उमर बिन अली

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उमर इब्न अली, जिन्हें उमर अल-अतरफ़ कहा जाता है, इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम और उम्म हबीब अल-सहबा अत-तग़लिबिय्या के पुत्र तथा रुक़य्या बिन्त अली के जुड़वाँ भाई थे। स्रोत उन्हें ताबिई, हदीस के रावी और एक स्थायी अलवी शाखा के पूर्वज के रूप में याद करते हैं, लेकिन करबला में उनकी उपस्थिति, मृत्यु का समय और दफ़न स्थान विवादित हैं।
जन्म

पहली हिजरी सदी में रुक़य्या बिन्त अली के जुड़वाँ भाई के रूप में जन्म हुआ; सही वर्ष सुरक्षित नहीं है।

निधन

रिवायतें ६७ हिजरी में मारे जाने, ७५ या ७७ वर्ष की आयु में यनबू में मृत्यु, और ८५ वर्ष की आयु के बीच भिन्न हैं; कोई एक तिथि निश्चित नहीं है।

दफ़न या संबद्ध स्थान

एक प्रमुख वंशावली रिवायत के अनुसार उमर इब्न अली अलैहिस्सलाम करबला के बाद लंबे समय तक जीवित रहे, मदीना मुनव्वरा के निकट समुद्री नगर यनबू चले गए, वहीं अंतिम वर्ष बिताए, लगभग ७५ से ८५ वर्ष की आयु में वहीं उनका निधन हुआ और वहीं दफ़्न किए गए। इसलिए दफ़्न स्थान के विषय में यनबू की रिवायत अधिक प्रमुख है, हालाँकि अलग और लगातार दस्तावेज़ित क़ब्र की निश्चित पहचान उपलब्ध नहीं है।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

वंशावली स्रोत उमर इब्न अली को सामान्यतः उमर अल-अतरफ़, उमर अल-अकबर और अबू अल-क़ासिम कहते हैं, जबकि कुछ रिवायतों में अबू हफ़्स भी मिलता है। मिज़्ज़ी ने «तहज़ीब अल-कमाल», खंड २१, जीवनी ४२८९ में उन्हें इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम का पुत्र बताया और उनकी माता को अल-सहबा बिन्त रबीआ या बिन्त अब्बाद, अर्थात उम्म हबीब अत-तग़लिबिय्या, लिखा। मुसअब अज़-ज़ुबैरी के हवाले से उन्हें रुक़य्या बिन्त अली का जुड़वाँ भाई और इमाम अली अलैहिस्सलाम की अंतिम संतानों में गिना गया है।

उनकी माता उम्म हबीब अल-सहबा बनी तग़लिब से थीं। कुछ वंशावली रिवायतें उनकी क़ैद को ऐन अत-तम्र से जोड़ती हैं, जबकि कुछ यमामा का उल्लेख करती हैं। इसे मूल पहचान पर संदेह के बजाय भौगोलिक रिवायतों का अंतर समझना चाहिए, क्योंकि अनेक जीवनी और वंश स्रोत उम्म हबीब अल-सहबा तथा उमर और रुक़य्या के जुड़वाँ जन्म पर सहमत हैं।

«तहज़ीब अल-कमाल», खंड २१, पृष्ठ ४६९–४७० के अनुसार उमर ने अपने पिता इमाम अली अलैहिस्सलाम से रिवायत की। उनके पुत्र मुहम्मद, उबैदुल्लाह और अली, तथा अबू ज़ुरआ अम्र इब्न जाबिर अल-हद्रमी ने उनसे रिवायत की। इब्न सअद के हवाले से मिज़्ज़ी उन्हें मदीना के आरंभिक ताबिई वर्ग में रखते हैं और लिखते हैं कि उनकी संतानों में कई रावी थे। इजली ने भी उन्हें भरोसेमंद ताबिई कहा, इसलिए उनका महत्व केवल वंश तक सीमित नहीं बल्कि हदीसी परंपरा से भी जुड़ा है।

इब्न इनबा ने «उमदत अत-तालिब», खंड १, पृष्ठ ३६१ में उन्हें वाक्पटु, उदार, पवित्र और सम्मानित बताया है। वही पृष्ठ एक बाद की वंशावली कथा सुरक्षित करता है जिसमें अकाल के समय उन्होंने बनी हाशिम से विरोध रखने वाले व्यक्ति को नम्र संवाद से समझाया, अपनी यात्रा सामग्री और वस्त्रों का बड़ा भाग बाँट दिया और आगे भी उसके साथ भलाई जारी रखी। इसे एक बाद के वंश लेखक द्वारा संरक्षित नैतिक रिवायत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, समकालीन स्वतंत्र प्रमाण के रूप में नहीं।

करबला के विषय में मुख्य सावधानी यह है कि कुछ बाद की मक़तल पुस्तकों में उमर इब्न अली नामक शहीद का उल्लेख है, जबकि वंश स्रोत उमर अल-अतरफ़ को करबला के बाद जीवित रखते हैं। «सिर्र अस-सिलसिला अल-अलविय्या», खंड १, पृष्ठ ९६–९७, और «उमदत अत-तालिब», खंड १, पृष्ठ ३६२ स्पष्ट कहते हैं कि वह इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के साथ इराक़ नहीं गए और बाद के राजनीतिक काल तक जीवित रहे। इसलिए बाद की सूचियों के शहीद उमर को इस जीवनी के उमर अल-अतरफ़ से स्वतः एक मानना ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित नहीं है।

