अल-अला इब्न अल-हद्रमी रज़ियल्लाहु अन्हु और पानी के असाधारण पारगमन की रिवायत

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शास्त्रीय स्रोतों में सहाबी अल-अला इब्न अल-हद्रमी रज़ियल्लाहु अन्हु और उनके साथियों के बारे में एक उल्लेखनीय रिवायत सुरक्षित है, जो बहरीन से जुड़े एक सफर से संबंधित है। जब पानी ने आगे का रास्ता रोक दिया, तो रिवायतें नमाज़, दुआ और अल्लाह का नाम लेकर बढ़ने के आदेश का वर्णन करती हैं। इसके बाद समूह ने पानी पार किया और बयान में है कि उनके पैर तथा सवारियों के खुर नहीं भीगे। इसे सहाबी की वर्णित करामत के रूप में सावधानी के साथ प्रकाशित किया जा सकता है, क्योंकि उपलब्ध सनदों में महत्वपूर्ण कमज़ोरियाँ मौजूद हैं।

अल-अला इब्न अल-हद्रमी रज़ियल्लाहु अन्हु उन सहाबा में थे जिन्हें बहरीन से संबंधित महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ दी गई थीं। शास्त्रीय पुस्तकों में उनके सफर और अभियानों से जुड़ी एक असाधारण रिवायत सुरक्षित है। अल-लालकाई की विस्तृत रिवायत में साथियों का समूह कठिन रास्ता तय करने के बाद ऐसे पानी के सामने पहुँचता है जो आगे बढ़ने में बाधा बन जाता है। उनके पास पार जाने के लिए नावें नहीं होतीं। इस कठिन स्थिति में रिवायत अल-अला रज़ियल्लाहु अन्हु को किसी स्वतंत्र शक्ति का स्वामी नहीं बताती, बल्कि उन्हें नमाज़ और दुआ के माध्यम से अल्लाह की ओर रुख करते हुए दिखाती है।

रिवायत के अनुसार उन्होंने दो रकअत नमाज़ पढ़ी और अल्लाह से प्रार्थना की कि उनके लिए पार जाने का रास्ता आसान कर दे। फिर उन्होंने अपनी सवारी की लगाम थामी और साथियों को आदेश दिया कि अल्लाह का नाम लेकर आगे बढ़ें। यहीं कहानी अपने मुख्य दृश्य तक पहुँचती है। समूह पानी में प्रवेश करता है और दूसरी ओर निकल जाता है। अल-लालकाई की विस्तृत अभिव्यक्ति में आता है कि लोगों के पैर, ऊँटों के खुर और दूसरी सवारियों के खुर तक नहीं भीगे। पार पहुँचने के बाद अल-अला रज़ियल्लाहु अन्हु ने पूछा कि क्या किसी की कोई वस्तु खो गई है, और बयान के अनुसार कुछ भी नहीं खोया था। स्रोत पानी की निश्चित गहराई, चौड़ाई या पारगमन की कोई भौतिक प्रक्रिया तय नहीं करता।

अबू नुऐम ने अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से इसी घटना की एक छोटी समानांतर रिवायत भी सुरक्षित की है। उसमें बताया गया है कि समुद्र के किनारे पहुँचने पर अल-अला ने साथियों से कहा कि अल्लाह का नाम लें और पानी में प्रवेश करें। वे पार हो गए और पानी उनके ऊँटों के खुरों के निचले भाग को भी नहीं भिगो सका। अल-तबरानी ने भी अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु के माध्यम से इसी मूल दृश्य को बयान किया है। इन रास्तों में साझा बात स्पष्ट रहती है: सामने पानी की रुकावट, अल्लाह पर भरोसा, उसके नाम के साथ आगे बढ़ने का आदेश और फिर असाधारण रूप से पार हो जाना।

फिर भी सनद की स्थिति को छिपाना उचित नहीं होगा। अल-लालकाई की विस्तृत सनद में अदी इब्न अल-फ़ज़्ल हैं, जिन्हें बड़े हदीस आलोचकों ने बहुत कमज़ोर या मतरूक कहा है। अल-तबरानी की समानांतर रिवायत के बारे में अल-हैसमी ने इब्राहीम इब्न मुअम्मर अल-हरवी को अपने लिए अज्ञात बताया, जबकि बाकी रावियों को विश्वसनीय कहा। इसलिए इस घटना को बिना किसी शर्त के सहीह रिवायत कहना उचित नहीं है। अधिक संतुलित प्रस्तुति यह है कि इसे शास्त्रीय स्रोतों में सुरक्षित सहाबी की एक वर्णित करामत के रूप में बताया जाए, जिसमें दुआ और तवक्कुल का अर्थ स्पष्ट हो और सनद की सीमाएँ भी ईमानदारी से सामने रखी जाएँ।

निष्कर्ष

शास्त्रीय रिवायतें अल-अला इब्न अल-हद्रमी रज़ियल्लाहु अन्हु को अल्लाह से दुआ करते और अपने साथियों को उसका नाम लेकर पानी पार कराने के लिए आगे बढ़ाते हुए याद करती हैं। यह सहाबी की वर्णित करामत के रूप में अर्थपूर्ण घटना है, जबकि जिम्मेदार प्रस्तुति में इसकी सनदों की सीमाएँ भी स्पष्ट रहनी चाहिए।

स्रोत

Al-Lalaka'i, Sharh Usul I'tiqad Ahl al-Sunnah wa al-Jama'ah, Karamat al-Awliya, local report 107 / global 2429

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Abu Nu'aym, Dala'il al-Nubuwwah 521

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Al-Tabarani, al-Mu'jam al-Kabir 167; al-Haythami, Majma' al-Zawa'id 9/379

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