रमला के जन्म की विश्वसनीय तिथि या स्थान किसी सुरक्षित आरंभिक विवरण में प्रमाणित नहीं है। वह इमाम अली की बेटियों की आरंभिक इस्लामी पीढ़ी से थीं।
रमला बिन्त अली
PER-000051
अहल अल-बैत
संभावित
दफ़न स्थान अज्ञात
इमामी स्रोत-आधारित सूची
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रमला बिन्त अली, जिन्हें बाद की नसब संबंधी पुस्तकों में प्रायः रमला अल-कुबरा कहा गया है, नसब और इमामी स्रोतों में इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम की बेटी के रूप में दर्ज हैं। शैख़ मुफ़ीद और कई बाद के नसब विशेषज्ञ उनकी माँ को उम्मे सईद बिन्त उरवा इब्न मसऊद सक़फ़ी बताते हैं, जबकि इब्न शहरआशूब ने मातृ संबंध की दूसरी रिवायत दी है; इसलिए इस संबंध को सावधानी के साथ लिखना चाहिए। पुराने नसब स्रोत उनकी शादी पहले अबुल हय्याज अब्दुल्लाह इब्न अबी सुफ़यान इब्न हारिस और बाद में मुआविया इब्न मरवान से बताते हैं, लेकिन उनकी विस्तृत जीवन-तिथियाँ, मृत्यु और दफ़्न की जानकारी सुरक्षित रूप से प्रमाणित नहीं है।
जाँचे गए आरंभिक स्रोतों में रमला की मृत्यु की तिथि और स्थान सुरक्षित रूप से प्रमाणित नहीं हैं।
उनका कोई प्रमाणित दफ़्न-स्थान या ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित क़ब्र संबंध सिद्ध नहीं हुआ। किसी बाद की स्थानीय मान्यता को स्वतंत्र प्रमाण के बिना अप्रमाणित माना जाना चाहिए।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
रमला बिन्त अली, इमाम अली इब्न अबी तालिब अलैहिस्सलाम के परिवार से थीं और बाद के नसब संबंधी लेखन में प्रायः रमला अल-कुबरा के नाम से अलग पहचानी जाती हैं। यह भेद आवश्यक है, क्योंकि आरंभिक इस्लामी इतिहास में रमला नाम की दूसरी महिलाएँ भी प्रसिद्ध हैं, विशेष रूप से उम्मे हबीबा रमला बिन्त अबी सुफ़यान, और इमाम अली की बेटियों की कुछ सूचियों में रमला अल-सुग़रा का भी उल्लेख है। इसलिए यह जीवन-वृत्त परिवार की सूचियों में दर्ज इमाम अली की बेटी के बारे में है, उन दूसरी समान नाम वाली महिलाओं के बारे में नहीं।
शैख़ मुफ़ीद ने उम्मुल हसन और रमला को इमाम अली की बेटियों में गिना और दोनों की माँ उम्मे सईद बिन्त उरवा इब्न मसऊद सक़फ़ी लिखी। इब्न जौज़ी और इरबिली ने भी यही मातृ संबंध सुरक्षित किया, और तालिबी नसब की एक पुस्तक ने उम्मे सईद के सक़फ़ी वंश का अधिक विस्तार दिया। इसके विपरीत इब्न शहरआशूब ने उम्मुल हसन और रमला की माँ उम्मे शुऐब मख़ज़ूमी बताई और उम्मे सईद से दूसरी बेटियों को जोड़ा। इस मतभेद के कारण उम्मे सईद की पहचान प्रबल और प्रसिद्ध है, लेकिन पूर्णतः निर्विवाद नहीं।
पिता की ओर से रमला बनी हाशिम से थीं और इमाम हसन, इमाम हुसैन, ज़ैनब तथा इमाम अली की दूसरी संतान की सौतेली बहन थीं। शैख़ मुफ़ीद की अधिक प्रचलित रिवायत के अनुसार माँ की ओर से उनका संबंध उरवा इब्न मसऊद के सक़फ़ी परिवार से था। उपलब्ध स्रोत उनकी शिक्षा, सार्वजनिक गतिविधि या उनसे रिवायत किए गए कथनों का विस्तृत विवरण सुरक्षित नहीं रखते; उनका प्रमुख ऐतिहासिक निशान नसब और परिवार से संबंधित है।
उनके वैवाहिक जीवन की सबसे स्पष्ट स्वतंत्र सूचना मुसअब ज़ुबैरी की पुस्तक नसब कुरैश में मिलती है। उसके अनुसार रमला की शादी अबुल हय्याज से हुई, जिनका नाम अब्दुल्लाह इब्न अबी सुफ़यान इब्न हारिस इब्न अब्दुल मुत्तलिब था, और उनसे उनकी संतान हुई। वही विवरण कहता है कि अबी सुफ़यान इब्न हारिस की वंश-रेखा बाद में समाप्त हो गई और उसके बाद मुआविया इब्न मरवान इब्न हकम ने रमला से विवाह किया। यह प्रमाण उन्हें कुरैश के दो महत्वपूर्ण पारिवारिक जालों से जोड़ता है, लेकिन अज्ञात बच्चों के नाम या अतिरिक्त घरेलू विवरण जोड़ने की अनुमति नहीं देता।
