उनकी जन्म-तिथि सुरक्षित नहीं है। आरंभिक जीवनीकार उन्हें मदीना के बनू नज़ीर से जोड़ते हैं, जबकि कुछ वृत्तांत बनू कुरैज़ा की संबद्धता देते हैं।
रैहाना बिन्त ज़ैद
PER-000173
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रैहाना बिन्त ज़ैद रज़ियल्लाहु अन्हा मदीना के यहूदी सामाजिक परिवेश से जुड़ी एक ऐतिहासिक महिला थीं। इब्न सअद उन्हें बनू नज़ीर से जोड़ते हैं, जबकि इब्न इसहाक़ और इब्न अब्दुलबर्र की रिवायतें बनू कुरैज़ा की संबद्धता भी सुरक्षित रखती हैं। ५ हिजरी, अर्थात ६२७ ईस्वी में बनू कुरैज़ा की घटनाओं के बाद वे पैग़म्बर मुहम्मद के घराने से जुड़ीं। आरंभिक स्रोतों में मतभेद है कि उन्हें स्वतंत्र करके विवाह किया गया या वे स्वामित्व की स्थिति में रहीं; इसलिए पत्नी या उम्मुल मोमिनीन का शीर्षक बिना सावधानी के निश्चित रूप से नहीं दिया गया। मृत्यु-क्रम पर भी १० और ११ हिजरी से जुड़ी रिवायतें भिन्न हैं, जबकि अल-बक़ी में दफ़न होने की बात एक आरंभिक जीवनी परंपरा में सुरक्षित है।
मृत्यु-क्रम विवादित है। इब्न सअद में वाक़िदी की रिवायत और इब्न अब्दुलबर्र उनकी मृत्यु विदाई हज के बाद १० हिजरी, अर्थात ६३२ ईस्वी में पैग़म्बर से पहले रखते हैं। इब्न इसहाक़ की रिवायत कहती है कि पैग़म्बर के निधन के समय वे जीवित थीं, इसलिए उनका जीवन कम से कम रबीउल अव्वल ११ हिजरी तक पहुँचा।
इब्न सअद में वाक़िदी की रिवायत मदीना के अल-बक़ी में दफ़न होने की बात कहती है। यह एक आरंभिक जीवनी परंपरा है, लेकिन कोई अलग पहचानी हुई क़ब्र या निर्देशांकों से जुड़ा मज़ार स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं है।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
इब्न सअद उनका वंश रैहाना बिन्त ज़ैद इब्न अम्र इब्न ख़ुनाफ़ा इब्न शमऊन इब्न ज़ैद लिखते और उन्हें बनू नज़ीर से जोड़ते हैं; उसी विवरण में कुछ रावियों द्वारा बनू कुरैज़ा से जोड़ने को पहले विवाह से समझाया गया है। इब्न इसहाक़ उन्हें बनू अम्र इब्न कुरैज़ा की महिला बताते हैं, इब्न अब्दुलबर्र अधिक प्रसिद्ध संबद्धता कुरैज़ा कहते हैं और बलाज़ुरी दोनों रूप सुरक्षित रखते हैं। यह आरंभिक क़बीलाई और वंशगत मतभेद है, कोई पूर्णतः सुलझी पहचान नहीं।
पैग़म्बर के घराने से जुड़ने से पहले उनका विवाह बनू कुरैज़ा के एक पुरुष से हुआ था। इब्न सअद की एक रिवायत में उसका नाम हकीम, इब्न हजर में अल-हकम और बलाज़ुरी में अब्दुल-हकम, अल-हकम या कुनियत अबू अल-हकम आया है। ५ हिजरी, अर्थात ६२७ ईस्वी में बनू कुरैज़ा की घटनाओं में पहले पति की हत्या के बाद वे बंदियों में शामिल हुईं। इन नामों को प्राचीन रूपों के मतभेद के रूप में रखा गया है, किसी एक निश्चित वर्तनी के रूप में नहीं।
सीरत के वृत्तांत बताते हैं कि उन्होंने इस्लाम स्वीकार किया, लेकिन पैग़म्बर मुहम्मद के साथ उनकी कानूनी स्थिति पर दो मुख्य मत हैं। इब्न इसहाक़ की रिवायत में स्वतंत्रता और विवाह का प्रस्ताव दिया गया, पर उन्होंने स्वामित्व में रहना अधिक आसान समझा। इब्न सअद ने वाक़िदी के माध्यम से दूसरी रिवायत दी कि उन्हें स्वतंत्र करके मुहर्रम ६ हिजरी में विवाह किया गया और पैग़म्बर की पत्नियों जैसा महर रखा गया।
विवाह वाली रिवायत में उम्मुल मुन्ज़िर के घर रहने, पर्दा, पत्नियों जैसी बारी, एक तलाक़ और फिर मेल का वर्णन है। दूसरी आरंभिक रिवायतें उन्हें पैग़म्बर की सुर्रियों में गिनती हैं या कहती हैं कि वे उनकी मृत्यु तक स्वामित्व में रहीं। घराने से उनका संबंध ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है, पर पत्नी या स्वामित्व की कानूनी श्रेणी सुलझी नहीं; इसलिए उम्मुल मोमिनीन का शीर्षक निश्चित रूप से नहीं दिया गया।
