उम्म हबीब बिन्त उमर अल-अतरफ़

PER-000194 परिवार का सदस्य पुष्ट दफ़न स्थान अज्ञात विभिन्न स्रोत-परंपराओं से समर्थित
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उम्म हबीब बिन्त उमर अल-अतरफ़ एक अलवी महिला थीं जिन्हें शास्त्रीय वंश-स्रोत उमर इब्न अली इब्न अबी तालिब और अस्मा बिन्त अक़ील इब्न अबी तालिब की पुत्री बताते हैं। उनका विवाह हुसैन अल-असरम इब्न हसन इब्न अली से हुआ और वह अली अल-असग़र तथा फ़ातिमा की माता थीं। फ़ातिमा के माध्यम से वंश-अभिलेख उन्हें इमाम जाफ़र सादिक़ के परिवार और उनके पुत्रों इस्माइल तथा अब्दुल्लाह से जोड़ता है। उनकी स्वतंत्र विश्वसनीय जीवनी, ठीक तिथियाँ या सत्यापित दफ़नगाह सुरक्षित नहीं है, इसलिए परिचय मज़बूत पारिवारिक प्रमाण तक सीमित है।
जन्म

उनकी ठीक जन्मतिथि और जन्मस्थान सुरक्षित नहीं हैं। शास्त्रीय वंश-स्रोत उन्हें उमर अल-अतरफ़ और अस्मा बिन्त अक़ील की पुत्री बताते हैं।

निधन

उनकी मृत्यु की तिथि, स्थान और परिस्थितियाँ उपलब्ध शास्त्रीय स्रोतों में भरोसेमंद रूप से सुरक्षित नहीं हैं।

दफ़न या संबद्ध स्थान

उनकी दफ़नगाह अज्ञात है। उपलब्ध प्रमाण से उनकी कोई अलग सत्यापित क़ब्र, मज़ार या स्थान निश्चित नहीं किया जा सकता।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

लुबाब अल-अंसाब उम्म हबीब को उमर इब्न अली, जिन्हें उमर अल-अतरफ़ कहा जाता है, की पुत्री बताती है; वह इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम के पुत्र थे। वही स्रोत उनकी माता को अस्मा बिन्त अक़ील इब्न अबी तालिब बताता और उम्म हबीब को मुहम्मद, इस्माइल और उम्म मूसा के साथ उसी विवाह की संतानों में रखता है। इससे उनका स्थान उमर अल-अतरफ़ की अलवी शाखा और मातृ पक्ष के अक़ीली परिवार दोनों में स्थापित होता है।

वंश-स्रोत कहते हैं कि उनका विवाह हुसैन इब्न हसन इब्न अली से हुआ, जिन्हें उसी पारिवारिक परंपरा में हुसैन अल-असरम, इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम के पुत्र, कहा गया है। इसलिए प्रशासनिक अभिलेख का सुरक्षित पति-संबंध शास्त्रीय विवरण से मेल खाता है। केंद्रित जाँच में इस मौजूदा पुष्ट संबंध के विरुद्ध कोई भरोसेमंद प्रमाण नहीं मिला और सुरक्षित पति-खाने बदले नहीं गए।

इस विवाह से दो संतानों का निरंतर उल्लेख मिलता है: अली इब्न हुसैन, जिन्हें अली अल-असग़र भी कहा गया, और फ़ातिमा बिन्त हुसैन। इब्न सअद भी अली और फ़ातिमा का नाम लेकर उनकी माता उम्म हबीब बिन्त उमर इब्न अली बताते हैं। अलग वंश-परंपराओं की यह समानता विवाह और मातृत्व के लिए मज़बूत आधार देती है, बिना घराने के असमर्थित विवरण जोड़ने के।

फ़िरक़ अल-शिया फ़ातिमा बिन्त हुसैन की मातृ वंश-रेखा सुरक्षित करती है और उम्म हबीब को उनकी माता तथा अस्मा बिन्त अक़ील को नानी बताती है। उसी स्रोत में फ़ातिमा को इमाम जाफ़र सादिक़ के पुत्रों इस्माइल और अब्दुल्लाह की माता कहा गया है। इस तरह उम्म हबीब उमर अल-अतरफ़ की अलवी शाखा, हसनी परिवार और बाद के जाफ़री घराने के बीच प्रमाणित वंशीय स्थान रखती हैं।

उपलब्ध स्रोत उम्म हबीब की ठीक जन्मतिथि और जन्मस्थान, शिक्षा, निजी गतिविधियाँ, मृत्यु की तिथि और परिस्थिति या व्यक्तिगत क़ब्र सुरक्षित नहीं रखते। प्रारंभिक पारिवारिक सूचियों से ज्ञात अनेक महिलाओं के बारे में यही स्थिति है। जिम्मेदार परिचय सिद्ध वंश, विवाह और संतानों को रखता है, लेकिन बिना प्रमाण के निजी समयक्रम और मज़ार-दावे खाली छोड़ता है।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

उम्म हबीब का ऐतिहासिक महत्त्व मुख्यतः वंशीय है। उनके विवाह ने उमर अल-अतरफ़ की संतान को हुसैन अल-असरम के माध्यम से हसनी शाखा से जोड़ा और उनकी संतानों ने बाद के अलवी पारिवारिक इतिहास में इस संबंध को सुरक्षित रखा।

उनकी पुत्री फ़ातिमा का इमाम जाफ़र सादिक़ के घराने में स्थान उम्म हबीब को इस्माइल और अब्दुल्लाह इब्न जाफ़र की सुरक्षित वंश-रेखा में अतिरिक्त भूमिका देता है। उनका परिचय सावधान ऐतिहासिक पुनर्निर्माण का उदाहरण है: पारिवारिक संबंध मज़बूत हैं, लेकिन व्यक्तिगत जीवन की बातें अज्ञात हैं।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

Lubab al-Ansab wa-l-Alqab wa-l-Aqab | Abu al-Hasan al-Bayhaqi | Vol. 1, p. 23 | https://lib.eshia.ir/40513/1/23 | Umm Habib as daughter of Umar al-Atraf and Asma bint Aqil; marriage to Husayn ibn Hasan; children Ali and Fatima
Lubab al-Ansab wa-l-Alqab wa-l-Aqab | Abu al-Hasan al-Bayhaqi | Vol. 1, p. 28 | https://shamela.ws/book/355/28 | Identifies Husayn ibn Hasan as Husayn al-Athram and preserves his descendant context
al-Tabaqat al-Kubra | Muhammad ibn Sa'd | Vol. 5, p. 390 in the displayed edition | https://lib.eshia.ir/40237/5/390 | Independently names Ali al-Asghar and Fatima as children whose mother was Umm Habib bint Umar ibn Ali
Firaq al-Shia | al-Hasan ibn Musa al-Nawbakhti | Vol. 1, p. 68 | https://lib.eshia.ir/10408/1/68 | Fatima bint Husayn as daughter of Umm Habib; Asma bint Aqil as maternal grandmother; Fatima as mother of Ismail and Abd Allah ibn Ja'far

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