उनकी सही जन्म तिथि और स्थान ज्ञात नहीं हैं। शास्त्रीय रिपोर्टें उन्हें पैग़म्बर से लगभग दस वर्ष बड़ा और मृत्यु के समय तिरसठ या चौंसठ वर्ष का बताती हैं।
उबैदा इब्न अल-हारिस
PER-000188
परिवार का सदस्य
पुष्ट
विशिष्ट स्थान ज्ञात
साझा ऐतिहासिक दायरा
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उबैदा इब्न अल-हारिस इब्न अल-मुत्तलिब बनी अल-मुत्तलिब के प्रारंभिक मुसलमान, मुहाजिर, बद्र के योद्धा और ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा के पति थे। उन्होंने आरंभिक दौर में इस्लाम स्वीकार किया, मदीना हिजरत की, बत्न राबिग़ की शुरुआती टुकड़ी का नेतृत्व किया और बद्र की प्रारंभिक मुक़ाबला-लड़ाई में गंभीर रूप से घायल हुए। वापसी में २ हिजरी में अल-सफ़रा में उनका निधन हुआ और एक प्राचीन रिवायत के अनुसार पैग़म्बर ने उन्हें वहीं दफ़्न किया।
बद्र में मिले गंभीर घाव के कारण वादी अल-सफ़रा में रमज़ान २ हिजरी के अंतिम दस दिनों में उनका निधन हुआ। आयु ६३ या ६४ वर्ष बताई गई है।
एक प्राचीन रिपोर्ट के अनुसार पैग़म्बर ने उन्हें वादी अल-सफ़रा में ज़ात अजज़ाल, अल-मदीक़ में ऐन अल-जदवल के नीचे दफ़्न किया। ऐतिहासिक दफ़न मज़बूती से वर्णित है। स्थान की लोकेशन मानचित्र पृष्ठ पर उपलब्ध है।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
उबैदा इब्न अल-हारिस इब्न अल-मुत्तलिब इब्न अब्द मनाफ़ क़ुरैश के बनी अल-मुत्तलिब से थे, जो बनी हाशिम के निकट संबंधी और सहयोगी थे। उनके पिता अल-हारिस इब्न अल-मुत्तलिब और माता सुख़ैला बिन्त ख़ुज़ाई इब्न अल-हुवैरिस अल-सक़फ़िय्या थीं; इब्न सअद और इब्न हिब्बान दोनों यह वंश सुरक्षित करते हैं। उपलब्ध स्रोत पिता और माता की पहचान निश्चित नहीं करते, इसलिए बदले नहीं गए और दोनों संबंधों के लिए अलग स्रोत-समीक्षा तैयार किया गया।
उन्हें आरंभिक मुसलमानों में गिना जाता है और रिवायतें उनका इस्लाम घर अल-अरक़म के चरण से पहले रखती हैं। उन्होंने अपने भाइयों अल-तुफ़ैल और अल-हुसैन के साथ मदीना हिजरत की। शास्त्रीय जीवनीकार उन्हें पैग़म्बर से लगभग दस वर्ष बड़ा, गरिमापूर्ण और मुसलमानों में ऊँचे स्थान वाला बताते हैं, हालाँकि सही जन्म तिथि सुरक्षित नहीं है।
हिजरत के बाद उन्हें मुहाजिरों की एक टुकड़ी का नेतृत्व देकर बत्न राबिग़ भेजा गया। रिवायतें संख्या साठ या अस्सी बताती हैं। वहाँ क़ुरैश के दल से सामना और सीमित तीरंदाज़ी हुई; सअद इब्न अबी वक़्क़ास का तीर अक्सर इस्लामी सशस्त्र संघर्ष का पहला मुस्लिम तीर कहा जाता है। कुछ सीरत रिवायतें उबैदा के झंडे को इस्लाम का पहला झंडा कहती हैं, जबकि शुरुआती अभियानों के क्रम पर दूसरे मत भी हैं।
बद्र में वे हमज़ा इब्न अब्द अल-मुत्तलिब और अली इब्न अबी तालिब के साथ क़ुरैश के तीन मुक़ाबिल योद्धाओं के सामने निकले। इब्न सअद और इब्न हिब्बान उनका प्रतिद्वंद्वी शैबा इब्न रबीआ बताते हैं, जबकि कुछ दूसरी रिवायतें उतबा का नाम देती हैं। उनकी निचली टाँग बुरी तरह कट गई; फिर हमज़ा और अली ने प्रतिद्वंद्वी को समाप्त किया और उबैदा को मुस्लिम पंक्ति में लाए।
ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा से उनका विवाह शास्त्रीय जीवनी और वंश ग्रंथों में सुरक्षित है। ज़ैनब पहले उनके भाई अल-तुफ़ैल की पत्नी थीं और तलाक़ के बाद उबैदा से विवाह हुआ। इब्न सअद उबैदा के कई पुत्र-पुत्रियाँ गिनते हैं, पर उन्हें ज़ैनब की संतान सिद्ध नहीं करते; इसलिए ऐसा दावा नहीं किया गया। मौजूदा संरक्षित पति-पत्नी संबंध स्रोतों से समर्थित और अपरिवर्तित है।
