विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोतों में उनकी सही जन्मतिथि और जन्मस्थान निश्चित नहीं हैं। बाद के ग्रंथों में विभिन्न तिथियां मिलती हैं, लेकिन किसी को पक्का नहीं कहा जा सकता।
उम्मुल बनीन फ़ातिमा बिन्त हिज़ाम
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उम्मुल बनीन फ़ातिमा बिन्त हिज़ाम अल-कलाबिय्या, अली बिन अबी तालिब अलैहिस्सलाम की पत्नी और अब्बास बिन अली अलैहिस्सलाम, अब्दुल्लाह, जाफ़र तथा उस्मान की माता थीं। वे बनी किलाब से थीं। उनके चारों पुत्र १० मुहर्रम ६१ हिजरी / ६८० ईस्वी को कर्बला में हुसैन बिन अली अलैहिस्सलाम के साथ शहीद हुए। उनके जन्म और मृत्यु की निश्चित तिथियों के लिए प्रारंभिक ठोस प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इन्हें सावधानी से प्रस्तुत किया गया है।
उनकी सही मृत्यु-तिथि निश्चित नहीं है। ६४ हिजरी बाद के स्रोतों में एक प्रसिद्ध कथन है, पर उस पर ठोस प्रारंभिक सहमति नहीं है।
मदीना के जन्नतुल बक़ी में उनका दफ़्न होना व्यापक और प्रसिद्ध परंपरा है। किसी विशेष कब्र की ऐतिहासिक रूप से निश्चित पहचान संभव नहीं, इसलिए इसे प्रमाणित चिह्नित कब्र के बजाय प्रसिद्ध दफ़्न-परंपरा समझना चाहिए।
जीवनी और ऐतिहासिक परिचय
फ़ातिमा बिन्त हिज़ाम बिन ख़ालिद बिन रबीआ अल-कलाबिय्या, जो उम्मुल बनीन की कुनियत से प्रसिद्ध हैं, अरब के बनी किलाब कबीले से थीं। प्रारंभिक वंशावली और जीवनचरित ग्रंथ उन्हें अली बिन अबी तालिब अलैहिस्सलाम की पत्नियों में गिनते हैं। विश्वसनीय प्रारंभिक स्रोतों में उनकी जन्मतिथि निश्चित नहीं है, इसलिए बाद में बताई गई तिथियों को पक्का इतिहास नहीं माना जाना चाहिए।
अली अलैहिस्सलाम से उनके चार पुत्र हुए: अब्बास, अब्दुल्लाह, जाफ़र और उस्मान। वंशावली और इतिहास की पुस्तकों में इन चारों को उन्हीं का पुत्र बताया गया है। उम्मुल बनीन, अर्थात पुत्रों की माता, की प्रसिद्ध कुनियत उनकी इसी पारिवारिक पहचान से जुड़ी, यद्यपि इस उपाधि के आरंभ की विस्तृत कथाएं अधिकतर बाद के धार्मिक साहित्य में मिलती हैं।
उनके सबसे प्रसिद्ध पुत्र अब्बास बिन अली अलैहिस्सलाम थे, जिन्हें कर्बला में हुसैन बिन अली अलैहिस्सलाम के ध्वजवाहक और निष्ठावान सहायक के रूप में याद किया जाता है। अब्दुल्लाह, जाफ़र और उस्मान भी अपने भाई हुसैन के साथ उपस्थित थे। उम्मुल बनीन के चारों पुत्र १० मुहर्रम ६१ हिजरी / ६८० ईस्वी की घटनाओं में शहीद हुए; उनके व्यक्तिगत शहादत-वृत्तांतों के कुछ विवरण अलग-अलग मक्तल परंपराओं में भिन्न हैं।
बाद के इमामी और शोक-साहित्य में उम्मुल बनीन को धैर्य, निष्ठा और अहलुल बैत से गहरे लगाव का आदर्श माना गया। कर्बला का समाचार सुनने, अपने पुत्रों से पहले हुसैन की कुशलता पूछने और बक़ी में शोक व्यक्त करने की प्रसिद्ध रिवायतों ने उनकी धार्मिक स्मृति को आकार दिया। किंतु इन कथाओं के शब्द और विस्तृत रूप सबसे पुराने स्रोतों में समान रूप से प्रमाणित नहीं हैं, इसलिए इन्हें प्रचलित रिवायतों के रूप में बताना अधिक सावधान है।
उनकी मृत्यु की सही तिथि ज्ञात नहीं है। ६४ हिजरी का वर्ष बाद के ग्रंथों में प्रचलित है, लेकिन इस पर मजबूत प्रारंभिक सहमति नहीं मिलती। मदीना के जन्नतुल बक़ी में उनका दफ़्न होना व्यापक और प्रसिद्ध परंपरा है। आज अलग-अलग कब्रें अधिकतर बिना निशान की हैं और प्रारंभिक स्पष्ट प्रमाण सीमित हैं, इसलिए किसी विशेष कब्र की ऐतिहासिक रूप से निश्चित पहचान संभव नहीं।
अली अलैहिस्सलाम से उनके चार पुत्र हुए: अब्बास, अब्दुल्लाह, जाफ़र और उस्मान। वंशावली और इतिहास की पुस्तकों में इन चारों को उन्हीं का पुत्र बताया गया है। उम्मुल बनीन, अर्थात पुत्रों की माता, की प्रसिद्ध कुनियत उनकी इसी पारिवारिक पहचान से जुड़ी, यद्यपि इस उपाधि के आरंभ की विस्तृत कथाएं अधिकतर बाद के धार्मिक साहित्य में मिलती हैं।
