ज़ैद बिन हसन मुजतबा

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ज़ैद इब्न इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम मदीना में अहले बैत के सम्मानित सदस्य, ऐतिहासिक रिवायतों के रावी और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम से संबद्ध सदक़ात तथा संपत्तियों के प्रबंधक थे। उनकी माता उम्मे बशीर बिन्त अबी मसऊद अंसारी थीं। पुराने सुन्नी और इमामी स्रोत उन्हें आयु, उदारता, परिवार की देखभाल और सार्वजनिक अमानत के लिए याद करते हैं। लंबी आयु के बाद मदीना के निकट उनका निधन हुआ, फिर पार्थिव शरीर शहर लाकर जन्नतुल बक़ी में दफ़्न किया गया। उन्हें बाद के क्रांतिकारी ज़ैद इब्न अली से अलग समझना चाहिए।
जन्म

मदीना में जन्म हुआ; जन्म का निश्चित वर्ष सुरक्षित नहीं। लगभग ९० वर्ष की आयु में निधन की रिवायत पहली हिजरी सदी के आरम्भिक भाग में जन्म का संकेत देती है, पर कोई विशेष वर्ष निश्चित नहीं।

निधन

मदीना से लगभग ६ मील दूर बतहा में निधन हुआ और आयु लगभग ९० वर्ष बताई गई। कुछ जीवनियाँ निधन को १०० हिजरी के बाद रखती हैं, पर ठीक वर्ष अनिश्चित है।

दफ़न या संबद्ध स्थान

प्रारम्भिक जीवनियों के अनुसार पार्थिव शरीर मदीना लाया गया और जन्नतुल बक़ी में दफ़्न किया गया। क़ब्रिस्तान का संबंध पुष्ट है, लेकिन अलग पहचानी हुई क़ब्र निश्चित रूप से सत्यापित नहीं।

जीवनी और ऐतिहासिक परिचय

ज़ैद अलैहिस्सलाम इमाम हसन इब्न अली मुजतबा अलैहिस्सलाम और उम्मे बशीर बिन्त अबी मसऊद अंसारी के पुत्र थे। इब्न सअद और मिज़्ज़ी ने यह वंश सुरक्षित किया है, और बाद की जीवनियाँ समान नाम वाले लोगों से भेद करने के लिए उन्हें ज़ैद अल-अकबर भी कहती हैं। वह मदीना में अहले बैत की हसनी शाखा में पले। जन्म का निश्चित वर्ष सुरक्षित नहीं, किंतु लगभग नब्बे वर्ष की आयु में निधन की रिवायत उनके जीवन को पहली हिजरी सदी के बड़े भाग और दूसरी सदी के आरम्भ तक फैलाती है।

उन्होंने मदीना के विद्वत जीवन में रावी के रूप में भाग लिया। रिजाल ग्रंथ बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता, अब्दुल्लाह इब्न अब्बास और जाबिर इब्न अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हुम से रिवायत की। उनके पुत्र हसन इब्न ज़ैद, अब्दुर्रहमान इब्न अबी अल-मवाली, अबू मअशर नजीह मदनी और अन्य लोगों ने उनसे रिवायत की। इब्न हिब्बान ने उन्हें विश्वसनीय रावियों में रखा और बाद के सुन्नी जीवन-चरितकारों ने अहले बैत के प्रमुख लोगों में गिना।

ज़ैद अलैहिस्सलाम की बड़ी सार्वजनिक जिम्मेदारियों में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की सदक़ात कही जाने वाली संपत्तियों की देखरेख थी। सुलैमान इब्न अब्दुल मलिक ने उन्हें इस पद से हटाया, लेकिन उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ ने इसे वापस देने का आदेश दिया और उन्हें बनू हाशिम का वरिष्ठ और सम्मानित व्यक्ति कहा। यह घटना सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रशासनिक विश्वास दिखाती है, राजनीतिक सत्ता या इमामत का दावा नहीं।

स्रोत हसनी परिवार के भीतर उनकी जिम्मेदारी भी सुरक्षित करते हैं। हसन मुसन्ना के निधन के बाद ज़ैद ने अपने भाई के बच्चों के पालन और शिक्षा की जिम्मेदारी ली, जबकि उनकी संपत्ति दूसरे नियुक्त प्रबंधक के पास रही। मिज़्ज़ी के अनुसार बच्चे वयस्क होने तक उनके साथ रहे और ज़ैद अपने धन से उन पर खर्च करते थे। यह रिवायत उनकी उदारता और रिश्तेदारी निभाने के वर्णनों को ठोस आधार देती है।

