मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर

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मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर, अबू अब्दुल्लाह अल-हरशी अल-आमिरी अल-बसरी, बसराह के प्रमुख वरिष्ठ ताबिईन में से थे। उनके पिता अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर सहाबी थे, और मुतर्रिफ़ ने अपने पिता तथा सहाबा-युग के विस्तृत नेटवर्क से रिवायत की, जिसमें उस्मान इब्न अफ़्फ़ान, अली इब्न अबी तालिब, आयशा, इमरान इब्न हुसैन, इयाद इब्न हिमार और अन्य शामिल थे। हसन अल-बसरी, क़तादा, साबित अल-बुनानी, हमीद इब्न हिलाल, ग़ैलान इब्न जरीर और मुहम्मद इब्न वासी जैसे बड़े बसरी रावियों ने उनसे रिवायत की। शास्त्रीय रीज़ाल प्राधिकारी उन्हें विश्वसनीय और ज्ञान, वरअ, बुद्धि तथा अदब से विशिष्ट बताते हैं, जबकि अल-मिज़्ज़ी नोट करते हैं कि उनके माध्यम से सामग्री हदीस की छह मुख्य पुस्तकों में आती है। उनकी सार्वजनिक छवि धार्मिक अनुशासन और सामान्य सामाजिक जीवन को जोड़ती थी: रिपोर्टें उन्हें अच्छे कपड़े पहनते, सवारी करते और अधिकारियों से मिलते दिखाती हैं, साथ ही वे हिंसक फ़ितना से जानबूझकर दूर रहे और प्रतिद्वंद्वी आंदोलनों में भर्ती से इनकार किया। शास्त्रीय स्रोत मुतर्रिफ़ से जुड़े कई असाधारण प्रसंग भी सुरक्षित करते हैं और हर रिवायत का अपना प्रमाणिक दर्जा है। उनके बारे में झूठ बोलने वाले व्यक्ति के विरुद्ध उनकी शर्तीय दुआ हमीद इब्न हिलाल के मार्ग से आती है और इब्न हजर ने इब्न अबी अद-दुन्या के एक मार्ग को अच्छी सनद वाला कहा; इसलिए यह अर्थपूर्ण सनदी समर्थन वाली शास्त्रीय करामत की रिवायत है, नबवी हदीस नहीं। इब्न सअद की एक अलग रिवायत में अल-हज्जाज ने अल-मुवर्रिक अल-इजली को क़ैद किया, मुतर्रिफ़ और उनके साथियों ने दुआ की और उसी शाम उसकी रिहाई का आदेश आया। अँधेरे सफ़र में कोड़े के सिरे पर रोशनी का प्रसंग भी कई शास्त्रीय मार्गों से सुरक्षित है, हालाँकि गवाहों और शब्दों में अंतर है। मुतर्रिफ़ की मृत्यु के लिए ८६ हिजरी, ८७ हिजरी की महामारी के संदर्भ और ९५ हिजरी की तारीख़ें प्रसारित हैं। एक प्राचीन पारिवारिक रिवायत बताती है कि उन्होंने अपने घर में क़ब्र तैयार की, उसमें क़ुरआन पढ़ा और मृत्यु के बाद वहीं दफ़्न किए गए।
जन्म

शास्त्रीय जीवनी परंपरा मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह के जन्म को पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवनकाल में रखती है। एक प्रसारित आयु-रिवायत कहती है कि उमर इब्न अल-ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु की मृत्यु के समय मुतर्रिफ़ बीस वर्ष के थे, जिससे लगभग ३ हिजरी का समय सामने आता है। उनकी परिपक्व विद्वत्तापूर्ण ज़िंदगी बसरा में उभरी, जहाँ वे वरिष्ठ ताबिई, रावी और वरअ तथा अदब के व्यक्ति के रूप में प्रसिद्ध हुए।

निधन

शास्त्रीय स्रोत मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह की मृत्यु के लिए कई कालक्रमिक रिवायतें सुरक्षित करते हैं। अम्र इब्न अली और अत-तिर्मिज़ी ९५ हिजरी बताते हैं, ख़लीफ़ा इब्न ख़य्यात से ८६ हिजरी प्रसारित है, जबकि रिवायतों का एक दूसरा समूह उनकी मृत्यु को लगभग ८७ हिजरी के ताऊन अल-जारिफ़ से या उसके बाद से जोड़ता है। इब्न हजर इब्न सअद के एक कथन की ऐसी व्याख्या करते हैं जो ९५ हिजरी से मेल खाती है। इस प्रकार मुतर्रिफ़ की मृत्यु का कालक्रम शास्त्रीय जीवनी परंपरा में कई प्रसारित रूपों के साथ सुरक्षित है, जिनमें ९५ हिजरी एक प्रमुख रिवायत है।

