उनका ठीक जन्म-वर्ष और जन्मस्थान सुरक्षित नहीं है। वे ६१ हिजरी, ६८० ईस्वी की कर्बला की घटनाओं से पहले जन्म ले चुकी थीं, पर अधिक निश्चित तिथि विश्वसनीय रूप से सिद्ध नहीं।
फ़ातिमा बिन्त हुसैन
PER-000088
अहल अल-बैत
संभावित
दफ़न स्थान अज्ञात
इमामी स्रोत-आधारित सूची
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फ़ातिमा बिन्त इमाम हुसैन सलामुल्लाह अलैहा इमाम हुसैन और उम्म इसहाक़ बिन्त तल्हा की पुत्री, कर्बला की विपत्ति की जीवित साक्षी, मदीना की सम्मानित रावी और हसनी तथा हुसैनी घरानों के बीच एक महत्त्वपूर्ण वंशीय कड़ी थीं। उनका पहला विवाह हसन इब्न हसन अल-मुसन्ना अलैहिस्सलाम से हुआ और उनकी मृत्यु के बाद अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न उस्मान इब्न अफ़्फ़ान से हुआ। उनकी ठीक जन्मतिथि, निश्चित मृत्यु-वर्ष और दफ़नगाह विश्वसनीय रूप से ज्ञात नहीं हैं, इसलिए बाद की तिथियों और मज़ार-संबंधों को सावधानी से रखना चाहिए।
उनकी निश्चित मृत्यु-वर्ष ज्ञात नहीं है। इब्न अल-जौज़ी ने उन्हें ११७ हिजरी में मरने वालों में रखा, लेकिन अलग विवरण इस तिथि को अंतिम मानने से रोकते हैं।
उनकी ऐतिहासिक रूप से सत्यापित दफ़नगाह अज्ञात है। बाद के स्थानीय या मज़ार-संबंध प्रारंभिक ऐतिहासिक प्रमाण के बिना निश्चित क़ब्र सिद्ध नहीं करते।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
फ़ातिमा इमाम हुसैन इब्न अली अलैहिस्सलाम की पुत्री थीं और उनकी माता उम्म इसहाक़ बिन्त तल्हा इब्न उबैदुल्लाह थीं। नसब कुरैश और मान्य जीवनी तथा रावी ग्रंथ इस माता-पिता के संबंध को सुरक्षित रखते हैं। बाद के उल्लेख उन्हें उम्म अब्दुल्लाह, फ़ातिमा अल-नबविय्या और फ़ातिमा अल-हाशिमिय्या अल-मदनिय्या भी कहते हैं। उन्हें समान नाम वाली दूसरी महिलाओं, विशेषतः फ़ातिमा बिन्त हसन और फ़ातिमा बिन्त अली, से अलग रखना आवश्यक है।
उनका ठीक जन्म-वर्ष और जन्मस्थान प्रारंभिक स्रोतों में सुरक्षित नहीं है। यह स्पष्ट है कि वे ६१ हिजरी, ६८० ईस्वी की कर्बला की घटनाओं से पहले जन्म ले चुकी थीं। कुछ बाद की पुस्तकें बहुत पहले की तिथियाँ देती हैं, लेकिन वे उनकी माता के विवाहों के प्रमाणित क्रम से मेल नहीं खातीं; इसलिए इस प्रोफ़ाइल में कोई अप्रमाणित वर्ष स्वीकार नहीं किया गया।
इब्न असाकिर की जीवनी उन्हें अहल अल-बैत की उन महिलाओं में गिनती है जिन्हें इमाम हुसैन की शहादत के बाद दमिश्क लाया गया और जो बाद में मदीना लौटीं। यह रिपोर्ट उन्हें कर्बला के बाद की यात्रा और परिवार की सामूहिक परीक्षा से जोड़ती है। बाद का धार्मिक साहित्य उनसे भाषण और लंबे संवाद जोड़ता है, लेकिन मजबूत प्रारंभिक रिवायत के बिना उनके पूरे शब्दों को निश्चित नहीं मानना चाहिए।
उनका पहला विवाह इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम के पुत्र हसन इब्न हसन अल-मुसन्ना से हुआ। वंश-स्रोत इस विवाह से कई पुत्रों और पुत्रियों का नाम देते हैं, जिनमें अब्दुल्लाह, हसन और इब्राहीम शामिल हैं, यद्यपि पूरी सूचियों में छोटे अंतर हैं। इस विवाह ने हुसैनी और हसनी शाखाओं को जोड़ा, और उनके पुत्र अब्दुल्लाह अल-मह्द बाद की हसनी वंशावली की प्रमुख कड़ी बने।
सहीह बुख़ारी के जनाज़ों के अध्याय में एक विवरण है कि हसन इब्न हसन की पत्नी ने कुछ समय उनकी क़ब्र पर तंबू लगाया; बाद के जीवनीकार उस पत्नी को फ़ातिमा बिन्त हुसैन बताते हैं। हसन अल-मुसन्ना की मृत्यु के बाद फ़ातिमा ने अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न उस्मान इब्न अफ़्फ़ान से विवाह किया। वंश-स्रोत इस दूसरे विवाह से मुहम्मद अल-दीबाज, अल-क़ासिम और रुक़य्या का नाम देते हैं।