उनके सबसे प्रसिद्ध पुत्र अब्बास बिन अली अलैहिस्सलाम थे, जिन्हें कर्बला में हुसैन बिन अली अलैहिस्सलाम के ध्वजवाहक और निष्ठावान सहायक के रूप में याद किया जाता है। अब्दुल्लाह, जाफ़र और उस्मान भी अपने भाई हुसैन के साथ उपस्थित थे। उम्मुल बनीन के चारों पुत्र १० मुहर्रम ६१ हिजरी / ६८० ईस्वी की घटनाओं में शहीद हुए; उनके व्यक्तिगत शहादत-वृत्तांतों के कुछ विवरण अलग-अलग मक्तल परंपराओं में भिन्न हैं।
बाद के इमामी और शोक-साहित्य में उम्मुल बनीन को धैर्य, निष्ठा और अहलुल बैत से गहरे लगाव का आदर्श माना गया। कर्बला का समाचार सुनने, अपने पुत्रों से पहले हुसैन की कुशलता पूछने और बक़ी में शोक व्यक्त करने की प्रसिद्ध रिवायतों ने उनकी धार्मिक स्मृति को आकार दिया। किंतु इन कथाओं के शब्द और विस्तृत रूप सबसे पुराने स्रोतों में समान रूप से प्रमाणित नहीं हैं, इसलिए इन्हें प्रचलित रिवायतों के रूप में बताना अधिक सावधान है।
उनकी मृत्यु की सही तिथि ज्ञात नहीं है। ६४ हिजरी का वर्ष बाद के ग्रंथों में प्रचलित है, लेकिन इस पर मजबूत प्रारंभिक सहमति नहीं मिलती। मदीना के जन्नतुल बक़ी में उनका दफ़्न होना व्यापक और प्रसिद्ध परंपरा है। आज अलग-अलग कब्रें अधिकतर बिना निशान की हैं और प्रारंभिक स्पष्ट प्रमाण सीमित हैं, इसलिए किसी विशेष कब्र की ऐतिहासिक रूप से निश्चित पहचान संभव नहीं।
ऐतिहासिक महत्व और विरासत
उम्मुल बनीन का ऐतिहासिक महत्व मुख्यतः उस परिवार से जुड़ा है जिसमें अब्बास बिन अली अलैहिस्सलाम और उनके तीन भाई पले। कर्बला में उनके चारों पुत्रों की शहादत ने उनके नाम को अहलुल बैत के इतिहास, आशूरा की स्मृति और निष्ठा तथा बलिदान के आदर्शों से स्थायी रूप से जोड़ दिया।
मुस्लिम, विशेषकर इमामी, धार्मिक संस्कृति में वे मातृ-धैर्य और अहलुल बैत के प्रति निष्ठा का प्रतीक बनीं। उनसे जुड़ी शोक और मजलिस की परंपराओं ने पारिवारिक दुख, नैतिक दृढ़ता और हुसैन अलैहिस्सलाम से प्रेम के माध्यम से कर्बला की स्मृति को आगे बढ़ाया, हालांकि उनसे जोड़ी गई हर कविता या घटना का ऐतिहासिक प्रमाण समान स्तर का नहीं है।
मुस्लिम, विशेषकर इमामी, धार्मिक संस्कृति में वे मातृ-धैर्य और अहलुल बैत के प्रति निष्ठा का प्रतीक बनीं। उनसे जुड़ी शोक और मजलिस की परंपराओं ने पारिवारिक दुख, नैतिक दृढ़ता और हुसैन अलैहिस्सलाम से प्रेम के माध्यम से कर्बला की स्मृति को आगे बढ़ाया, हालांकि उनसे जोड़ी गई हर कविता या घटना का ऐतिहासिक प्रमाण समान स्तर का नहीं है।
पारिवारिक संबंध
👪 माता-पिता
पिता
हिज़ाम इब्न ख़ालिद इब्न रबीआ अल-किलाबी
पुष्ट
🤝 जीवनसाथी और वैवाहिक संबंध
इमाम अली इब्न अबी तालिब
पुष्ट
🌱 संतान
स्रोत
Maqatil al-Talibiyyin | Abu al-Faraj al-Isfahani | Biographical entries on the sons of Ali; pagination varies by edition | https://archive.org/search?query=title%3A%28Maqatil+al-Talibiyyin%29 | Sons of Umm al-Banin and Karbala reportsAnsab al-Ashraf | Ahmad ibn Yahya al-Baladhuri | Ali family and descendants; pagination varies by edition | https://archive.org/search?query=title%3A%28Ansab+al-Ashraf%29 | Marriage and children of Ali; early genealogical framework
Al-Tabaqat al-Kubra | Muhammad ibn Sa'd | Entry on Ali and his family; pagination varies by edition | https://archive.org/details/Al-Tabqaat-ul-Kubra_Ibn-e-Saad | Early biographical and family context
Umm al-Banin | Encyclopaedia Islamica Foundation | Biographical entry; online edition | https://en.wikishia.net/view/Umm_al-Banin_%28a%29 | Identity, four sons, later devotional memory, reported death and burial traditions
Al-Baqi Cemetery | Historical overview and burial register summary | Online reference; individual grave identification remains uncertain | https://en.wikipedia.org/wiki/Al-Baqi_Cemetery | Context for the traditional burial attribution and present unmarked condition
चित्र दीर्घा
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