित सामग्री के भीतर एक उल्लेखनीय निजी रिवायत सुरक्षित की है। कहानी उस समय शुरू होती है जब बग़दाद में अशांति थी। अब्दुल क़ादिर ने शहर छोड़ने का निर्णय किया और रिवायत उनके इसी प्रस्थान को आगे बढ़ाते हुए उस घटना तक पहुँचती है जो रास्ते में उनके साथ जुड़ी बताई गई है।
रिवायत के अनुसार अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह बग़दाद से निकलते हुए बाब अल-हल्बा के क्षेत्र तक पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बोलने वाले की आवाज़ सुनी, लेकिन उसे देख नहीं रहे थे। उसने पूछा कि वे कहाँ जा रहे हैं। इसके बाद बयान एक अचानक शारीरिक घटना का उल्लेख करता है: उनसे जुड़ा कथन कहता है कि उन्हें धक्का या चोट लगी और वे ज़मीन पर गिर पड़े। स्रोत उस आवाज़ वाले की कोई दृश्य पहचान नहीं बताता।
गिरने के तुरंत बाद कहानी का मुख्य मोड़ आता है। अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह को आदेश दिया गया कि वे आगे जाकर बग़दाद न छोड़ें, बल्कि लौट जाएँ। साथ ही उनसे कहा गया कि लोग उनसे लाभ पाएँगे। इस प्रकार पूरी घटना का क्रम स्पष्ट है: शहर छोड़ने का इरादा, बाब अल-हल्बा पहुँचना, एक अदृश्य बोलने वाले की आवाज़ सुनना, गिरना और फिर वापस लौटने का आदेश मिलना।
यह घटना अब्दुल क़ादिर के अपने वर्णित अनुभव के रूप में सामने आती है, न कि किसी बड़े सार्वजनिक दृश्य के रूप में जिसे बहुत से लोगों ने एक साथ देखा हो। रिवायत किसी नामित साथी का उल्लेख नहीं करती जो उसी समय उनके पास खड़ा होकर स्वतंत्र रूप से वही दृश्य बताता हो। इसलिए कहानी का केंद्र वही निजी बयान है जिसमें आवाज़ सुनने, गिरने और वापस जाने का आदेश मिलने का उल्लेख सुरक्षित है।
ज़हबी ने इस रिवायत को सियर आलाम अल-नुबला में अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह की जीवनी के भीतर सुरक्षित किया है। इसका याद रहने वाला क्रम सीधा है: बग़दाद की अशांति, शहर छोड़ने की कोशिश, बाब अल-हल्बा के पास पहुँचना, अदृश्य आवाज़ और अचानक गिरना, फिर लौटने का आदेश और यह कथन कि लोग उनसे लाभ पाएँगे। इसी रूप में यह कहानी शैख़ से जुड़ी एक प्राचीन निजी आध्यात्मिक रिवायत के रूप में प्रस्तुत होती है।
रिवायत के अनुसार अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह बग़दाद से निकलते हुए बाब अल-हल्बा के क्षेत्र तक पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बोलने वाले की आवाज़ सुनी, लेकिन उसे देख नहीं रहे थे। उसने पूछा कि वे कहाँ जा रहे हैं। इसके बाद बयान एक अचानक शारीरिक घटना का उल्लेख करता है: उनसे जुड़ा कथन कहता है कि उन्हें धक्का या चोट लगी और वे ज़मीन पर गिर पड़े। स्रोत उस आवाज़ वाले की कोई दृश्य पहचान नहीं बताता।
गिरने के तुरंत बाद कहानी का मुख्य मोड़ आता है। अब्दुल क़ादिर रहिमहुल्लाह को आदेश दिया गया कि वे आगे जाकर बग़दाद न छोड़ें, बल्कि लौट जाएँ। साथ ही उनसे कहा गया कि लोग उनसे लाभ पाएँगे। इस प्रकार पूरी घटना का क्रम स्पष्ट है: शहर छोड़ने का इरादा, बाब अल-हल्बा पहुँचना, एक अदृश्य बोलने वाले की आवाज़ सुनना, गिरना और फिर वापस लौटने का आदेश मिलना।
यह घटना अब्दुल क़ादिर के अपने वर्णित अनुभव के रूप में सामने आती है, न कि किसी बड़े सार्वजनिक दृश्य के रूप में जिसे बहुत से लोगों ने एक साथ देखा हो। रिवायत किसी नामित साथी का उल्लेख नहीं करती जो उसी समय उनके पास खड़ा होकर स्वतंत्र रूप से वही दृश्य बताता हो। इसलिए कहानी का केंद्र वही निजी बयान है जिसमें आवाज़ सुनने, गिरने और वापस जाने का आदेश मिलने का उल्लेख सुरक्षित है।
ज़हबी ने इस रिवायत को सियर आलाम अल-नुबला में अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह की जीवनी के भीतर सुरक्षित किया है। इसका याद रहने वाला क्रम सीधा है: बग़दाद की अशांति, शहर छोड़ने की कोशिश, बाब अल-हल्बा के पास पहुँचना, अदृश्य आवाज़ और अचानक गिरना, फिर लौटने का आदेश और यह कथन कि लोग उनसे लाभ पाएँगे। इसी रूप में यह कहानी शैख़ से जुड़ी एक प्राचीन निजी आध्यात्मिक रिवायत के रूप में प्रस्तुत होती है।
निष्कर्ष
कहानी अब्दुल क़ादिर जीलानी रहिमहुल्लाह को बग़दाद लौटने के आदेश पर समाप्त होती है, साथ ही यह कथन आता है कि लोग उनसे लाभ पाएँगे।
स्रोत
Siyar al-A‘lam al-Nubala 20:446. In Ibn al-Najjar material transmitted through Abd Allah ibn Abi al-Hasan al-Jubba‘i, the self-report continues with Abd al-Qadir leaving Baghdad, an unseen speaker stopping and pushing him, and telling him to return because people would benefit from him.
Siyar al-A‘lam al-Nubala 20:450: al-Dhahabi states that although Abd al-Qadir has many reported states and karamat, many of them are not sound and some contain impossible matters.