फ़ातिमा मदीना की हदीस रावी भी थीं। उन्होंने अपने पिता इमाम हुसैन, भाई इमाम अली ज़ैन अल-आबिदीन, फूफी ज़ैनब बिन्त अली, इब्न अब्बास, आइशा और असमा बिन्त उमैस से रिवायत की। उनकी नानी फ़ातिमा अल-ज़हरा और बिलाल से जुड़ी रिवायतें मुरसल मानी जाती हैं। उनके पुत्रों और कई मदीनी रावियों ने उनसे रिवायत की, और बाद के रिजाल लेखकों ने उन्हें भरोसेमंद रावियों में रखा।
उनकी मृत्यु का वर्ष निश्चित नहीं है। इब्न अल-जौज़ी ने उन्हें ११७ हिजरी में मरने वालों में रखा, जबकि अन्य जीवनी-सार अलग समय-क्रम देते हैं। कोई विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोत उनकी अलग क़ब्र की निश्चित पहचान नहीं करता। सही निष्कर्ष यह है कि उनकी दफ़नगाह अज्ञात है और किसी बाद के स्थानीय मज़ार-संबंध को दफ़न का स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
उनका ठीक जन्म-वर्ष और जन्मस्थान प्रारंभिक स्रोतों में सुरक्षित नहीं है। यह स्पष्ट है कि वे ६१ हिजरी, ६८० ईस्वी की कर्बला की घटनाओं से पहले जन्म ले चुकी थीं। कुछ बाद की पुस्तकें बहुत पहले की तिथियाँ देती हैं, लेकिन वे उनकी माता के विवाहों के प्रमाणित क्रम से मेल नहीं खातीं; इसलिए इस प्रोफ़ाइल में कोई अप्रमाणित वर्ष स्वीकार नहीं किया गया।
इब्न असाकिर की जीवनी उन्हें अहल अल-बैत की उन महिलाओं में गिनती है जिन्हें इमाम हुसैन की शहादत के बाद दमिश्क लाया गया और जो बाद में मदीना लौटीं। यह रिपोर्ट उन्हें कर्बला के बाद की यात्रा और परिवार की सामूहिक परीक्षा से जोड़ती है। बाद का धार्मिक साहित्य उनसे भाषण और लंबे संवाद जोड़ता है, लेकिन मजबूत प्रारंभिक रिवायत के बिना उनके पूरे शब्दों को निश्चित नहीं मानना चाहिए।
उनका पहला विवाह इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम के पुत्र हसन इब्न हसन अल-मुसन्ना से हुआ। वंश-स्रोत इस विवाह से कई पुत्रों और पुत्रियों का नाम देते हैं, जिनमें अब्दुल्लाह, हसन और इब्राहीम शामिल हैं, यद्यपि पूरी सूचियों में छोटे अंतर हैं। इस विवाह ने हुसैनी और हसनी शाखाओं को जोड़ा, और उनके पुत्र अब्दुल्लाह अल-मह्द बाद की हसनी वंशावली की प्रमुख कड़ी बने।
सहीह बुख़ारी के जनाज़ों के अध्याय में एक विवरण है कि हसन इब्न हसन की पत्नी ने कुछ समय उनकी क़ब्र पर तंबू लगाया; बाद के जीवनीकार उस पत्नी को फ़ातिमा बिन्त हुसैन बताते हैं। हसन अल-मुसन्ना की मृत्यु के बाद फ़ातिमा ने अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न उस्मान इब्न अफ़्फ़ान से विवाह किया। वंश-स्रोत इस दूसरे विवाह से मुहम्मद अल-दीबाज, अल-क़ासिम और रुक़य्या का नाम देते हैं।
फ़ातिमा मदीना की हदीस रावी भी थीं। उन्होंने अपने पिता इमाम हुसैन, भाई इमाम अली ज़ैन अल-आबिदीन, फूफी ज़ैनब बिन्त अली, इब्न अब्बास, आइशा और असमा बिन्त उमैस से रिवायत की। उनकी नानी फ़ातिमा अल-ज़हरा और बिलाल से जुड़ी रिवायतें मुरसल मानी जाती हैं। उनके पुत्रों और कई मदीनी रावियों ने उनसे रिवायत की, और बाद के रिजाल लेखकों ने उन्हें भरोसेमंद रावियों में रखा।
उनकी मृत्यु का वर्ष निश्चित नहीं है। इब्न अल-जौज़ी ने उन्हें ११७ हिजरी में मरने वालों में रखा, जबकि अन्य जीवनी-सार अलग समय-क्रम देते हैं। कोई विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोत उनकी अलग क़ब्र की निश्चित पहचान नहीं करता। सही निष्कर्ष यह है कि उनकी दफ़नगाह अज्ञात है और किसी बाद के स्थानीय मज़ार-संबंध को दफ़न का स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
