तमीम अद-दारी रज़ियल्लाहु अन्हु द्वारा हर्रा की आग को पीछे लौटाने की रिवायत

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क्लासिकी सुन्नी स्रोत एक रिवायत सुरक्षित रखते हैं कि उमर बिन अल-खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु की खिलाफत में हर्रा में आग निकली और तमीम अद-दारी रज़ियल्लाहु अन्हु से उसका सामना करने को कहा गया। सबसे विस्तृत सनद में तमीम ने आग को हाथ से पीछे धकेला या हाँका, यहाँ तक कि वह घाटी, गुफा या अपने निकलने की जगह में चली गई, जबकि उमर कहते रहे कि देखने वाला न देखने वाले जैसा नहीं। बैहकी और लालकाई मुख्य सनद देते हैं और अबू नुऐम चादर वाली छोटी रिवायत देते हैं। लेकिन ज़हबी मुख्य सनद के मुआविया बिन हरमल को अज्ञात बताते हैं और कोई स्वतंत्र मज़बूत सही सनद नहीं मिली।

उमर बिन अल-खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु की खिलाफत से जुड़ी एक क्लासिकी रिवायत हर्रा में आग निकलने का वर्णन करती है। घटना को इतना गंभीर बताया गया है कि उमर ने तमीम अद-दारी रज़ियल्लाहु अन्हु को बुलाया और उनसे आग का सामना करने को कहा। इसके बाद रिवायत तमीम के काम को कहानी का असाधारण केंद्र बनाती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता को सनद की सीमाओं से अलग नहीं किया जा सकता।

बैहकी और लालकाई के पास सुरक्षित विस्तृत रूप में तमीम रज़ियल्लाहु अन्हु आग के पास जाते हैं और उसे हाथ से पीछे धकेलते या हाँकते हैं। आग पीछे हटती रहती है, यहाँ तक कि किसी घाटी, गुफा या उसी जगह में चली जाती है जहाँ से वह निकली थी। इसी दौरान उमर से यह बात दोहराने का उल्लेख है कि देखने वाला उस व्यक्ति जैसा नहीं जो नहीं देखता, अर्थात रिवायत उन्हें प्रत्यक्ष दृश्य का गवाह दिखाती है।

मुख्य सनद अफ्फान, हम्माद बिन सलमा, सईद अल-जरीरी, अबू अल-अला और मुआविया बिन हरमल के माध्यम से आती है। लालकाई इसी घटना को तमीम अद-दारी की करामात के अध्याय में रखते हैं, जबकि बैहकी इसे अपनी संबंधित क्लासिकी रचना में सुरक्षित करते हैं। ये स्थान बताते हैं कि इस घटना को तमीम से जुड़ी असाधारण घटना के रूप में क्लासिकी स्वीकार्यता मिली, लेकिन यह अपने आप सनद को सही साबित नहीं करता।

अबू नुऐम दमरा से मरज़ूक के माध्यम से एक छोटी समानांतर रिवायत देते हैं। उसमें तमीम अपनी चादर से आग को पीछे धकेलते हैं, यहाँ तक कि वह एक गुफा में चली जाती है। यह संबंधित रूप है, पर चादर की बात को हाथ वाली रिवायत में चुपचाप नहीं जोड़ना चाहिए और न इसे स्वतंत्र सही पुष्टि मानना चाहिए। हर विशेष विवरण अपने मार्ग के साथ ही रहना चाहिए।

मुख्य सावधानी ज़हबी की टिप्पणी से आती है, जो मुआविया बिन हरमल को अज्ञात बताते हैं। पहले शोध चरण में वैकल्पिक मार्ग भी ऐसी स्वतंत्र मज़बूत सनद नहीं देता जो मूल समस्या दूर कर सके। इसलिए कई क्लासिकी पुस्तकों में रिवायत का होना उसके प्रचलन को दिखाता है, लेकिन प्रसारण की अनिश्चितता समाप्त नहीं करता और घटना को निश्चित ऐतिहासिक तथ्य नहीं बनाता।

सबसे सावधान निष्कर्ष यह है कि क्लासिकी सुन्नी स्रोत तमीम अद-दारी रज़ियल्लाहु अन्हु के हर्रा की आग का सामना करने और उसे पीछे लौटाने की रिवायत सुरक्षित रखते हैं, और बाद के लेखकों ने इसे करामत के रूप में लिया। जाँची गई सनदों में महत्त्वपूर्ण कमजोरी या अनिश्चितता रहने के कारण इसे कम भरोसे की वर्णित सहाबी करामत और संपादकीय समीक्षा की ज़रूरत वाले पाठ के रूप में रखना उचित है।

निष्कर्ष

क्लासिकी सुन्नी स्रोत बताते हैं कि तमीम अद-दारी रज़ियल्लाहु अन्हु ने हर्रा की आग का सामना किया और उसे पीछे लौटाया, यहाँ तक कि वह घाटी, गुफा या अपने निकलने की जगह में चली गई। सभी जाँची गई सनदों में महत्त्वपूर्ण अनिश्चितता रहने के कारण इसे कम भरोसे की वर्णित सहाबी करामत और संपादकीय समीक्षा योग्य पाठ के रूप में रखना चाहिए।

स्रोत

al-Lalaka'i, report 113 / 2435
al-Bayhaqi, Dala'il al-Nubuwwa
al-Dhahabi, Siyar A'lam al-Nubala, Tamim al-Dari entry
al-Bayhaqi route: Affan -> Hammad ibn Salama -> Sa'id al-Jariri -> Abu al-Ala -> Muawiya ibn Harmal
al-Lalaka'i, Karamat Tamim al-Dari
Abu Nu'aym, Dala'il al-Nubuwwa, report 533
al-Dhahabi, Siyar A'lam al-Nubala, Tamim entry
al-Dhahabi, Tarikh al-Islam, Tamim material
CAND-0136 Task 1 synthesis
al-Bayhaqi, Dala'il al-Nubuwwa, Tamim al-Dari fire report