अल-हुजवीरी रहिमहुल्लाह ने कश्फ़ अल-महजूब में ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह की मृत्यु के आसपास की कई असाधारण निशानियों का जुड़ा हुआ वर्णन सुरक्षित किया है। उनके अनुसार मृत्यु की रात सत्तर लोगों ने पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सपने में देखा, मृत्यु के बाद एक लिखावट प्रकट हुई और पक्षी जनाज़े के ऊपर इकट्ठे होकर छाया करने लगे। अल-ज़हबी ने भी एक अलग रिवायत में जनाज़े पर पक्षियों की छाया का उल्लेख किया है। एक अन्य ऐतिहासिक रिवायत लिखावट को माथे के बजाय क़ब्र पर बताती है, इसलिए इस अंतर को अलग रूप में रखा गया है।
अल-हुजवीरी रहिमहुल्लाह ने कश्फ़ अल-महजूब में ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह की मृत्यु और जनाज़े से जुड़े कई यादगार वाक़िआत एक साथ बयान किए हैं। कहानी उनकी मृत्यु की रात से शुरू होती है। अल-हुजवीरी के अनुसार उसी रात सत्तर लोगों ने पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सपने में देखा, और सपने में यह अर्थ बताया गया कि पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ज़ुल-नून के स्वागत के लिए आए हैं। इस तरह रिवायत का पहला दृश्य एक ही रात में आने वाले अनेक सपनों से बनता है।
ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह की मृत्यु के बाद अल-हुजवीरी दूसरी असाधारण निशानी का उल्लेख करते हैं। उनके अनुसार ज़ुल-नून के माथे पर एक लिखावट दिखाई दी। अल-हुजवीरी उसका अर्थ यह बताते हैं कि वे अल्लाह के प्रिय थे और ईश्वरीय प्रेम में दुनिया से विदा हुए। रिवायत इस लिखावट को मृत्यु के बाद प्रकट हुई एक निशानी के रूप में बयान करती है और इसके साथ कोई नई घटना जोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
इसके बाद कहानी जनाज़े की ओर बढ़ती है। अल-हुजवीरी कहते हैं कि ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह के जनाज़े के ऊपर पक्षी इकट्ठे हो गए और उन्होंने उस पर छाया कर दी। यही कहानी का सबसे साफ़ और दृश्यात्मक क्षण है: जनाज़ा आगे बढ़ रहा है और उसके ऊपर पक्षियों का समूह छाया किए हुए है। इसी कारण यह दृश्य ज़ुल-नून की मृत्यु से जुड़ी प्रसिद्ध करामती रिवायतों में विशेष रूप से याद किया गया।
अल-ज़हबी ने सियर आलाम अल-नुबला में जनाज़े का एक अलग लेकिन मिलता-जुलता विवरण सुरक्षित किया है। यूसुफ़ बिन अहमद अल-बग़दादी से बयान किया गया है कि पक्षियों ने ज़ुल-नून के जनाज़े पर छाया की और उसके बाद लोगों में उनकी क़ब्र के प्रति सम्मान और बढ़ गया। इस अलग रिवायत को अल-हुजवीरी के शब्दों में मिलाने के बजाय अपने रूप में रखना कहानी को अधिक साफ़ रखता है।
लिखावट के स्थान के बारे में भी दो अलग रूप मिलते हैं। अल-हुजवीरी इसे ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह के माथे पर बताते हैं, जबकि इब्न असाकिर की तारीख़ दमिश्क़ में सुरक्षित एक रिवायत लिखावट को उनकी क़ब्र पर रखती है। दोनों रूप उनकी मृत्यु से जुड़ी रिवायतों का हिस्सा हैं, लेकिन स्थान की यह बात एक जैसी नहीं है। अत्तार ने भी बाद में इसी प्रकार की रिवायतों का एक मिलता-जुलता समूह बयान किया, मगर यहाँ मुख्य कहानी अल-हुजवीरी की रिवायत के क्रम में रखी गई है।
