अब्दुल्लाह इब्न जह्श

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अब्दुल्लाह इब्न जह्श इब्न रिआब रज़ियल्लाहु अन्हु बनू असद के और कुरैश के सहयोगी, पैग़म्बर की फूफी उमैमा बिन्त अब्दुल मुत्तलिब के पुत्र और उम्मुल मोमिनीन ज़ैनब बिन्त जह्श के भाई थे। वे आरंभिक मुसलमान, हबशा और मदीना के मुहाजिर, बद्र के सहभागी और नख़ला अभियान के सेनापति थे। नख़ला घटना ने पवित्र महीने में युद्ध पर विवाद पैदा किया, जिसे सीरत परंपरा सूरा बक़रा की आयत २१७ से जोड़ती है। वे शव्वाल ३ हिजरी, अर्थात परंपरागत रूप से ६२५ ईस्वी में उहुद में मारे गए और उनके शरीर को विकृत किया गया। कई स्रोत ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा को उनकी पत्नी बताते हैं, जबकि दूसरे आरंभिक क्रम उनके पूर्व पतियों के अलग नाम देते हैं; इसलिए वर्तमान विवादित वैवाहिक दर्जा उचित है।
जन्म

जन्म का सही वर्ष और स्थान स्थापित नहीं। वे मक्का के असदी सहयोगी परिवार में पले और बाद की जीवनियाँ उहुद में उनकी आयु चालीस से कुछ अधिक बताती हैं, लेकिन कोई निश्चित जन्मवर्ष नहीं निकाला गया।

निधन

वे शव्वाल ३ हिजरी, अर्थात परंपरागत रूप से ६२५ ईस्वी में उहुद युद्ध के दौरान मारे गए और उनके शरीर को विकृत किया गया। हत्यारे के नाम पर रिवायतें भिन्न हैं।

दफ़न या संबद्ध स्थान

इब्न इस्हाक़ उनके परिवार से नक़्ल करते हैं कि उन्हें उनके मामा हमज़ा इब्न अब्दुल मुत्तलिब के साथ एक क़ब्र में दफ़न किया गया। यह आरंभिक किंतु पारिवारिक रिवायत है; आज कोई अलग निश्चित क़ब्र या विश्वसनीय विशेष नक़्शा-बिंदु सिद्ध नहीं।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

उनका पूरा वंश अब्दुल्लाह इब्न जह्श इब्न रिआब इब्न यअमर इब्न सबिरा इब्न मुर्रा इब्न कबीर इब्न ग़नम इब्न दूदान इब्न असद इब्न ख़ुज़ैमा है। उनके पिता जह्श इब्न रिआब और माता उमैमा बिन्त अब्दुल मुत्तलिब थीं, जो पैग़म्बर की फूफी थीं; इसलिए अब्दुल्लाह उनके फुफेरे भाई थे। ज़ैनब बिन्त जह्श, हमना, अबू अहमद और उबैदुल्लाह उनके भाई-बहन थे। पिता और माता की पहचान उपलब्ध स्रोतों से निश्चित नहीं, इसलिए दोनों संबंध अलग स्रोत-समीक्षा में दिए गए हैं और शोध फ़ाइल में नहीं बदले गए।

इब्न सअद और इब्न अब्दुल बर के अनुसार अब्दुल्लाह और उनके भाइयों ने दार अल-अरक़म के चरण से पहले इस्लाम स्वीकार किया। वे दूसरी हिजरत में हबशा गए, फिर मक्का लौटे और बाद में मदीना हिजरत की। इन दो हिजरतों ने उन्हें उन आरंभिक सहाबा में रखा जिन्होंने मक्का का दबाव, हबशा की शरण और मदीना समुदाय की स्थापना देखी। उन्होंने बद्र में भी भाग लिया और उनका बद्री स्थान ऐतिहासिक स्रोतों में स्थापित है।