दफ़न या संबद्ध स्थान

स्थान का प्रकार: मुतर्रिफ़ के अपने घर में दफ़्न की प्राचीन ऐतिहासिक परंपरा। अहमद इब्न हनबल की किताब अज़-ज़ुह्द में मुतर्रिफ़ के एक वंशज से रिवायत है कि मुतर्रिफ़ ने अपने घर में अपने लिए क़ब्र खोदी, जीवन में उसमें जाकर क़ुरआन पढ़ते थे और मृत्यु के बाद उसी में दफ़्न किए गए। इब्न असाकिर अलग से बसराह से कुछ दिनों की दूरी पर बदिया के अस-सुख़ैरी में मुतर्रिफ़ के एक निवास का ऐतिहासिक उल्लेख सुरक्षित करते हैं। उनकी दफ़्न-स्मृति का सबसे मज़बूत प्राचीन भाग यही पारिवारिक रिवायत है जिसमें अपने घर में क़ब्र तैयार करना, उसमें क़ुरआन पढ़ना और मृत्यु के बाद वहीं दफ़्न होना वर्णित है।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर बसराह के वरिष्ठ ताबिई थे, आम तौर पर अबू अब्दुल्लाह की कुनियत से जाने जाते थे और अल-हरशी या अल-हराशी, अल-आमिरी तथा अल-बसरी निस्बतों से जुड़े थे। उनके पिता अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर सहाबी थे और बसरी रिवायत-संसार का हिस्सा बने।

उनके परिवार में उनके सहाबी पिता अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर और उनके भाई यज़ीद तथा हानी इब्न अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर प्रमुख रूप से सुरक्षित हैं। यह परिवार बसरा के शुरुआती विद्वत्तापूर्ण और रिवायती वातावरण का हिस्सा था।

इब्न हिब्बान मुतर्रिफ़ के जन्म को पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवनकाल में रखते हैं। एक दूसरी आयु-रिवायत कहती है कि उमर इब्न अल-ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु की मृत्यु के समय वे बीस वर्ष के थे, जिससे लगभग ३ हिजरी का समय निकलता है। फिर भी शास्त्रीय रीज़ाल की मुख्य श्रेणी उन्हें वरिष्ठ ताबिईन में रखती है।

मुतर्रिफ़ की विद्वत्तापूर्ण अहमियत सबसे पहले रिवायत पर आधारित है। अल-मिज़्ज़ी उनके शिक्षकों का व्यापक नेटवर्क सुरक्षित करते हैं जिसमें पिता अब्दुल्लाह, उस्मान इब्न अफ़्फ़ान, अली इब्न अबी तालिब, आयशा, इमरान इब्न हुसैन, इयाद इब्न हिमार, उस्मान इब्न अबी अल-आस, मुआविया इब्न अबी सुफ़यान और दूसरे शुरुआती प्राधिकारी शामिल थे।

मुतर्रिफ़ से रिवायत करने वालों में हसन अल-बसरी, क़तादा, साबित अल-बुनानी, हमीद इब्न हिलाल, ग़ैलान इब्न जरीर, मुहम्मद इब्न वासी और अबू अत-तय्याह शामिल थे। अल-मिज़्ज़ी का यह नोट कि छह मुख्य हदीस संग्रहों में उनके रास्ते सामग्री आती है, शास्त्रीय हदीस नेटवर्क में उनके मान्य स्थान का महत्वपूर्ण संकेत है।

एक विशेष रूप से स्पष्ट उदाहरण वह रिवायत है जिसमें मुतर्रिफ़ अपने पिता से नमाज़ में पैग़म्बर के सुनाई देने वाले रोने का वर्णन नक़्ल करते हैं। साबित अल-बुनानी से मुतर्रिफ़ से अब्दुल्लाह इब्न अश-शिख़्ख़ीर का मार्ग सुनन अबी दाऊद, सुनन अन-नसाई और मुस्नद अहमद में सुरक्षित है। यह अपने सहाबी पिता की नबवी स्मृति के विश्वसनीय संवाहक के रूप में मुतर्रिफ़ की भूमिका दिखाता है।

शास्त्रीय आलोचकों ने उनके चरित्र पर भी ज़ोर दिया। इब्न सअद ने उन्हें विश्वसनीय और फ़ज़ीलत, वरअ, बुद्धि तथा अदब वाला बताया, और अल-इजली ने भी उन्हें विश्वसनीय वरिष्ठ ताबिईन में गिना। मुतर्रिफ़ से नक़्ल एक कथन ज्ञान की अतिरिक्तता को इबादत की अतिरिक्तता से ऊपर रखता और धार्मिक जीवन में वरअ को केंद्रीय स्थान देता है।