बाद के जीवन की रिवायतें उनके नाम को अब्दुल्लाह इब्न अज़-ज़ुबैर, हज्जाज इब्न यूसुफ़ और इमाम ज़ैन अल-आबिदीन अलैहिस्सलाम के समय से जोड़ती हैं। «सिर्र अस-सिलसिला अल-अलविय्या», पृष्ठ ९७, और «उमदत अत-तालिब», पृष्ठ ३६२ राजनीतिक बैअत और अलवी सदक़ा संपत्तियों की देखरेख से जुड़ी खबरें देते हैं। चूँकि ये बाद के वंश और जीवनी स्रोतों से आई हैं, इन्हें पूर्ण राजनीतिक जीवन के बजाय प्रेषित ऐतिहासिक रिवायतों के रूप में रखना अधिक उचित है।

इब्न सअद की सूचना में उनके बच्चों के रूप में मुहम्मद, उम्म मूसा और उम्म हबीब के नाम हैं और उनकी माता अस्मा बिन्त अक़ील इब्न अबी तालिब बताई गई हैं। «सिर्र अस-सिलसिला अल-अलविय्या», पृष्ठ ९७, के अनुसार उमर अल-अतरफ़ की स्थायी वंश परंपरा मुख्यतः उनके पुत्र मुहम्मद से चली। इब्न इनबा भी उन्हें इमाम अली अलैहिस्सलाम के उन पाँच पुत्रों में गिनते हैं जिनसे वंश आगे बढ़ा, इसलिए अलवी वंश इतिहास में उनका स्थान स्पष्ट है।

उनकी मृत्यु की रिवायतें एक समान नहीं हैं। «तहज़ीब अल-कमाल» इब्न हिब्बान और ख़लीफ़ा इब्न ख़य्यात से ६७ हिजरी में मुसअब इब्न अज़-ज़ुबैर के साथ मारे जाने की खबर देता है, जबकि «उमदत अत-तालिब», पृष्ठ ३६२, ७५ या ७७ वर्ष की आयु में यनबू में मृत्यु बताता है और «सिर्र अस-सिलसिला अल-अलविय्या» ८५ वर्ष की आयु की रिवायत भी रखता है। इसलिए किसी एक वर्ष को निश्चित नहीं कहा गया। दफ़न की सबसे प्रमुख रिवायत यनबू की है, पर अलग और निरंतर प्रमाणित क़ब्र निश्चित रूप से पहचानी नहीं गई है. इन मतभेदों के बावजूद, एक प्रमुख वंशावली रिवायत के अनुसार उमर इब्न अली अलैहिस्सलाम करबला में शहीद नहीं हुए। इस रिवायत के अनुसार वह करबला के बाद लंबे समय तक जीवित रहे, मदीना मुनव्वरा के निकट समुद्री नगर यनबू चले गए, वहीं जीवन के अंतिम वर्ष बिताए, लगभग ७५ से ८५ वर्ष की आयु में वहीं उनका निधन हुआ और वहीं दफ़्न किए गए।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

उमर अल-अतरफ़ का ऐतिहासिक महत्व एक बड़े गैर-फ़ातिमी अलवी वंश की जड़ होने में है। «उमदत अत-तालिब» उन्हें इमाम अली अलैहिस्सलाम के उन पुत्रों में गिनता है जिनसे वंश चला और «सिर्र अस-सिलसिला अल-अलविय्या» उनके पुत्र मुहम्मद से फैली उमरी शाखा का विवरण देता है।

हदीसी स्रोत उन्हें ताबिई रावी के रूप में याद करते हैं जिन्होंने इमाम अली अलैहिस्सलाम से रिवायत की और जिनसे उनके पुत्रों तथा अन्य रावियों ने रिवायत की। इस कारण वह केवल वंशावली का नाम नहीं रहते बल्कि पहली इस्लामी सदी की ज्ञान परंपरा से भी जुड़े हैं।

उनकी जीवनी ऐतिहासिक भेद की आवश्यकता भी दिखाती है। करबला, मृत्यु के समय और दफ़न पर स्रोतों में मतभेद है, इसलिए उमर अल-अतरफ़ को उमर अल-अशरफ़ और मक़तल साहित्य के दूसरे समान नाम वाले व्यक्तियों से अलग रखना आवश्यक है, साथ ही अहल अल-बैत से उनका संबंध सम्मानपूर्वक सुरक्षित रहना चाहिए।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

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Maqtal Ali ibn Abi Talib | Ibn Abi al-Dunya | Reports 127-128 in the displayed text; pagination varies by edition | https://arabic-keyboard.info/books/ar/read-book/%D9%85%D9%82%D8%AA%D9%84-%D8%B9%D9%84%D9%8A-%D9%84%D8%A7%D8%A8%D9%86-%D8%A3%D8%A8%D9%8A-%D8%A7%D9%84%D8%AF%D9%86%D9%8A%D8%A7 | Umar alive after Karbala, inheritance context, and Ubayd Allah named as the brother killed with Mus'ab ibn al-Zubayr
Sirr al-Silsila al-Alawiyya | Sahl ibn Abd Allah al-Bukhari | Volume 1, page 97 | https://lib.eshia.ir/10871/1/97 | explicit rejection of Umar al-Atraf's attendance at Karbala, later political notices, and descendants through Muhammad
Umdat al-Talib fi Ansab Aal Abi Talib | Ibn Inaba | Chapter on descendants of Umar al-Atraf, displayed page 337 | https://www.masaha.org/book/view/2302/page/337 | non-participation at Karbala, death at Yanbu aged 75 or 77, and continuing descendants
Al-Tabaqat al-Kubra | Ibn Sa'd | Volume 5, Umar al-Akbar ibn Ali entry in the displayed edition | https://read.shamela.ws/book/9351/2003 | mother, children Muhammad, Umm Musa and Umm Habib, their mother Asma bint Aqil, and hadith transmission

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