रजब २ हिजरी में पैग़म्बर ने उन्हें मुहाजिरों के एक छोटे दल का सेनापति बनाकर नख़ला भेजा और एक मुहरबंद पत्र दिया जिसे दो दिन की यात्रा के बाद खोलना था। पत्र में कुरैश की गतिविधि देखने और किसी साथी को मजबूर न करने का आदेश था। नख़ला में कुरैश के कारवाँ से मुठभेड़ हुई; अम्र इब्न अल-हद्रमी मारे गए और दो लोग बंदी बने। दिन के रजब में होने पर संदेह के कारण पवित्र महीने में युद्ध का प्रश्न उठा, जिसे इब्न इस्हाक़ की सीरत आयत २१७ से जोड़ती है।

उनके विवाह के विषय में सावधानी आवश्यक है। इब्न अब्दुल बर, ज़हबी, इब्न हजर और अन्य ग्रंथ ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा को उनकी पत्नी बताते हैं और कहते हैं कि उहुद में अब्दुल्लाह की मृत्यु के बाद पैग़म्बर ने उनसे विवाह किया। इसके विपरीत इब्न इस्हाक़ से आया एक क्रम जह्म या तुफ़ैल और फिर उबैदा इब्न अल-हारिस को उनके पूर्व पतियों में रखता है। इस वास्तविक स्रोत-विरोध के कारण सुरक्षित वैवाहिक संबंध को विवादित रखना सही है।

उहुद से पहले सअद इब्न अबी वक़्क़ास के साथ उनकी दुआ का विवरण प्रसिद्ध है। उन्होंने प्रार्थना की कि वे कठोर शत्रु से लड़ें, मारे जाएँ और उनकी नाक और कान काटे जाएँ, ताकि वे कह सकें कि यह सब अल्लाह और उसके रसूल की राह में हुआ। वे उहुद में मारे गए और उनके शरीर को विकृत किया गया, इसलिए बाद की जीवनी में उन्हें अल-मुजद्दअ फ़ी अल्लाह कहा गया। हत्यारे और कुछ युद्ध विवरणों में मतभेद होने से केवल मृत्यु और विकृति का निश्चित तथ्य रखा गया।

उनकी मृत्यु शव्वाल ३ हिजरी, अर्थात परंपरागत रूप से ६२५ ईस्वी के उहुद युद्ध में हुई। इब्न इस्हाक़ अब्दुल्लाह के परिवार से नक़्ल करते हैं कि पैग़म्बर ने उन्हें उनके मामा हमज़ा इब्न अब्दुल मुत्तलिब के साथ एक क़ब्र में दफ़न किया, और स्पष्ट करते हैं कि यह बात उन्होंने केवल परिवार से सुनी। इसलिए दफ़न को आरंभिक पारिवारिक संबद्धता और संभावित विवरण माना गया है, अलग निश्चित क़ब्र या गढ़े हुए नक़्शे के स्थान के रूप में नहीं।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

अब्दुल्लाह इब्न जह्श रज़ियल्लाहु अन्हु का जीवन आरंभिक इस्लाम के कई मूल चरणों को एक जीवनी में जोड़ता है: दार अल-अरक़म से पहले इस्लाम, हबशा और मदीना की हिजरत, बद्र में भागीदारी और उहुद में मृत्यु। पैग़म्बर से उनका पारिवारिक संबंध भी निकट था और उनकी बहन ज़ैनब बिन्त जह्श बाद में उम्मुल मोमिनीन बनीं।

नख़ला में उनका नेतृत्व आरंभिक मदीनी काल की सूचना-संग्रह, सैन्य अनुशासन और पवित्र महीने में युद्ध के कानूनी तथा नैतिक प्रश्न को समझने में महत्वपूर्ण है। यह विवरण दिखाता है कि आरंभिक सैन्य निर्णय तुरंत धार्मिक और नैतिक चर्चा के अधीन थे और सीरत ने उन्हें कुरआनी मार्गदर्शन के संदर्भ में सुरक्षित रखा।

उहुद में उनकी मृत्यु और शरीर-विकृति, तथा हमज़ा के साथ दफ़न की पारिवारिक रिवायत, बलिदान की शक्तिशाली स्मृति बनी। साथ ही पत्नी और दफ़न पर मतभेद दिखाते हैं कि धार्मिक सम्मान हर विवरण को समान ऐतिहासिक निश्चितता नहीं देता; इसलिए परिचय सिद्ध तथ्य, विवादित विवाह और संभावित दफ़न को अलग रखता है।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

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