उनकी ज़ाहिदाना प्रतिष्ठा का अर्थ समाज से अलग होना नहीं था। ग़ैलान इब्न जरीर बताते हैं कि मुतर्रिफ़ अच्छे ऊपरी वस्त्र पहनते, घोड़ों पर सवारी करते और सत्ता के लोगों से मिलते थे। वही परंपरा उन्हें हिंसक फ़ितना से गहरी सावधानी रखने वाला भी दिखाती है।

शास्त्रीय जीवनी इब्न अज़-ज़ुबैर से जुड़े संघर्ष से उनके हटने, इब्न अल-अशअथ की बग़ावत में शामिल होने से इनकार और हरूरिय्या भर्ती अस्वीकार करने की रिवायतें सुरक्षित करती है। ये रिपोर्टें आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत थोपने के बजाय हिंसक आंतरिक संघर्ष में जानबूझकर गैर-भागीदारी की तस्वीर समर्थन करती हैं।

इब्न सअद मुतर्रिफ़ के विवाह का सीधा उल्लेख करते हैं और महर की मात्रा के अलग-अलग प्रसारित रूप सुरक्षित रखते हैं। इब्न सअद और अल-मिज़्ज़ी उनके पुत्र अब्दुल्लाह इब्न मुतर्रिफ़, अबू जुज़, को भी पहचानते हैं, जो अबू बरज़ा अल-अस्लमी से रिवायत करते थे और अपने पिता से पहले उनकी मृत्यु हुई।

अन्य पारिवारिक रिवायतें मुतर्रिफ़ की संतति की निरंतरता दिखाती हैं। अहमद इब्न हनबल की किताब अज़-ज़ुह्द उनके एक वंशज के माध्यम से दफ़्न का वृत्तांत सुरक्षित करती है, जबकि इब्न हजर उनकी एक बेटी की ओर से एक नातिन का उल्लेख करते हैं।

बेहतर समर्थित असाधारण रिवायतों में एक उस व्यक्ति से संबंधित है जिसने मुतर्रिफ़ पर झूठा आरोप लगाया या उनके बारे में झूठ कहा। हमीद इब्न हिलाल के माध्यम से शास्त्रीय मार्ग कहता है कि मुतर्रिफ़ ने शर्त के साथ उसके विरुद्ध दुआ की और वह व्यक्ति फिर मर गया। रिपोर्ट अल-मिज़्ज़ी और अबू नुऐम के यहाँ सुरक्षित है और इब्न हजर कहते हैं कि इब्न अबी अद-दुन्या की मुजाबी अद-दअवा में उसका मार्ग हसन है। इसलिए इसे अर्थपूर्ण सनदी समर्थन वाली शास्त्रीय करामत कहना चाहिए, न नबवी हदीस।

दूसरा प्रसंग अल-मुवर्रिक़ अल-इजली से जुड़ा है। इब्न सअद सुलेमान इब्न हरब, हम्माद इब्न ज़ैद और ग़ैलान इब्न जरीर का मार्ग सुरक्षित करते हैं कि अल-हज्जाज ने अल-मुवर्रिक़ को क़ैद किया; मुतर्रिफ़ ने पूछा क्या हुआ, फिर उन्होंने और अन्य लोगों ने दुआ की, और वह उसी शाम रिहा हो गया। यह अलग घटना है और मुतर्रिफ़ के क़ैद भतीजे वाली रिपोर्ट में नहीं मिलनी चाहिए।

तीसरा बड़ा असाधारण विषय अँधेरी यात्रा में मुतर्रिफ़ के कोड़े के सिरे से जुड़ी रोशनी है। अबू नुऐम अब्द अर-रज़्ज़ाक़, मअमर और क़तादा के माध्यम से एक रूप सुरक्षित करते हैं, जबकि दूसरे मार्ग भतीजे, सेवक या बेटे का उल्लेख करते हैं। अनेक गवाहियाँ महत्वपूर्ण शास्त्रीय ग्रहण दिखाती हैं, पर शब्द भिन्न हैं और सभी को एक समान हदीसी दर्जा नहीं मिला। सबसे सुरक्षित वर्णन कई मार्गों वाली शास्त्रीय करामत परंपरा है जिसकी दर्जाबंदी एकरूप नहीं।

शास्त्रीय स्रोत मुतर्रिफ़ की मृत्यु के लिए कई तारीख़ें सुरक्षित करते हैं। अम्र इब्न अली और अत-तिर्मिज़ी ९५ हिजरी बताते हैं, ख़लीफ़ा इब्न ख़य्यात से ८६ हिजरी प्रसारित है और कुछ दूसरी रिवायतें उनकी मृत्यु को लगभग ८७ हिजरी के ताऊन अल-जारिफ़ से जोड़ती हैं। इब्न हजर इब्न सअद के एक कथन की ऐसी व्याख्या करते हैं जो ९५ हिजरी से मेल खाती है।