बद्र से वापसी में घाव बढ़ गया और रमज़ान २ हिजरी के अंतिम दस दिनों में वादी अल-सफ़रा में उनका निधन हुआ। आयु तिरसठ या चौंसठ वर्ष बताई गई है। इब्न सअद लिखते हैं कि पैग़म्बर ने उन्हें अल-सफ़रा के ज़ात अजज़ाल, अल-मदीक़ में ऐन अल-जदवल के नीचे दफ़्न किया और बाद के रावी ने क़ब्र देखी थी। ऐतिहासिक दफ़न की रिवायत मज़बूत है।
उन्हें आरंभिक मुसलमानों में गिना जाता है और रिवायतें उनका इस्लाम घर अल-अरक़म के चरण से पहले रखती हैं। उन्होंने अपने भाइयों अल-तुफ़ैल और अल-हुसैन के साथ मदीना हिजरत की। शास्त्रीय जीवनीकार उन्हें पैग़म्बर से लगभग दस वर्ष बड़ा, गरिमापूर्ण और मुसलमानों में ऊँचे स्थान वाला बताते हैं, हालाँकि सही जन्म तिथि सुरक्षित नहीं है।
हिजरत के बाद उन्हें मुहाजिरों की एक टुकड़ी का नेतृत्व देकर बत्न राबिग़ भेजा गया। रिवायतें संख्या साठ या अस्सी बताती हैं। वहाँ क़ुरैश के दल से सामना और सीमित तीरंदाज़ी हुई; सअद इब्न अबी वक़्क़ास का तीर अक्सर इस्लामी सशस्त्र संघर्ष का पहला मुस्लिम तीर कहा जाता है। कुछ सीरत रिवायतें उबैदा के झंडे को इस्लाम का पहला झंडा कहती हैं, जबकि शुरुआती अभियानों के क्रम पर दूसरे मत भी हैं।
बद्र में वे हमज़ा इब्न अब्द अल-मुत्तलिब और अली इब्न अबी तालिब के साथ क़ुरैश के तीन मुक़ाबिल योद्धाओं के सामने निकले। इब्न सअद और इब्न हिब्बान उनका प्रतिद्वंद्वी शैबा इब्न रबीआ बताते हैं, जबकि कुछ दूसरी रिवायतें उतबा का नाम देती हैं। उनकी निचली टाँग बुरी तरह कट गई; फिर हमज़ा और अली ने प्रतिद्वंद्वी को समाप्त किया और उबैदा को मुस्लिम पंक्ति में लाए।
ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा से उनका विवाह शास्त्रीय जीवनी और वंश ग्रंथों में सुरक्षित है। ज़ैनब पहले उनके भाई अल-तुफ़ैल की पत्नी थीं और तलाक़ के बाद उबैदा से विवाह हुआ। इब्न सअद उबैदा के कई पुत्र-पुत्रियाँ गिनते हैं, पर उन्हें ज़ैनब की संतान सिद्ध नहीं करते; इसलिए ऐसा दावा नहीं किया गया। मौजूदा संरक्षित पति-पत्नी संबंध स्रोतों से समर्थित और अपरिवर्तित है।
बद्र से वापसी में घाव बढ़ गया और रमज़ान २ हिजरी के अंतिम दस दिनों में वादी अल-सफ़रा में उनका निधन हुआ। आयु तिरसठ या चौंसठ वर्ष बताई गई है। इब्न सअद लिखते हैं कि पैग़म्बर ने उन्हें अल-सफ़रा के ज़ात अजज़ाल, अल-मदीक़ में ऐन अल-जदवल के नीचे दफ़्न किया और बाद के रावी ने क़ब्र देखी थी। ऐतिहासिक दफ़न की रिवायत मज़बूत है।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
उबैदा का महत्व उन वरिष्ठ प्रारंभिक मुहाजिरों में है जिन्होंने मक्का के दबाव में इस्लाम स्वीकार किया, मदीना हिजरत की और नए समुदाय की पहली रक्षात्मक टुकड़ियों में जिम्मेदारी ली। बत्न राबिग़ की कमान उन पर रखे गए विश्वास को दिखाती है।
बद्र की प्रारंभिक मुक़ाबला-लड़ाई में भागीदारी उन्हें आरंभिक इस्लामी इतिहास की निर्णायक घड़ी से जोड़ती है। घातक घाव और अल-सफ़रा में मृत्यु उन्हें बद्र के प्रमुख शहीदों में रखती है, जबकि प्रतिद्वंद्वी और आयु पर छोटे स्रोत-भेद सुरक्षित रखना ऐतिहासिक शुद्धता है।
ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा से विवाह उनकी जीवनी को उस महिला से जोड़ता है जो बाद में उम्मुल मोमिनीन बनीं। इस मजबूत संबंध को बनाए रखते हुए मानचित्र पृष्ठ पर उपलब्ध स्थान का संक्षिप्त उल्लेख करना, और संतान या औपचारिक रूप से सत्यापित आधुनिक मज़ार के अप्रमाणित दावों से बचना संतुलित परिचय देता है।
