जब नबी ﷺ ने दुआ की कि बारिश मदीना के चारों ओर हो, शहर पर नहीं

स्वीकृत नबी की दुआनबूवत की पुष्टि की निशानीदुआ की स्वीकृतिरहमत या बरकतऐतिहासिक परिणामसहीह हदीस
⚙️ प्रिंट, साझा और अन्य विकल्प
📱 व्हाट्सऐप 📧 ईमेल सहेजे गए पृष्ठ

क्यू आर संकेत

पृष्ठ का क्यू आर
पृष्ठ का क्यू आर

संबंधित व्यक्ति

सहीह अल-बुख़ारी और सहीह मुस्लिम मदीना की बारिश की घटना का बहुत सुंदर दूसरा चरण सुरक्षित रखती हैं। एक सप्ताह की भारी बारिश के बाद अगले शुक्रवार लोग फिर आए; रास्ते बंद हो चुके थे, मवेशी प्रभावित थे और एक सहीह रिवायत में घर गिरने का भी उल्लेख है। नबी ﷺ ने बारिश की नेमत पूरी तरह रोकने की दुआ नहीं की, बल्कि कहा: “ऐ अल्लाह, हमारे चारों ओर बरसा, हम पर नहीं,” और पहाड़ियों, घाटियों तथा पेड़ों वाली भूमि पर बारिश की दुआ की। फिर मदीना के ऊपर से बादल हट गए जबकि आसपास बारिश जारी रही।

कहानी उस शुक्रवार से शुरू होती है जब मदीना सूखे और पानी की कमी से परेशान था। लोगों ने रसूलुल्लाह ﷺ से बारिश की दुआ करने की विनती की और सहीह रिवायतों के अनुसार बारिश आई और पूरे सप्ताह जारी रही। लेकिन अगले शुक्रवार तक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी थी। जो बारिश पहले राहत और रहमत थी, उसकी अधिकता अब कठिनाई बन गई थी। रास्ते कट गए, मवेशी प्रभावित होने लगे और सहीह बुख़ारी की एक समानांतर रिवायत में घरों के गिरने का भी वर्णन आता है।

जुमे के ख़ुत्बे के दौरान एक व्यक्ति फिर नबी ﷺ के सामने खड़ा हुआ। इस बार उसने बारिश शुरू होने की नहीं, बल्कि उसकी तीव्रता से राहत की दुआ माँगी। नबी ﷺ ने हाथ उठाए और बहुत संतुलित दुआ की: “ऐ अल्लाह, हमारे चारों ओर बरसा, हम पर नहीं।” विस्तृत रिवायतों में आपने पहाड़ियों, ऊँचे स्थानों, घाटियों और पेड़ उगने वाली भूमि पर बारिश होने की दुआ की।

यही इस घटना की सबसे सुंदर बात है। नबी ﷺ ने बारिश की नेमत समाप्त होने की दुआ नहीं की; आपने चाहा कि उसका लाभ बना रहे और उसका नुकसान आबादी से दूर हो जाए। यानी रहमत भी रहे और लोगों की परेशानी भी हट जाए।

अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु नतीजे को बहुत जीवंत रूप में बयान करते हैं। सहीह बुख़ारी में आता है कि दुआ के बाद मदीना के ऊपर बारिश रुक गई और लोग धूप में बाहर निकले। दूसरी रिवायत में बादल दाएँ और बाएँ फटकर हटते हैं जबकि शहर से बाहर बारिश जारी रहती है। एक और सहीह रिवायत में बादलों का मदीना से ऐसे हटना वर्णित है जैसे कोई कपड़ा हटा दिया जाए।

सहीह मुस्लिम इस दृश्य को और विस्तृत करती है। अनस बताते हैं कि नबी ﷺ जिस दिशा की ओर संकेत करते, बादल वहाँ से खुलते जाते, यहाँ तक कि मदीना बीच में साफ़ दिखाई देने लगा। फिर भी आसपास के क्षेत्र बारिश से वंचित नहीं हुए। वादी क़नात एक महीने तक बहती रही और अलग-अलग दिशाओं से आने वाले लोग बाहर के इलाक़ों में अच्छी और भरपूर बारिश की खबर देते रहे।

इस तरह पूरी घटना रहमत और संतुलन की एक सुंदर तस्वीर बनती है। पहले लोगों ने सूखे से राहत के लिए बारिश माँगी, फिर अत्यधिक बारिश से सुरक्षा माँगी। नबी ﷺ ने अल्लाह से दुआ की कि बारिश वहीं बनी रहे जहाँ वह भूमि को लाभ दे, लेकिन मदीना से उसका नुकसान दूर हो जाए। कई सहीह रिवायतों के अनुसार दुआ के बाद यही परिवर्तन दिखाई दिया।

निष्कर्ष

सहीह रिवायतें दुआ की स्पष्ट स्वीकृति सुरक्षित रखती हैं: जब भारी बारिश मदीना के लिए कठिनाई बन गई, नबी ﷺ ने दुआ की कि बारिश शहर पर नहीं बल्कि उसके चारों ओर हो, और मदीना साफ़ हो गया जबकि आसपास लाभकारी बारिश जारी रही।

स्रोत

Sahih al-Bukhari 1013

UPSTREAM_SOURCE_LINK_REPAIR=PASS; claim_code=CAND-0059-CLM-01 now links this SOURCE to a claim reconstructed only from this locked source's canonical content.

Sahih al-Bukhari 1014

UPSTREAM_SOURCE_LINK_REPAIR=PASS; claim_code=CAND-0059-CLM-02 now links this SOURCE to a claim reconstructed only from this locked source's canonical content.

Sahih al-Bukhari 1015

UPSTREAM_SOURCE_LINK_REPAIR=PASS; claim_code=CAND-0059-CLM-03 now links this SOURCE to a claim reconstructed only from this locked source's canonical content.

Sahih Muslim 897a

UPSTREAM_SOURCE_LINK_REPAIR=PASS; claim_code=CAND-0059-CLM-04 now links this SOURCE to a claim reconstructed only from this locked source's canonical content.