हज़रत आसिम इब्न साबित के शरीर की मृत्यु के बाद दुश्मन से रक्षा

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सहीह बुख़ारी अल-रजीअ की घटना के बाद हज़रत आसिम इब्न साबित रज़ियल्लाहु अन्हु के शरीर की असाधारण सुरक्षा का वृत्तांत सुरक्षित करती है। उनके मारे जाने के बाद क़ुरैश ने शरीर का कोई पहचानने योग्य हिस्सा लेने के लिए लोगों को भेजा, क्योंकि आसिम ने बद्र में उनके एक प्रमुख व्यक्ति को मारा था। अल्लाह ने उनके शरीर के ऊपर अद-दबर की छतरी या बादल जैसी जमाअत भेज दी और वे लोग शरीर तक पहुँचकर कुछ काट नहीं सके। फ़त्ह अल-बारी अद-दबर को मुख्य रूप से ततैयों या बर्रों से जोड़ती है और नर मधुमक्खियों वाला दूसरा मत भी दर्ज करती है।

यह घटना अल-रजीअ की लड़ाई के बाद शुरू होती है, जब हज़रत आसिम इब्न साबित रज़ियल्लाहु अन्हु और उनके कई साथी मारे जा चुके थे। सहीह बुख़ारी बताती है कि क़ुरैश को आसिम की मृत्यु की ख़बर मिली तो उन्होंने ऐसे लोगों को भेजा जो उनके शरीर का कोई पहचानने योग्य हिस्सा प्राप्त कर सकें। इस कोशिश के पीछे पुरानी युद्ध-दुश्मनी भी थी, क्योंकि आसिम ने बद्र में उनके एक बड़े आदमी को मारा था।

यहीं असाधारण सुरक्षा का दृश्य आता है। बुख़ारी की रिवायत बताती है कि अल्लाह ने आसिम के ऊपर अद-दबर की ऐसी जमाअत भेजी जो छतरी या बादल जैसी थी। यह जमाअत उनके शरीर और क़ुरैश के भेजे हुए लोगों के बीच रुकावट बन गई। एक बुख़ारी स्थान में साफ़ है कि वे शरीर से कुछ काट नहीं सके, जबकि दूसरा स्थान भी यही मूल परिणाम देता है कि वे उनसे कुछ हासिल नहीं कर पाए।

रिवायत इस सुरक्षा को सीधे अल्लाह की ओर जोड़ती है। आसिम रज़ियल्लाहु अन्हु को मृत्यु के बाद कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं दी जाती। करामत का केंद्र यह है कि अल्लाह ने एक नेक सहाबी के शरीर को दुश्मन की स्पष्ट कोशिश से सुरक्षित रखा।

अद-दबर शब्द के अर्थ में भी सावधानी आवश्यक है। फ़त्ह अल-बारी में इब्न हजर इसे मुख्य रूप से ज़नाबीर बताते हैं, जिसका अर्थ ततैयों या बर्रों जैसे डंक मारने वाले कीड़ों से लिया जाता है। वे एक दूसरा मत भी दर्ज करते हैं जिसमें नर मधुमक्खियों का अर्थ आता है। सुरक्षा वाले वाक्य का अर्थ वे यह बताते हैं कि उस जमाअत ने भेजे गए लोगों को आसिम तक पहुँचने से रोक दिया। इसलिए सार्वजनिक कहानी में किसी एक आधुनिक कीट-प्रजाति को बिल्कुल निश्चित कहना उचित नहीं है।

सहीह बुख़ारी इसी मूल घटना को दो स्थानों पर सुरक्षित करती है। इन्हें दो अलग करामतें नहीं समझना चाहिए। दोनों एक ही अल-रजीअ घटना के बाद का क्रम बताते हैं: आसिम मारे गए, क़ुरैश ने शरीर का हिस्सा लेने के लिए लोग भेजे, अल्लाह ने अद-दबर की छतरी जैसी जमाअत भेजी और वे अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर सके।

बाद की कुछ सीरत और व्याख्यात्मक रिवायतों में प्रतिज्ञा, अतिरिक्त सुरक्षा, पानी या विशेष दुआ जैसी बातें भी मिलती हैं। उनका अलग अध्ययन किया जा सकता है, लेकिन उन्हें बुख़ारी के सीधे मूल में बिना स्पष्ट स्तर के नहीं मिलाना चाहिए। इस उम्मीदवार की सबसे मज़बूत पहचान यही है कि हज़रत आसिम इब्न साबित रज़ियल्लाहु अन्हु की मृत्यु के बाद दुश्मन उनके शरीर का हिस्सा लेने आया, लेकिन अल्लाह ने अद-दबर की छतरी जैसी जमाअत के माध्यम से शरीर की रक्षा की और वे लोग अपने उद्देश्य में असफल रहे।

निष्कर्ष

प्रामाणिकता: यह सहीह बुख़ारी की स्पष्ट रिवायत पर आधारित बहुत उच्च भरोसे वाली सहाबी की करामत है। इसका सुरक्षित केंद्र हज़रत आसिम इब्न साबित रज़ियल्लाहु अन्हु के शरीर की मृत्यु के बाद दुश्मन से रक्षा है, जब अल्लाह ने अद-दबर की छतरी जैसी जमाअत भेजी और क़ुरैश के लोग शरीर से कुछ न ले सके। सबसे वफ़ादार प्रस्तुति दोनों बुख़ारी स्थानों को एक घटना रखती है और बाद की प्रतिज्ञा, पानी या विशेष सुरक्षा-दुआ की बातों को मूल से अलग रखती है।

स्रोत

Sahih al-Bukhari 3989

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Sahih al-Bukhari 4086

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Ibn Hajar, Fath al-Bari, vol. 7, p. 443

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