मुतर्रिफ़ के दफ़्न के बारे में एक बहुत व्यक्तिगत प्राचीन रिवायत सुरक्षित है। अहमद इब्न हनबल की किताब अज़-ज़ुह्द में उनके एक वंशज से वर्णित है कि मुतर्रिफ़ ने अपने घर में अपने लिए क़ब्र खोदी, जीवन में उसमें जाकर क़ुरआन पढ़ते थे और मृत्यु के बाद उसी में दफ़्न किए गए। इब्न असाकिर अलग से बसराह से कुछ दिनों की दूरी पर बदिया के अस-सुख़ैरी में मुतर्रिफ़ के एक निवास का उल्लेख करते हैं।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह ऐतिहासिक रूप से एक प्रमुख वरिष्ठ बसरी ताबिई के रूप में महत्वपूर्ण हैं जिन्होंने सहाबा-युग की रिवायत को बसराह की उभरती विद्वत्तापूर्ण संस्कृति से जोड़ा। उनके पिता सहाबी थे, शिक्षकों में कई अन्य सहाबा शामिल थे, और बड़े बसरी रावियों के विस्तृत समूह ने उनसे सीखा। छह मुख्य हदीस संग्रहों में उनकी उपस्थिति दिखाती है कि उनका महत्व ठोस रिवायत रिकॉर्ड पर आधारित है, केवल बाद की भक्तिपरक प्रसिद्धि पर नहीं।

उनकी नैतिक प्रोफ़ाइल शुरुआती बसरी धार्मिकता का ऐसा रूप भी सुरक्षित करती है जिसमें ज्ञान, वरअ, इबादत और सामान्य सामाजिक भागीदारी जुड़े रहे। अच्छे कपड़े पहनने, सवारी करने और अधिकारियों से मिलने की रिवायतें हिंसक फ़ितना में भाग न लेने के मज़बूत प्रमाणों के साथ खड़ी हैं। यह मेल शुरुआती ज़ाहिदाना अनुशासन को केवल सामाजिक अलगाव से अलग करता है।

मुतर्रिफ़ के पारिवारिक प्रमाण भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इब्न सअद उनके विवाह का उल्लेख सुरक्षित करते हैं, अब्दुल्लाह इब्न मुतर्रिफ़ एक नामित पुत्र के रूप में मज़बूती से स्थापित हैं और एक बाद के वंशज तथा बेटी की ओर से नातिन की रिवायतें व्यापक पारिवारिक शाखा दिखाती हैं।

तीन असाधारण घटना-परंपराएँ दर्जाबंदी वाली प्रस्तुति का महत्व भी दिखाती हैं। झूठे आरोप लगाने वाले के विरुद्ध दुआ के पास अर्थपूर्ण शास्त्रीय समर्थन और बाद की हसन सनद की राय है; अल-मुवर्रिक़ रिहाई घटना का अपना अलग शुरुआती मार्ग है; और कोड़े की रोशनी कई मार्गों में सुरक्षित है जिनके शब्द और दर्जे अलग हैं। इन रिपोर्टों को अलग रखना मुतर्रिफ़ की भक्तिपरक स्मृति और वास्तविक प्रमाण-क्रम दोनों को सुरक्षित रखता है।

उनकी दफ़्न-परंपरा मुतर्रिफ़ की निजी इबादत और घरेलू धार्मिक जीवन का एक बहुत निकट प्राचीन चित्र सुरक्षित करती है। अपने घर में क़ब्र तैयार करना, जीवन में उसमें जाकर क़ुरआन पढ़ना और मृत्यु के बाद उसी स्थान पर दफ़्न होना उनकी जीवनी में मौत की याद और क़ुरआन से लगाव का बहुत प्रमुख विषय है। इब्न असाकिर अस-सुख़ैरी में उनके एक निवास का अलग ऐतिहासिक उल्लेख भी सुरक्षित करते हैं।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

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Al-Bidaya wa al-Nihaya | Ibn Kathir | vol. 9, Mutarrif ibn Abd Allah biography | https://ar.wikisource.org/wiki/البداية_والنهاية/الجزء_التاسع/مطرف_بن_عبد_الله_بن_الشخير | वरिष्ठ ताबिई दर्जा, कथन और दुआ की स्वीकृति की प्रतिष्ठा का बाद का शास्त्रीय समेकन
Project Central Registry Snapshot | current PERSON / miracle-candidate database | checked 2026-09-09 | internal Library corpus | संरक्षित केंद्रीय पहचान; पिता या नामित बेटे का सुरक्षित केंद्रीय कोड नहीं; पुरानी ग़लत चमत्कार मिलान अस्वीकृत

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