सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम की कई प्रामाणिक रिवायतें ख़ैबर की इस घटना को स्पष्ट रूप से सुरक्षित रखती हैं। हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु आँखों की गंभीर तकलीफ़ से पीड़ित थे, फिर भी उन्होंने रसूलुल्लाह ﷺ से पीछे रहना पसंद नहीं किया और जाकर लश्कर से मिल गए। नबी ﷺ ने घोषणा की कि झंडा ऐसे व्यक्ति को दिया जाएगा जो अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है और जिसे अल्लाह और उसका रसूल प्रेम करते हैं; अली को लाया गया तो नबी ﷺ ने उनकी आँखों पर अपना लार लगाया, दुआ की और वे तुरंत ऐसे ठीक हो गए जैसे कभी दर्द था ही नहीं।
उस रात, जिसके अगले दिन विजय मिली, रसूलुल्लाह ﷺ ने एक ऐसी घोषणा की जिसने सहाबा के दिलों में बड़ी आशा पैदा कर दी। आपने कहा कि अगले दिन झंडा ऐसे आदमी को दिया जाएगा जिसके हाथ पर अल्लाह विजय देगा, जो अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है और जिसे अल्लाह और उसका रसूल भी प्रेम करते हैं। सहाबा ने रात इसी प्रतीक्षा में बिताई कि यह सम्मान किसे मिलेगा और सुबह हर व्यक्ति इसकी आशा कर रहा था।
फिर नबी ﷺ ने पूछा: अली बिन अबी तालिब कहाँ हैं? बताया गया कि उनकी आँखों में दर्द है। अली को आपके सामने लाया गया। सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम इस निर्णायक क्षण को साफ़ शब्दों में बयान करती हैं: रसूलुल्लाह ﷺ ने अली की आँखों पर अपना लार लगाया और उनके लिए दुआ की। परिणाम तुरंत सामने आया। अली पूरी तरह ठीक हो गए, यहाँ तक कि रिवायत कहती है कि वे ऐसे हो गए जैसे उनकी आँखों में कभी दर्द था ही नहीं।
इसके बाद नबी ﷺ ने झंडा अली के हाथ में दे दिया। अली ने पूछा कि क्या वे लोगों से तब तक लड़ें जब तक वे मुसलमानों जैसे न हो जाएँ। रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें जल्दबाज़ी के बजाय धैर्य और हिकमत की शिक्षा दी। आपने कहा कि आराम से आगे बढ़ो, उनके क्षेत्र तक पहुँचो, पहले उन्हें इस्लाम की ओर बुलाओ और अल्लाह के वे अधिकार बताओ जो उन पर आवश्यक हैं। फिर आपने बताया कि यदि अल्लाह तुम्हारे माध्यम से एक व्यक्ति को भी हिदायत दे दे तो यह तुम्हारे लिए सबसे कीमती लाल ऊँटों से बेहतर है।
इस तरह आँखों की शिफ़ा एक बड़े और सुंदर दृश्य के बीच आती है: अली का तकलीफ़ के बावजूद नबी ﷺ से जा मिलना, रात में झंडे की घोषणा, सहाबा की प्रतीक्षा, अली को विशेष रूप से बुलाना, दुआ के बाद तुरंत शिफ़ा और फिर झंडा तथा जिम्मेदारी सौंपना।
सहीह रिवायतें आगे बताती हैं कि अल्लाह ने अली के हाथ पर विजय दी। इसलिए यह घटना एक ओर स्पष्ट पैग़म्बरी चमत्कार है और दूसरी ओर अली रज़ियल्लाहु अन्हु की बड़ी फ़ज़ीलत: अल्लाह और उसके रसूल की मुहब्बत, नबी की दुआ से शिफ़ा, झंडा और फिर विजय।
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम के कई रास्ते इसी मूल क्रम को प्रमाणित करते हैं, इसलिए ख़ैबर की इस कहानी का केंद्रीय भाग अत्यंत मज़बूत रूप से स्थापित है।
निष्कर्ष
ख़ैबर की यह घटना एक स्पष्ट पैग़म्बरी चमत्कार और हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की महान फ़ज़ीलत को एक साथ दिखाती है: रसूलुल्लाह ﷺ की दुआ के बाद उनकी आँखें तुरंत ठीक हुईं, झंडा उन्हें मिला और अल्लाह ने उनके हाथ पर विजय दी।
स्रोत
V3_TASK_4_LINKAGE_AND_METADATA_REPAIR: linked to CLM-01 and independently verified Sahih al-Bukhari 3009. Correct in-book reference is Book 56, Hadith 218 (not 208). The report explicitly gives Khaybar, Ali's eye trouble, the Prophet applying saliva, invoking Allah, immediate cure as though no ailment had existed, and then giving Ali the flag.
V3_TASK_4_SOURCE_DECOMPOSITION_AND_METADATA_REPAIR: supplied row combined Bukhari 2942 and 4210 in one SOURCE record. Task 4 preserves this existing row as the Bukhari 2942 route and adds a separate unique SOURCE row for Bukhari 4210. Bukhari 2942 is independently verified as Book 56, Hadith 154 and explicitly repeats the Khaybar eye-healing immediately before Ali receives the flag.
V3_TASK_4_LINKAGE_AND_METADATA_REPAIR: linked to CLM-04 and independently verified Sahih Muslim 2406. Correct in-book reference is Book 44, Hadith 53 (not 50). Muslim independently reports Ali's sore eyes, the Prophet applying saliva and invoking blessing, and Ali becoming well as though he had no ailment.
V3_TASK_4_LINKAGE_REPAIR: direct Bukhari 3009 row added for CLM-02. The report explicitly states that the Prophet applied saliva to Ali's eyes and invoked Allah to cure him.
V3_TASK_4_LINKAGE_REPAIR: direct Bukhari 3009 row added for CLM-03. The report explicitly says Ali was cured immediately as if he had no ailment.
V3_TASK_4_SOURCE_DECOMPOSITION: separate unique Bukhari 4210 row added for CLM-04 because the supplied SRC-02 combined two different Bukhari hadith numbers in one source row. Bukhari 4210 is independently verified as Book 64, Hadith 250 and repeats the same Khaybar healing/flag sequence.