कवियों ने उनकी उदारता, अतिथि-सत्कार और मेल-मिलाप के आर्थिक भार उठाने की प्रशंसा की। शैख़ मुफ़ीद का इमामी विवरण भी उन्हें प्रतिष्ठित, उदार स्वभाव, प्रसन्न चरित्र और बहुत नेक कार्य करने वाला बताता है। वही स्रोत स्पष्ट करता है कि ज़ैद अलैहिस्सलाम ने इमामत का दावा नहीं किया और किसी मान्य मुस्लिम समूह ने उनके लिए ऐसा दावा नहीं किया। यह भेद आवश्यक है, क्योंकि कभी उन्हें ज़ैद इब्न अली से मिला दिया जाता है, जिनकी बाद की क्रांति और राजनीतिक तथा धार्मिक इतिहास अलग है।

एक प्रारम्भिक रिवायत के अनुसार ज़ैद अलैहिस्सलाम का निधन मदीना से लगभग ६ मील दूर बतहा में हुआ। परिजन उनका पार्थिव शरीर मदीना लाए, ग़ुस्ल दिया और जन्नतुल बक़ी में दफ़्न किया। वंश-रावियों ने आयु लगभग ९० वर्ष बताई, जबकि ज़हबी केवल निधन को १०० हिजरी के बाद रखते हैं; इसलिए एक निश्चित वर्ष कहना उचित नहीं। प्रमाण जन्नतुल बक़ी के क़ब्रिस्तान से संबंध पुष्ट करते हैं, पर अलग पहचानी हुई क़ब्र सिद्ध नहीं करते।

ऐतिहासिक महत्व और विरासत

ज़ैद अलैहिस्सलाम प्रारम्भिक हसनी परिवार में गैर-क्रांतिकारी सार्वजनिक सेवा के उदाहरण हैं। सदक़ात का प्रबंधन, उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ द्वारा पद की वापसी और बनू हाशिम के वरिष्ठ व्यक्ति के रूप में सम्मान यह दिखाते हैं कि पैग़म्बर के वंशज ख़िलाफ़त या इमामत का दावा किए बिना विश्वसनीय सामाजिक जिम्मेदारियाँ निभाते थे।

हदीस रिवायत में उनका स्थान इमाम हसन अलैहिस्सलाम के घराने को मदीना के विद्वत जालों से जोड़ता है। रिजाल ग्रंथों में सुरक्षित शिक्षक और शिष्य उनके विद्वत योगदान को सामान्य भक्ति-प्रशंसा से अधिक स्पष्ट करते हैं, और विश्वसनीयता के उल्लेख सुन्नी तथा इमामी दोनों इतिहासों से उनका परिचय संभव बनाते हैं।

हसन मुसन्ना के बच्चों की देखभाल और उनकी उदारता पर लिखे शोक-काव्य अहले बैत के इतिहास का सामाजिक पक्ष सुरक्षित करते हैं: पारिवारिक संरक्षण, धर्मार्थ जिम्मेदारी और लोगों के बीच सहयोग। उनकी जीवनी यह भी सिखाती है कि उन्हें ज़ैद इब्न अली से अलग रखा जाए और अनिश्चित तिथियों तथा विशेष क़ब्र के दावों को सावधानी से लिखा जाए।

पारिवारिक संबंध

स्रोत

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Tahdhib al-Kamal fi Asma al-Rijal | Jamal al-Din al-Mizzi | Vol. 10, pp. 52-56, entry 2099 | https://www.islamweb.net/ar/library/content/1001/2241/ | Exact identity, teachers and transmitters, inclusion among reliable narrators, administration of the Prophet's charitable estates, guardianship of relatives and death at about ninety
Siyar A'lam al-Nubala | Shams al-Din al-Dhahabi | Vol. 4, biographical entry | https://www.islamweb.net/ar/library/content/60/636/ | Noble standing among Banu Hashim, hadith transmission, generosity and death after 100 AH
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Mashahir Ulama al-Amsar | Muhammad ibn Hibban | Entry 424; pagination varies by edition | https://shamela.ws/book/896 | Recognition among the distinguished Banu Hashim and association with Ibn Abbas

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