उनका ऐतिहासिक महत्व किसी प्रसिद्ध सार्वजनिक पद से अधिक स्रोतों के मतभेद में है। आरंभिक अभिलेख बनू नज़ीर और बनू कुरैज़ा की संबद्धता, पहले पति के नाम के कई रूप और घरेलू स्थिति के दो अलग विवरण सुरक्षित रखते हैं। इससे पता चलता है कि क़बीलाई पहचान वंश और विवाह दोनों से व्यक्त हो सकती थी और बाद की कानूनी उपाधि को आरंभिक विरोधी वृत्तांतों पर बिना सावधानी के लागू नहीं करना चाहिए।
इब्न सअद में वाक़िदी की रिवायत कहती है कि विदाई हज से लौटते समय १० हिजरी, अर्थात ६३२ ईस्वी में उनका निधन हुआ और उन्हें अल-बक़ी में दफ़न किया गया; इब्न अब्दुलबर्र भी मृत्यु को १० हिजरी में रखते हैं। इसके विपरीत इब्न इसहाक़ की रिवायत कहती है कि पैग़म्बर का निधन हुआ और वे तब भी जीवित तथा उनके स्वामित्व में थीं, इसलिए उनका जीवन कम से कम रबीउल अव्वल ११ हिजरी तक पहुँचा। मृत्यु-क्रम विवादित है, अल-बक़ी में दफ़न एक प्राचीन रिवायत है और अलग पहचानी हुई क़ब्र सिद्ध नहीं।
पैग़म्बर के घराने से जुड़ने से पहले उनका विवाह बनू कुरैज़ा के एक पुरुष से हुआ था। इब्न सअद की एक रिवायत में उसका नाम हकीम, इब्न हजर में अल-हकम और बलाज़ुरी में अब्दुल-हकम, अल-हकम या कुनियत अबू अल-हकम आया है। ५ हिजरी, अर्थात ६२७ ईस्वी में बनू कुरैज़ा की घटनाओं में पहले पति की हत्या के बाद वे बंदियों में शामिल हुईं। इन नामों को प्राचीन रूपों के मतभेद के रूप में रखा गया है, किसी एक निश्चित वर्तनी के रूप में नहीं।
सीरत के वृत्तांत बताते हैं कि उन्होंने इस्लाम स्वीकार किया, लेकिन पैग़म्बर मुहम्मद के साथ उनकी कानूनी स्थिति पर दो मुख्य मत हैं। इब्न इसहाक़ की रिवायत में स्वतंत्रता और विवाह का प्रस्ताव दिया गया, पर उन्होंने स्वामित्व में रहना अधिक आसान समझा। इब्न सअद ने वाक़िदी के माध्यम से दूसरी रिवायत दी कि उन्हें स्वतंत्र करके मुहर्रम ६ हिजरी में विवाह किया गया और पैग़म्बर की पत्नियों जैसा महर रखा गया।
विवाह वाली रिवायत में उम्मुल मुन्ज़िर के घर रहने, पर्दा, पत्नियों जैसी बारी, एक तलाक़ और फिर मेल का वर्णन है। दूसरी आरंभिक रिवायतें उन्हें पैग़म्बर की सुर्रियों में गिनती हैं या कहती हैं कि वे उनकी मृत्यु तक स्वामित्व में रहीं। घराने से उनका संबंध ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है, पर पत्नी या स्वामित्व की कानूनी श्रेणी सुलझी नहीं; इसलिए उम्मुल मोमिनीन का शीर्षक निश्चित रूप से नहीं दिया गया।
उनका ऐतिहासिक महत्व किसी प्रसिद्ध सार्वजनिक पद से अधिक स्रोतों के मतभेद में है। आरंभिक अभिलेख बनू नज़ीर और बनू कुरैज़ा की संबद्धता, पहले पति के नाम के कई रूप और घरेलू स्थिति के दो अलग विवरण सुरक्षित रखते हैं। इससे पता चलता है कि क़बीलाई पहचान वंश और विवाह दोनों से व्यक्त हो सकती थी और बाद की कानूनी उपाधि को आरंभिक विरोधी वृत्तांतों पर बिना सावधानी के लागू नहीं करना चाहिए।
इब्न सअद में वाक़िदी की रिवायत कहती है कि विदाई हज से लौटते समय १० हिजरी, अर्थात ६३२ ईस्वी में उनका निधन हुआ और उन्हें अल-बक़ी में दफ़न किया गया; इब्न अब्दुलबर्र भी मृत्यु को १० हिजरी में रखते हैं। इसके विपरीत इब्न इसहाक़ की रिवायत कहती है कि पैग़म्बर का निधन हुआ और वे तब भी जीवित तथा उनके स्वामित्व में थीं, इसलिए उनका जीवन कम से कम रबीउल अव्वल ११ हिजरी तक पहुँचा। मृत्यु-क्रम विवादित है, अल-बक़ी में दफ़न एक प्राचीन रिवायत है और अलग पहचानी हुई क़ब्र सिद्ध नहीं।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