बाद के लोकप्रिय और मनाक़िब संबंधी लेखन में कभी-कभी रमला को कर्बला की घटनाओं से जोड़ा जाता है, लेकिन इस जीवन-वृत्त के लिए जाँचे गए आरंभिक नसब विवरण उनकी उपस्थिति, क़ैद या बाद की घटनाओं में व्यक्तिगत भूमिका को सुरक्षित रूप से सिद्ध नहीं करते। इसलिए इन दावों को प्रमाणित इतिहास के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया। किसी स्पष्ट पुराने स्रोत के बिना उनकी मृत्यु का स्थान बताने वाले आधुनिक दावों पर भी यही सावधानी लागू होती है।
प्रयोग किए गए स्रोतों में रमला की मृत्यु या दफ़्न की कोई भरोसेमंद तिथि सुरक्षित नहीं मिली, और प्राप्त प्रशासनिक अभिलेख में भी उनसे जुड़ा कोई प्रमाणित मुख्य मज़ार या क़ब्र दर्ज नहीं है। उनका स्थायी ऐतिहासिक महत्व इस बात में है कि इमाम अली के परिवार में उनका नाम सुरक्षित रहा, कुरैश के बड़े परिवारों के बीच वैवाहिक संबंधों का प्रमाण मिला, और अलग-अलग नसब सूचियों का मतभेद यह सिखाता है कि आरंभिक इस्लामी महिलाओं की जीवनी बनाते समय विशेष सावधानी आवश्यक है, क्योंकि उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी अक्सर बहुत संक्षेप में लिखी गई थी।
शैख़ मुफ़ीद ने उम्मुल हसन और रमला को इमाम अली की बेटियों में गिना और दोनों की माँ उम्मे सईद बिन्त उरवा इब्न मसऊद सक़फ़ी लिखी। इब्न जौज़ी और इरबिली ने भी यही मातृ संबंध सुरक्षित किया, और तालिबी नसब की एक पुस्तक ने उम्मे सईद के सक़फ़ी वंश का अधिक विस्तार दिया। इसके विपरीत इब्न शहरआशूब ने उम्मुल हसन और रमला की माँ उम्मे शुऐब मख़ज़ूमी बताई और उम्मे सईद से दूसरी बेटियों को जोड़ा। इस मतभेद के कारण उम्मे सईद की पहचान प्रबल और प्रसिद्ध है, लेकिन पूर्णतः निर्विवाद नहीं।
पिता की ओर से रमला बनी हाशिम से थीं और इमाम हसन, इमाम हुसैन, ज़ैनब तथा इमाम अली की दूसरी संतान की सौतेली बहन थीं। शैख़ मुफ़ीद की अधिक प्रचलित रिवायत के अनुसार माँ की ओर से उनका संबंध उरवा इब्न मसऊद के सक़फ़ी परिवार से था। उपलब्ध स्रोत उनकी शिक्षा, सार्वजनिक गतिविधि या उनसे रिवायत किए गए कथनों का विस्तृत विवरण सुरक्षित नहीं रखते; उनका प्रमुख ऐतिहासिक निशान नसब और परिवार से संबंधित है।
उनके वैवाहिक जीवन की सबसे स्पष्ट स्वतंत्र सूचना मुसअब ज़ुबैरी की पुस्तक नसब कुरैश में मिलती है। उसके अनुसार रमला की शादी अबुल हय्याज से हुई, जिनका नाम अब्दुल्लाह इब्न अबी सुफ़यान इब्न हारिस इब्न अब्दुल मुत्तलिब था, और उनसे उनकी संतान हुई। वही विवरण कहता है कि अबी सुफ़यान इब्न हारिस की वंश-रेखा बाद में समाप्त हो गई और उसके बाद मुआविया इब्न मरवान इब्न हकम ने रमला से विवाह किया। यह प्रमाण उन्हें कुरैश के दो महत्वपूर्ण पारिवारिक जालों से जोड़ता है, लेकिन अज्ञात बच्चों के नाम या अतिरिक्त घरेलू विवरण जोड़ने की अनुमति नहीं देता।
बाद के लोकप्रिय और मनाक़िब संबंधी लेखन में कभी-कभी रमला को कर्बला की घटनाओं से जोड़ा जाता है, लेकिन इस जीवन-वृत्त के लिए जाँचे गए आरंभिक नसब विवरण उनकी उपस्थिति, क़ैद या बाद की घटनाओं में व्यक्तिगत भूमिका को सुरक्षित रूप से सिद्ध नहीं करते। इसलिए इन दावों को प्रमाणित इतिहास के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया। किसी स्पष्ट पुराने स्रोत के बिना उनकी मृत्यु का स्थान बताने वाले आधुनिक दावों पर भी यही सावधानी लागू होती है।