बद्र की प्रारंभिक मुक़ाबला-लड़ाई में भागीदारी उन्हें आरंभिक इस्लामी इतिहास की निर्णायक घड़ी से जोड़ती है। घातक घाव और अल-सफ़रा में मृत्यु उन्हें बद्र के प्रमुख शहीदों में रखती है, जबकि प्रतिद्वंद्वी और आयु पर छोटे स्रोत-भेद सुरक्षित रखना ऐतिहासिक शुद्धता है।
ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा से विवाह उनकी जीवनी को उस महिला से जोड़ता है जो बाद में उम्मुल मोमिनीन बनीं। इस मजबूत संबंध को बनाए रखते हुए मानचित्र पृष्ठ पर उपलब्ध स्थान का संक्षिप्त उल्लेख करना, और संतान या औपचारिक रूप से सत्यापित आधुनिक मज़ार के अप्रमाणित दावों से बचना संतुलित परिचय देता है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
अल-हारिस इब्न अल-मुत्तलिब इब्न अब्द मनाफ़
पुष्ट
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा
पुष्ट
🌱 संतान
मुआविया इब्न उबैदा इब्न अल-हारिस
औन इब्न उबैदा इब्न अल-हारिस
मुनक़िध इब्न उबैदा इब्न अल-हारिस
अल-हारिस इब्न उबैदा इब्न अल-हारिस
मुहम्मद इब्न उबैदा इब्न अल-हारिस
इब्राहीम इब्न उबैदा इब्न अल-हारिस
रैता बिन्त उबैदा इब्न अल-हारिस
ख़दीजा बिन्त उबैदा इब्न अल-हारिस
सुख़ैला बिन्त उबैदा इब्न अल-हारिस
सफ़िय्या बिन्त उबैदा इब्न अल-हारिस
स्रोत
अल-तबक़ात अल-कुबरा | इब्न सअद | खंड तीन, पृष्ठ ३६ और संबंधित प्रविष्टि | https://www.masaha.org/book/view/2056/page/36 | पूरा वंश, माता सुख़ैला, संतान, प्रारंभिक इस्लाम, हिजरत और मूल जीवनीअल-तबक़ात अल-कुबरा | इब्न सअद | बद्र और दफ़न रिपोर्ट, प्रविष्टि २९२२ | https://hadithportal.com/index.php?bab_id=402&book=802&chapter_id=3&e=854&f=-1&show=bab | बद्र मुक़ाबला, गंभीर घाव, २ हिजरी में मृत्यु, तिरसठ वर्ष आयु और पैग़म्बर द्वारा अल-सफ़रा में दफ़न
अल-सिक़ात | इब्न हिब्बान | खंड तीन, पृष्ठ ३१२ से ३१३ | https://www.islamweb.net/ar/library/content/1079/1237/index.php | माता-पिता, कुनियत, शैबा से मुक़ाबला, अल-सफ़रा में मृत्यु और तिरसठ वर्ष आयु
अंसाब अल-अशराफ़ | अल-बलाज़ुरी | खंड एक, पृष्ठ ४२९ | https://lib.eshia.ir/40503/1/429 | ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा से विवाह, बद्र घाव, अल-सफ़रा में मृत्यु और चौंसठ वर्ष आयु
अल-तबक़ात अल-कुबरा | इब्न सअद | खंड आठ, ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा की प्रविष्टि | https://shamela.ws/book/1686/2758 | ज़ैनब का पहले अल-तुफ़ैल और फिर उबैदा से विवाह तथा बद्र के बाद विधवा होना
सियर आलाम अल-नुबला | अल-ज़हबी | खंड एक, पृष्ठ २५६ | https://www.islamweb.net/ar/library/content/60/56/%D8%B9%D8%A8%D9%8A%D8%AF%D8%A9-%D8%A8%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%AD%D8%A7%D8%B1%D8%AB | प्रारंभिक इस्लाम, भाइयों के साथ हिजरत, आयु, प्रतिष्ठा और अल-सफ़रा में मृत्यु
सुबुल अल-हुदा व अल-रशाद | मुहम्मद इब्न यूसुफ़ अल-सालिही अल-शामी | बत्न राबिग़ टुकड़ी का अध्याय | https://www.islamweb.net/ar/library/content/200/17006/%D8%B3%D8%B1%D9%8A%D8%A9-%D8%B9%D8%A8%D9%8A%D8%AF%D8%A9-%D8%A8%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%AD%D8%A7%D8%B1%D8%AB-%D8%A8%D9%86-%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%B7%D9%84%D8%A8-%D8%A5%D9%84%D9%89-%D8%A8%D8%B7%D9%86-%D8%B1%D8%A7%D8%A8%D8%BA | शुरुआती टुकड़ी, साठ या अस्सी मुहाजिर और पहले झंडे की रिवायत
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