रैहाना बिन्त ज़ैद रज़ियल्लाहु अन्हा की जीवनी मदीना के यहूदी समुदायों, विशेष रूप से बनू नज़ीर और बनू कुरैज़ा, तथा पैग़म्बर के घराने के ऐतिहासिक संबंध को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका विवरण संघर्ष, बंदी बनाए जाने, इस्लाम स्वीकार करने और घराने से संबंध को एक महिला के जीवन के माध्यम से सामने लाता है।
विवाह और स्वामित्व की विरोधी रिवायतें इस्लामी जीवनी लेखन में स्रोत-समीक्षा का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। गहरी जाँच ने पुष्टि की कि घराने से उनका संबंध ऐतिहासिक रूप से दर्ज है, लेकिन कानूनी श्रेणी आरंभिक स्रोतों में सुलझी नहीं; इसलिए उम्मुल मोमिनीन का शीर्षक स्पष्ट सावधानी के साथ ही दिया जा सकता है।
अल-बक़ी में दफ़न होने की रिवायत उनकी मदीनाई स्मृति सुरक्षित रखती है, लेकिन यह वाक़िदी और इब्न सअद की परंपरा से आती है तथा कोई अलग क़ब्र या मानचित्रित स्थान सिद्ध नहीं। यह परिचय किसी विवादित मत को निश्चित बनाने के बजाय आरंभिक प्रमाण, उनके सम्मान और ऐतिहासिक निश्चितता की सीमाओं को साथ रखता है।
विवाह और स्वामित्व की विरोधी रिवायतें इस्लामी जीवनी लेखन में स्रोत-समीक्षा का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। गहरी जाँच ने पुष्टि की कि घराने से उनका संबंध ऐतिहासिक रूप से दर्ज है, लेकिन कानूनी श्रेणी आरंभिक स्रोतों में सुलझी नहीं; इसलिए उम्मुल मोमिनीन का शीर्षक स्पष्ट सावधानी के साथ ही दिया जा सकता है।
अल-बक़ी में दफ़न होने की रिवायत उनकी मदीनाई स्मृति सुरक्षित रखती है, लेकिन यह वाक़िदी और इब्न सअद की परंपरा से आती है तथा कोई अलग क़ब्र या मानचित्रित स्थान सिद्ध नहीं। यह परिचय किसी विवादित मत को निश्चित बनाने के बजाय आरंभिक प्रमाण, उनके सम्मान और ऐतिहासिक निश्चितता की सीमाओं को साथ रखता है।
पारिवारिक संबंध
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ
संबद्ध
स्रोत
Al-Tabaqat al-Kubra | Ibn Sa'd | Vol. 8, pp. 103-104, entry 4136 | https://ftp.shamela.ws/book/1686/2770 | Banu al-Nadir lineage, explanation of Qurayza attribution, first-husband form Hakim, al-Waqidi emancipation-and-marriage account, Muharram 6 AH, dower, divorce and reconciliation, death after the Farewell Pilgrimage and reported al-Baqi burialAl-Isaba fi Tamyiz al-Sahaba | Ibn Hajar al-Asqalani | Vol. 8, p. 146, entry 11203 | https://shamela.ws/book/9767/4059 | lineage variants, first-husband form al-Hakam, Ibn Ishaq ownership account, competing marriage account, death chronology and burial report
Al-Isti'ab fi Ma'rifat al-Ashab | Ibn Abd al-Barr | Vol. 4, p. 1847, entry 3350 | https://shamela.ws/book/12288/1834 | Banu Qurayza and Banu al-Nadir variants, preference for Qurayza affiliation, classification as surriyya, and reported death in 10 AH after the Farewell Pilgrimage
Al-Sirah al-Nabawiyyah | Ibn Hisham, transmitting Ibn Ishaq | Banu Qurayza division-of-spoils section; pagination varies by edition | https://islamweb.net/ar/library/content/58/1172/ | Qurayza affiliation, offer of emancipation and marriage, preference to remain in ownership, and survival until the Prophet's death
Ansab al-Ashraf | Al-Baladhuri | Vol. 1, p. 453, report 920 | https://shamela.ws/book/1379/479 | Qurayza affiliation, Nadir alternative, first-husband forms Abd al-Hakam, al-Hakam and Abu al-Hakam, and the concubinage account
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