उल्लिखित आरंभिक स्रोतों में उनकी सही जन्म-तिथि सिद्ध नहीं है। मदीनी संबोधन और पारिवारिक वातावरण के आधार पर मदीना जन्म और पालन-पोषण का सबसे संभावित स्थान है, लेकिन यह सावधान ऐतिहासिक अनुमान है, निश्चित जन्म-अभिलेख नहीं।
हुसैन असग़र बिन अली ज़ैनुल आबिदीन
वंश शोध नोट — और देखें
इस मूल सूची में माता का व्यक्तिगत नाम दर्ज नहीं है; अज्ञात माता के लिए कोई काल्पनिक व्यक्ति नहीं बनाया गया है।
PER-000094
अहल अल-बैत
संभावित
साझा कब्रिस्तान बिंदु
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हुसैन असग़र बिन अली ज़ैनुल आबिदीन अलैहिस्सलाम मदीना में रहने वाले अहले बैत के सदस्य, इमाम अली ज़ैनुल आबिदीन अलैहिस्सलाम के पुत्र और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पौत्र थे। आरंभिक जीवनी, इमामी रावी-विवरण और सुन्नी हदीस स्रोत उन्हें एक परहेज़गार रावी के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने अपने पिता, अपनी फूफी फ़ातिमा बिन्त हुसैन और अपने भाई इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिमुस्सलाम से रिवायतें कीं। रिजाल तुसी में उनकी मृत्यु १५७ हिजरी और दफ़न बक़ी में दर्ज है, जबकि सही जन्म-तिथि और माता का व्यक्तिगत नाम निश्चित रूप से सिद्ध नहीं है।
रिजाल तुसी में हुसैन असग़र की मृत्यु १५७ हिजरी और आयु ७४ वर्ष दर्ज है। बाद के सार-स्रोतों में आयु के अलग विवरण मिलते हैं, इसलिए १५७ हिजरी को मुख्य तिथि माना गया है और आयु को निर्विवाद गणना के बजाय एक रिवायती संख्या के रूप में रखा गया है।
रिजाल तुसी के अनुसार उन्हें मदीना के बक़ी में दफ़न किया गया। यह प्रमाण बक़ी कब्रिस्तान से संबंध का समर्थन करता है, लेकिन किसी अलग सत्यापित बची हुई कब्र, इमारत या निर्देशांक वाले मज़ार को सिद्ध नहीं करता।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
हुसैन असग़र पैग़ंबर के परिवार की हुसैनी शाखा से थे। वे इमाम अली ज़ैनुल आबिदीन अलैहिस्सलाम के पुत्र और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पौत्र थे। इब्न सअद उन्हें हुसैन असग़र के नाम से लिखते हैं और पारिवारिक सूचियों में आए हुसैन अकबर से अलग पहचान देते हैं। इसलिए असग़र की उपाधि वंशावली की पहचान है; उन्हें इमाम हुसैन बिन अली अलैहिस्सलाम या बाद की पीढ़ियों के समान नाम वाले व्यक्तियों से नहीं मिलाना चाहिए।
आरंभिक स्रोत उनकी माता को उम्मे वलद बताते हैं, लेकिन ऐसा एक व्यक्तिगत नाम नहीं देते जिस पर सभी विश्वसनीय परंपराएं सहमत हों। बाद की वंशावली पुस्तकों में अलग-अलग नाम मिलते हैं, इसलिए इस विवरण में किसी एक नाम को निश्चित मातृ-पहचान नहीं बनाया गया। उनकी सही जन्म-तिथि भी मज़बूत प्रमाण के साथ सुरक्षित नहीं है। मदीनी संबोधन और उनसे जुड़ी रिवायतों का वातावरण बताता है कि मदीना उनके जीवन का मुख्य केंद्र था।
शैख मुफ़ीद हुसैन बिन अली बिन हुसैन को सदाचारी और परहेज़गार बताते हैं और लिखते हैं कि उन्होंने अपने पिता, अपनी फूफी फ़ातिमा बिन्त हुसैन और अपने भाई अबू जाफ़र मुहम्मद बाक़िर अलैहिमुस्सलाम से बहुत सी रिवायतें कीं। सुन्नी रावी-विवरण भी उनके पिता, उनके भाई इमाम बाक़िर और वह्ब बिन कैसान को उनके शिक्षकों में गिनते हैं। अब्दुल्लाह बिन मुबारक, मूसा बिन उक़बा और उनके परिवार के लोग, जिनमें उनके पुत्र भी थे, उनसे रिवायत करते थे।