फ़ातिमा का ऐतिहासिक महत्त्व अहल अल-बैत की उन महिलाओं में है जो कर्बला की विपत्ति से जीवित रहीं। दमिश्क की यात्रा और फिर मदीना वापसी का विवरण उन्हें उस पारिवारिक स्मृति से जोड़ता है जिसने इमाम हुसैन की शहादत और उसके बाद की घटनाओं को आगे की पीढ़ियों तक पहुँचाया।
उनके दोनों विवाहों ने महत्त्वपूर्ण वंशीय संबंध बनाए। हसन अल-मुसन्ना से विवाह ने हसनी और हुसैनी शाखाओं को जोड़ा, जबकि अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न उस्मान से विवाह ने अहल अल-बैत और उस्मानी परिवार की एक शाखा के बीच पारिवारिक संबंध सुरक्षित किया। उनकी संतानों में बाद की इस्लामी इतिहास के प्रसिद्ध हसनी और मदीनी व्यक्ति हुए।
रावी के रूप में उनका महत्त्व अहल अल-बैत, सहाबा और मदीना के विद्वत् मंडलों से सामग्री आगे पहुँचाने में भी है। उनकी जीवनी एक सही शोध-नीति दिखाती है: मजबूत माता-पिता, विवाह और रिवायत को स्पष्ट कहा जाए, लेकिन अनिश्चित जन्म, मृत्यु और दफ़न के दावों को प्रमाण के अनुपात में सावधान रखा जाए।
उनके दोनों विवाहों ने महत्त्वपूर्ण वंशीय संबंध बनाए। हसन अल-मुसन्ना से विवाह ने हसनी और हुसैनी शाखाओं को जोड़ा, जबकि अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न उस्मान से विवाह ने अहल अल-बैत और उस्मानी परिवार की एक शाखा के बीच पारिवारिक संबंध सुरक्षित किया। उनकी संतानों में बाद की इस्लामी इतिहास के प्रसिद्ध हसनी और मदीनी व्यक्ति हुए।
रावी के रूप में उनका महत्त्व अहल अल-बैत, सहाबा और मदीना के विद्वत् मंडलों से सामग्री आगे पहुँचाने में भी है। उनकी जीवनी एक सही शोध-नीति दिखाती है: मजबूत माता-पिता, विवाह और रिवायत को स्पष्ट कहा जाए, लेकिन अनिश्चित जन्म, मृत्यु और दफ़न के दावों को प्रमाण के अनुपात में सावधान रखा जाए।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
इमाम हुसैन इब्न अली
संभावित
माता
उम्मे इसहाक़ बिन्त तल्हा
संभावित
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
🌱 संतान
स्रोत
Nasab Quraysh | Mus'ab ibn Abdullah al-Zubayri | Displayed pp. 51-52 and 59 | https://shamela.ws/book/2922/49 ; https://shamela.ws/book/2922/50 ; https://shamela.ws/book/2922/57 | Mother, marriages, and Hasanid and Uthmanid childrenTahdhib al-Tahdhib | Ibn Hajar al-Asqalani | Biographical entry 12102; pagination varies by edition | https://ftp.shamela.ws/book/1290/3488 | Parentage, two marriages, teachers, students, mursal reports, and reliability
Tarikh Dimashq | Ibn Asakir | Biographical entry 9400; pagination varies by edition | https://ftp.shamela.ws/book/71/31483 | Teachers, transmitters, journey to Damascus after her father's martyrdom, and return to Medina
Maqatil al-Talibiyyin | Abu al-Faraj al-Isfahani | Displayed p. 167 | https://shamela.ws/book/12404/162 | Marriage to Abdullah ibn Amr ibn Uthman and children Muhammad al-Dibaj, al-Qasim, and Ruqayya
Sahih al-Bukhari | Muhammad ibn Ismail al-Bukhari | Book of Funerals, chapter associated with hadith 1330 | https://sunnah.com/bukhari:1330 | Chapter-heading report that the wife of Hasan ibn Hasan maintained a tent over his grave
al-Muntazam fi Tarikh al-Muluk wa al-Umam | Ibn al-Jawzi | Volume 7, death notices for 117 AH, entry 630 | https://shamela.ws/book/12406/2410 | Later chronological placement of Fatima's death in 117 AH
चित्र दीर्घा
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