मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह रहिमहुल्लाह के कोड़े पर रोशनी की रिवायत

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पुराने स्रोत मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह रहिमहुल्लाह के बारे में कई संबंधित रिवायतें सुरक्षित रखते हैं जिनमें अँधेरे सफ़र के दौरान उनके कोड़े पर असाधारण रोशनी दिखाई देती है। इब्न सअद बताते हैं कि भोर से पहले जुमे की नमाज़ के लिए जाते समय, जबकि उनके बेटे अब्दुल्लाह पीछे थे, कोड़े के सिर से दो शाखाओं वाली रोशनी चमकी। अहमद इब्न हंबल एक दूसरी रिवायत में अँधेरी रात को कोड़े की नोक पर दीपक जैसी रोशनी बताते हैं। बैहक़ी और लालकाई ने भी ऐसा रूप सुरक्षित किया है जिसमें दो यात्रियों में से एक के कोड़े की नोक पर रोशनी थी।

पुराने स्रोत मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह रहिमहुल्लाह से जुड़ी एक यादगार करामत सुरक्षित रखते हैं जो अँधेरे में सफ़र के दौरान हुई। यहाँ देखी गई रिवायतों में सबसे स्पष्ट पुराना रूप इब्न सअद के यहाँ मिलता है। वह बताते हैं कि मुतर्रिफ़ भोर से पहले जुमे की नमाज़ के लिए जा रहे थे और उनके बेटे अब्दुल्लाह पीछे चल रहे थे।

उसी सफ़र में मुतर्रिफ़ रहिमहुल्लाह के कोड़े के सिर से अचानक रोशनी निकली। इब्न सअद उस रोशनी को दो शाखाओं वाली बताते हैं। दृश्य बहुत छोटा और साफ़ है: भोर से पहले का अँधेरा, जुमे की नमाज़ की ओर यात्रा, बेटा पीछे, और हाथ में पकड़े कोड़े के सिर से असाधारण रोशनी का चमकना।

अहमद इब्न हंबल की किताब अल-ज़ुह्द इसी घटना का एक दूसरा रूप सुरक्षित करती है। उसमें मुतर्रिफ़ रहिमहुल्लाह एक सेवक के साथ बहुत अँधेरी रात में सफ़र कर रहे हैं, जब रास्ता ठीक से दिखाई नहीं देता। फिर उनके कोड़े की नोक पर दीपक जैसी रोशनी दिखाई देती है। मुख्य घटना वही रहती है, लेकिन रोशनी का रूप अलग शब्दों में बताया गया है।

तीसरा रूप बैहक़ी और लालकाई ने क़तादा के माध्यम से सुरक्षित किया है। उसमें मुतर्रिफ़ रहिमहुल्लाह और एक साथी अँधेरी रात में सफ़र करते हैं और दोनों में से एक के कोड़े की नोक पर रोशनी होती है। बैहक़ी इस रिवायत को औलिया की करामात के प्रसंग में रखते हैं और मुतर्रिफ़ को बड़े ताबिईन में गिनते हैं।

इस तरह रिवायतें एक ही मूल घटना पर जुड़ती हैं, लेकिन दृश्य का बिल्कुल एक जैसा वर्णन नहीं करतीं। इब्न सअद दो शाखाओं वाली रोशनी बताते हैं, अहमद की रिवायत में दीपक जैसी रोशनी है, और क़तादा वाले रूप में केवल कोड़े की नोक पर रोशनी का उल्लेख है। इन रूपों को अलग-अलग रखना अधिक साफ़ है।

कोड़े की नोक से तस्बीह जैसी ध्वनि सुनाई देने की एक अलग रिवायत भी मिलती है, मगर वह दूसरा प्रसंग है और इसे इस रोशनी की कहानी में नहीं मिलाया गया है। सार्वजनिक कथा का केंद्र यही है कि अँधेरे सफ़र में मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह रहिमहुल्लाह के कोड़े के साथ असाधारण रोशनी दिखाई दी, जिसे पुराने स्रोतों ने थोड़ा अलग ढंग से सुरक्षित किया।

निष्कर्ष

रिवायत मुतर्रिफ़ इब्न अब्दुल्लाह रहिमहुल्लाह के अँधेरे सफ़र के दौरान कोड़े पर दिखाई देने वाली असाधारण रोशनी को सुरक्षित रखती है, जिसे पुराने स्रोतों ने थोड़े अलग शब्दों में बयान किया है।

स्रोत

Ibn Sa'd, al-Tabaqat al-Kubra, biography of Mutarrif ibn Abd Allah
Ahmad ibn Hanbal, al-Zuhd, report 1364 in HadithPortal numbering
al-Bayhaqi, al-I'tiqad, Bab al-qawl fi karamat al-awliya
al-Lalaka'i, Sharh Usul I'tiqad Ahl al-Sunna, report 176
al-Bayhaqi, al-I'tiqad: ومطرف بن عبد الله كان من كبار التابعين ... شبيها بما أكرموا به
al-Bayhaqi chain: Ahmad ibn Mansur -> Abd al-Razzaq -> Ma'mar -> Qatada
al-Lalaka'i chain: Ahmad ibn Mansur -> Abd al-Razzaq -> Ma'mar -> Qatada
Ibn Sa'd version: سطع من رأس سوطه نور له شعبتان
Ahmad ibn Hanbal version: فأضاء له مثل السراج على طرف سوطه
Abu Nu'aym, Hilyat al-Awliya: Ghaylan ibn Jarir report of hearing something like tasbih at the whip tip
Ibn Asakir, Tarikh Dimashq, biography of Mutarrif, p. 321: light routes and separate tasbih route
Ibn Asakir, Tarikh Dimashq, Mutarrif biography: unnamed-servant light route, Ibn Abi Khaythama route, Qatada/Bayhaqi route