प्रयोग किए गए स्रोतों में रमला की मृत्यु या दफ़्न की कोई भरोसेमंद तिथि सुरक्षित नहीं मिली, और प्राप्त प्रशासनिक अभिलेख में भी उनसे जुड़ा कोई प्रमाणित मुख्य मज़ार या क़ब्र दर्ज नहीं है। उनका स्थायी ऐतिहासिक महत्व इस बात में है कि इमाम अली के परिवार में उनका नाम सुरक्षित रहा, कुरैश के बड़े परिवारों के बीच वैवाहिक संबंधों का प्रमाण मिला, और अलग-अलग नसब सूचियों का मतभेद यह सिखाता है कि आरंभिक इस्लामी महिलाओं की जीवनी बनाते समय विशेष सावधानी आवश्यक है, क्योंकि उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी अक्सर बहुत संक्षेप में लिखी गई थी।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
रमला बिन्त अली का ऐतिहासिक महत्व यह है कि वह अलवी परिवार की नाम से पहचानी गई महिला हैं जिनकी पहचान इमामी और व्यापक नसब साहित्य दोनों में सुरक्षित है। उनका अभिलेख इमाम अली की उन बेटियों के पारिवारिक मानचित्र को पूरा करता है जिनका वर्णन अधिक प्रसिद्ध व्यक्तियों की तुलना में कम हुआ, और बनी हाशिम की शाखाओं तथा कुरैश के दूसरे परिवारों के बीच वैवाहिक संबंध दिखाता है।
उनका जीवन-वृत्त आरंभिक इस्लामी पारिवारिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत भी स्पष्ट करता है: बाद के साहित्य में किसी नाम की पुनरावृत्ति मातृ संबंध, विवाह अभिलेख या बड़ी घटनाओं में भागीदारी से जुड़े मतभेद समाप्त नहीं करती। सुरक्षित नसबी आधार को बनाए रखते हुए मतभेद साफ़ लिखना, मनाक़िब की स्मृति या आधुनिक पुनरावृत्ति को बिना प्रमाण की निश्चितता बनने से रोकता है।
उनका जीवन-वृत्त आरंभिक इस्लामी पारिवारिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत भी स्पष्ट करता है: बाद के साहित्य में किसी नाम की पुनरावृत्ति मातृ संबंध, विवाह अभिलेख या बड़ी घटनाओं में भागीदारी से जुड़े मतभेद समाप्त नहीं करती। सुरक्षित नसबी आधार को बनाए रखते हुए मतभेद साफ़ लिखना, मनाक़िब की स्मृति या आधुनिक पुनरावृत्ति को बिना प्रमाण की निश्चितता बनने से रोकता है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
इमाम अली इब्न अबी तालिब
संभावित
माता
उम्मे सईद बिन्त उरवा
संभावित
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
मुआविया इब्न मरवान
पुष्ट
🌱 संतान
स्रोत
al-Irshad | al-Shaykh al-Mufid | vol. 1, p. 354 in the linked digital edition | https://ito.lib.eshia.ir/86018/01/354 | Lists Umm al-Hasan and Ramla as daughters of Ali and identifies their mother as Umm Sa'id bint Urwa ibn Mas'ud al-ThaqafiyyaNasab Quraysh | Mus'ab ibn Abd Allah al-Zubayri | vol. 1, p. 45 | https://lib.eshia.ir/40519/1/45 | Records Ramla's marriage to Abu al-Hayyaj Abd Allah ibn Abi Sufyan ibn al-Harith, children from that marriage, and her later marriage to Mu'awiya ibn Marwan
Talqih Fuhum Ahl al-Athar fi Uyun al-Tarikh wa-l-Siyar | Ibn al-Jawzi | vol. 1, p. 80 | https://ar.lib.eshia.ir/40094/1/80 | Corroborates the name Ramla al-Kubra and the maternal attribution to Umm Sa'id bint Urwa
Kashf al-Ghumma fi Ma'rifat al-A'imma | Ali ibn Isa al-Irbili | vol. 2, p. 68 | https://lib.eshia.ir/16052/2/68 | Corroborates Ramla al-Kubra among Ali's daughters and names Umm Sa'id bint Urwa as her mother
Manaqib Aal Abi Talib | Ibn Shahrashub | vol. 3, p. 89 | https://lib.eshia.ir/16066/3/89 | Preserves the alternative maternal attribution to Umm Shu'ayb al-Makhzumiyya, establishing a genuine genealogical disagreement
al-Muntaqala al-Talibiyya | Abu Isma'il Ibn Tabataba | vol. 1, p. 262 | https://lib.eshia.ir/13178/1/262 | Expands the Thaqafi maternal lineage in the tradition identifying Umm Sa'id as Ramla's mother
चित्र दीर्घा
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