इस क्रम से पूरी कहानी साफ़ रहती है: मृत्यु की रात सपने, मृत्यु के बाद असाधारण लिखावट और फिर जनाज़े पर पक्षियों की छाया। यही दृश्य ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह की मृत्यु और जनाज़े से जुड़ी प्रसिद्ध करामती रिवायतों के मुख्य हिस्से हैं।
ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह की मृत्यु के बाद अल-हुजवीरी दूसरी असाधारण निशानी का उल्लेख करते हैं। उनके अनुसार ज़ुल-नून के माथे पर एक लिखावट दिखाई दी। अल-हुजवीरी उसका अर्थ यह बताते हैं कि वे अल्लाह के प्रिय थे और ईश्वरीय प्रेम में दुनिया से विदा हुए। रिवायत इस लिखावट को मृत्यु के बाद प्रकट हुई एक निशानी के रूप में बयान करती है और इसके साथ कोई नई घटना जोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
इसके बाद कहानी जनाज़े की ओर बढ़ती है। अल-हुजवीरी कहते हैं कि ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह के जनाज़े के ऊपर पक्षी इकट्ठे हो गए और उन्होंने उस पर छाया कर दी। यही कहानी का सबसे साफ़ और दृश्यात्मक क्षण है: जनाज़ा आगे बढ़ रहा है और उसके ऊपर पक्षियों का समूह छाया किए हुए है। इसी कारण यह दृश्य ज़ुल-नून की मृत्यु से जुड़ी प्रसिद्ध करामती रिवायतों में विशेष रूप से याद किया गया।
अल-ज़हबी ने सियर आलाम अल-नुबला में जनाज़े का एक अलग लेकिन मिलता-जुलता विवरण सुरक्षित किया है। यूसुफ़ बिन अहमद अल-बग़दादी से बयान किया गया है कि पक्षियों ने ज़ुल-नून के जनाज़े पर छाया की और उसके बाद लोगों में उनकी क़ब्र के प्रति सम्मान और बढ़ गया। इस अलग रिवायत को अल-हुजवीरी के शब्दों में मिलाने के बजाय अपने रूप में रखना कहानी को अधिक साफ़ रखता है।
लिखावट के स्थान के बारे में भी दो अलग रूप मिलते हैं। अल-हुजवीरी इसे ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह के माथे पर बताते हैं, जबकि इब्न असाकिर की तारीख़ दमिश्क़ में सुरक्षित एक रिवायत लिखावट को उनकी क़ब्र पर रखती है। दोनों रूप उनकी मृत्यु से जुड़ी रिवायतों का हिस्सा हैं, लेकिन स्थान की यह बात एक जैसी नहीं है। अत्तार ने भी बाद में इसी प्रकार की रिवायतों का एक मिलता-जुलता समूह बयान किया, मगर यहाँ मुख्य कहानी अल-हुजवीरी की रिवायत के क्रम में रखी गई है।
इस क्रम से पूरी कहानी साफ़ रहती है: मृत्यु की रात सपने, मृत्यु के बाद असाधारण लिखावट और फिर जनाज़े पर पक्षियों की छाया। यही दृश्य ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह की मृत्यु और जनाज़े से जुड़ी प्रसिद्ध करामती रिवायतों के मुख्य हिस्से हैं।
निष्कर्ष
हिकायत ज़ुल-नून अल-मिस्री रहिमहुल्लाह के जनाज़े पर पक्षियों की छाया के दृश्य पर पूरी होती है, इससे पहले मृत्यु की रात के सपने और मृत्यु के बाद की लिखावट का वर्णन आता है।
स्रोत
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, section on Dhu al-Nun al-Misri
Nicholson translation of al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, Dhu al-Nun section
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, same passage
al-Hujwiri, Kashf al-Mahjub, same passage
al-Dhahabi, Siyar A'lam al-Nubala, biography of Dhu al-Nun al-Misri
Ibn Hajar, Lisan al-Mizan, biography of Dhu al-Nun al-Misri
Ibn Hajar, Lisan al-Mizan, same biography
Ibn Asakir, Tarikh Dimashq, biography of Dhu al-Nun
Attar, Tadhkirat al-Awliya, Dhu al-Nun section
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