हदीस के आलोचकों ने उनकी रिवायती स्थिति का स्वतंत्र मूल्यांकन भी सुरक्षित रखा। इब्न हजर की तहज़ीबुत तहज़ीब में नसाई द्वारा उन्हें विश्वसनीय कहने और इब्न हिब्बान द्वारा विश्वसनीय रावियों में शामिल करने का उल्लेख है। शैख मुफ़ीद की रिवायतें उन्हें ईश्वर-भय, दुआ और इबादत में गहरी लगन रखने वाला व्यक्ति भी बताती हैं। इन आध्यात्मिक गुणों को यहां स्रोतों में आए विवरण के रूप में रखा गया है, स्वतंत्र चमत्कारी दावा बनाकर नहीं।
इब्न सअद ने उनकी कई संतानों का नाम लिखा है, जिनमें अब्दुल्लाह, उबैदुल्लाह अअरज, अली, मुहम्मद, हसन, इब्राहीम और बेटियां शामिल हैं। बाद की वंशावली पुस्तकों में हिजाज़, इराक़, शाम और अन्य क्षेत्रों के अनेक हुसैनी परिवारों को उनकी संतान से जोड़ा गया है। रिजाल तुसी के अनुसार उनकी मृत्यु १५७ हिजरी में हुई, आयु ७४ वर्ष बताई गई और उन्हें मदीना के बक़ी में दफ़न किया गया। यह कब्रिस्तान से संबंध का समर्थन करता है, लेकिन किसी अलग बची हुई कब्र या मज़ार को सिद्ध नहीं करता।
आरंभिक स्रोत उनकी माता को उम्मे वलद बताते हैं, लेकिन ऐसा एक व्यक्तिगत नाम नहीं देते जिस पर सभी विश्वसनीय परंपराएं सहमत हों। बाद की वंशावली पुस्तकों में अलग-अलग नाम मिलते हैं, इसलिए इस विवरण में किसी एक नाम को निश्चित मातृ-पहचान नहीं बनाया गया। उनकी सही जन्म-तिथि भी मज़बूत प्रमाण के साथ सुरक्षित नहीं है। मदीनी संबोधन और उनसे जुड़ी रिवायतों का वातावरण बताता है कि मदीना उनके जीवन का मुख्य केंद्र था।
शैख मुफ़ीद हुसैन बिन अली बिन हुसैन को सदाचारी और परहेज़गार बताते हैं और लिखते हैं कि उन्होंने अपने पिता, अपनी फूफी फ़ातिमा बिन्त हुसैन और अपने भाई अबू जाफ़र मुहम्मद बाक़िर अलैहिमुस्सलाम से बहुत सी रिवायतें कीं। सुन्नी रावी-विवरण भी उनके पिता, उनके भाई इमाम बाक़िर और वह्ब बिन कैसान को उनके शिक्षकों में गिनते हैं। अब्दुल्लाह बिन मुबारक, मूसा बिन उक़बा और उनके परिवार के लोग, जिनमें उनके पुत्र भी थे, उनसे रिवायत करते थे।
हदीस के आलोचकों ने उनकी रिवायती स्थिति का स्वतंत्र मूल्यांकन भी सुरक्षित रखा। इब्न हजर की तहज़ीबुत तहज़ीब में नसाई द्वारा उन्हें विश्वसनीय कहने और इब्न हिब्बान द्वारा विश्वसनीय रावियों में शामिल करने का उल्लेख है। शैख मुफ़ीद की रिवायतें उन्हें ईश्वर-भय, दुआ और इबादत में गहरी लगन रखने वाला व्यक्ति भी बताती हैं। इन आध्यात्मिक गुणों को यहां स्रोतों में आए विवरण के रूप में रखा गया है, स्वतंत्र चमत्कारी दावा बनाकर नहीं।
इब्न सअद ने उनकी कई संतानों का नाम लिखा है, जिनमें अब्दुल्लाह, उबैदुल्लाह अअरज, अली, मुहम्मद, हसन, इब्राहीम और बेटियां शामिल हैं। बाद की वंशावली पुस्तकों में हिजाज़, इराक़, शाम और अन्य क्षेत्रों के अनेक हुसैनी परिवारों को उनकी संतान से जोड़ा गया है। रिजाल तुसी के अनुसार उनकी मृत्यु १५७ हिजरी में हुई, आयु ७४ वर्ष बताई गई और उन्हें मदीना के बक़ी में दफ़न किया गया। यह कब्रिस्तान से संबंध का समर्थन करता है, लेकिन किसी अलग बची हुई कब्र या मज़ार को सिद्ध नहीं करता।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
हुसैन असग़र की ऐतिहासिक महत्ता अहले बैत के भीतर और व्यापक हदीस समाज तक ज्ञान पहुंचाने वाली एक कड़ी के रूप में है। रिवायतें उन्हें इमाम अली ज़ैनुल आबिदीन, फ़ातिमा बिन्त हुसैन और इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिमुस्सलाम से जोड़ती हैं, जबकि अब्दुल्लाह बिन मुबारक जैसे बाद के रावियों ने उनसे प्राप्त सामग्री को बड़े विद्वत नेटवर्कों तक पहुंचाया। इमामी और सुन्नी दोनों जीवनी परंपराओं में उनका उल्लेख इस विवरण को साझा दस्तावेज़ी आधार देता है।
वंशावली इतिहास में भी वे महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि बाद की कई हुसैनी शाखाएं अपना वंश उनसे जोड़ती हैं। उनकी मुख्य महत्ता पारिवारिक और विद्वत है, राजनीतिक नहीं। सही पहचान आवश्यक है, क्योंकि हुसैन बिन अली बिन हुसैन नाम कई पीढ़ियों में मिलता है और इसे इमाम हुसैन बिन अली अलैहिस्सलाम, हुसैन अकबर या बाद के समान नाम वाले वंशजों से मिलाया जा सकता है।
वंशावली इतिहास में भी वे महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि बाद की कई हुसैनी शाखाएं अपना वंश उनसे जोड़ती हैं। उनकी मुख्य महत्ता पारिवारिक और विद्वत है, राजनीतिक नहीं। सही पहचान आवश्यक है, क्योंकि हुसैन बिन अली बिन हुसैन नाम कई पीढ़ियों में मिलता है और इसे इमाम हुसैन बिन अली अलैहिस्सलाम, हुसैन अकबर या बाद के समान नाम वाले वंशजों से मिलाया जा सकता है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
इमाम अली ज़ैनुल आबिदीन
संभावित
🌱 संतान
अब्दुल्लाह इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
उबैदुल्लाह अल-अअरज इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
अली इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
मुहम्मद इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
हसन अल-अहवल इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
इब्राहीम इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
सुलेमान इब्न हुसैन अल-असग़र इब्न अली ज़ैन अल-आबिदीन
स्रोत
Al-Tabaqat al-Kubra | Muhammad ibn Sa'd | Vol. 5, p. 251 | https://lib.eshia.ir/40237/5/251 | Identity, mother described as an umm walad, children, relative age, and al-Waqidi's encounter.Kitab al-Irshad | al-Shaykh al-Mufid | Vol. 2, p. 174 | https://lib.eshia.ir/27035/2/174 | Piety and extensive transmission from his father, his aunt Fatima bint al-Husayn, and his brother Abu Ja'far al-Baqir.
Rijal al-Tusi (al-Abwab) | al-Shaykh al-Tusi | Entry 2197, p. 182 | https://ablibrary.net/book_content/4063/182 | Medinan identity, kunyah Abu Abd Allah, death in 157 AH, reported age 74, and burial in al-Baqi.
Tahdhib al-Tahdhib | Ibn Hajar al-Asqalani | Vol. 1, p. 426, entry al-Husayn ibn Ali ibn al-Husayn | https://mail.shamela.ws/book/1293/421 | Teachers, transmitters, al-Nasa'i's reliability judgment, and hadith transmission.
Umdat al-Talib fi Ansab Al Abi Talib | Ibn Inaba | pp. 312-316 in the linked edition; pagination varies by edition | https://gadir.free.fr/Ar/Ehlibeyt/kutub2/Umdatut_Talib/umdatultalib/umdatultalib_043.htm | Descendant branches and genealogical significance.
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